चातक

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निर्भया के असली गुनाहगार

Posted On: 21 Dec, 2015 Others में

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हे ईश्वर, मैं अपने उन अपराधों की क्षमा मांगता हूँ जिनके कारण आपने मुझे इस देश में जन्म दिया और वचन देता हूँ कि मरने से पहले इस देश की नागरिकता का परित्याग कर दूंगा, ताकि इस देश की धरती पर दोबारा जन्म न मिले!

अपराध पूरी तरह से सिद्ध था मरने वाली मासूम लड़की ने मरने से पहले अपनी पूरी वेदना को व्यक्त करते हुए कहा था कि जिन्दा जला दो उसे! लेकिन राजनीति की शौक़ीन (गैर)कानूनी व्यवस्था और स्वयं को सबसे लाचार जताने वाली (अ)न्याय व्यवस्था ने जिस तरह एक मुर्दा तंत्र के सामने घुटने टेक दिए उसे महसूस करके स्वयं के भारतीय होने पर शर्मिंदगी का अहसास होता है| कितनी बड़ी विडंबना है कि विद्वानों और न्यायी राजाओं की एक धरती पर एक भी जज एक भी वकील ऐसा नहीं निकला जो किशोर कानून की व्याख्या कर पाता पहले भी कई बार कह चुका हूँ और आज फिर दावे के साथ कहता हूँ कि कानून की कमी और नियमों की लाचारी का रोना रो रही पूरी व्यवस्था नाकारा है न्याय न दे पाने के बहाने हैं और कुछ भी नहीं| निर्भया के गुनाहगार सिर्फ वो लोग नहीं हैं जिन्होंने उसे दरिंदगी कर के मार डाला बल्कि इस देश का हर वह जिम्मेदार और अधिकार संपन्न व्यक्ति है जिसे इस देश के लोगों को न्याय देने के लिए पद, पैसा, रुतबा और अधिकार दिए गए हैं| जाहिर है कि दरिन्दे को नाबालिग कहकर छोड़ देने के लिए इस देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पूरी संसद, दिल्ली की विधानसभा, सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, फैसला देने वाला न्यायाधीश, उभयपक्ष के अधिवक्ता, गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी, संरक्षण में रखने वाले केयरटेकर, इत्यादि सारे के सारे लोग बराबर के जिम्मेदार हैं इनमे से किसी एक की यदि मंशा सही और न्यायोचित होती तो न्याय मिलता| अभी भी समय नहीं गया है न्याय मिल सकता है लेकिन इस देश में हर बात को मुद्दा बनाने और हर पीड़ा की मार्केटिंग करने का चलन आम है मीडिया से ले कर इस देश का प्रधानमंत्री तक मार्केटिंग कर रहा है और बिक रहे हैं इस देश की बेटियों के कफ़न जिनपर बलात्कार के दाग हैं| जिस देश में अधिवक्ता से ले कर महान्यायवादी तक ये समझें में विफल हैं कि कोई कानून किस मंशा के साथ बनाया गया था उस देश में न्याय की कल्पना भी असंभव है| न्याय की सबसे बड़ी सच्चाई और सबसे बड़ी विडंबना यही है कि न्याय इच्छा शक्ति से होता है अच्छी मंशा और निर्विकार भाव से होता है न कि कानून की किताबों से| किताबे सिर्फ मार्गदर्शक होती हैं उनमे स्वयं को सम्पादित करने की क्षमता नहीं होती| नियम सिर्फ किसी भाषा में लिखी पंक्तियाँ होती हैं जिनका अर्थ न्याय करने वाला उचित तरीके से करेगा ये उसकी शुचिता और मंशा पर निर्भर है| दुनिया का कोई कानून ऐसा नहीं है जिसकी व्याख्या न्याय को होने से रोके बशर्ते न्याय करने वाला व्यक्ति न्याय देते समय निर्विकार और दृढ-प्रतिज्ञ हो कि वह सिर्फ न्याय करेगा और कानून के अनुसार करेगा| तरस आता है मुझे उन अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों पर जिनके पास कानून के अपर्याप्त होने का रोना तो है लेकिन उपलब्ध कानून की व्याख्या करने की या तो मंशा नहीं या फिर अक्ल या फिर दोनों ही नहीं है बस कुर्सी मिल गई है तो नौकरी बजा रहे हैं|

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21 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Baluni के द्वारा
January 5, 2016

Well i am very glad that you have given a heartbreaking truth. yes you are right The convicted juvenile is not only responsible for this , the sick mentality of male dominated society is also responsible, One thing I want add that, Judiciary and advocate are more responsible. But dont know you have taken the Name of PM. President. i dont understand this.

    chaatak के द्वारा
    January 6, 2016

    Sir, Thanks for adding voice against injustice. PM and President cannot go scot-free in this matter I’ll soon write about how they too are equally or more responsible for this.

yamunapathak के द्वारा
January 1, 2016

चातक जी आपके ब्लॉग से मैं पूर्णतया सहमत हूँ,अपराध करने वाले को मौत की सज़ा ना मिले पर वह किसी को भी मौत दे यह कहाँ का न्याय है ?साप्ताहिक सम्मान के लिए बधाई साभार

    chaatak के द्वारा
    January 2, 2016

    यमुना जी, ब्लॉग पर आपने अपनी स्पष्ट राय दी हार्दिक धन्यवाद, आशा है कि निर्भया का केस रिवाइज़ होगा और सही सजा दी जाएगी ये फ़ाइल बंद नहीं की जा सकती वर्ना पन्नो के बोझ तले ये देश और इसकी बेटियां पिस जाएँगी |

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 30, 2015

स्नेही चातक जी आपकी वजह से आज वर्षों बाद आया यहाँ .  हर कोई हत्यारा है, निर्भया का . न्याय देवी के आँख पर पट्टी –अपने सब कह दिया .  हास्यपद और शर्मनाक स्थिति सभी के लिए आभार , बधाई

    chaatak के द्वारा
    December 31, 2015

    आदरणीय कुशवाहा जी, आपका हार्दिक धन्यवाद आपका स्नेह इसी तरह मिलता रहे यही कामना है ईश्वर हमें न्याय के लिए लड़ने की ताकत दे…  पुनश्च आभार…

Jitendra Mathur के द्वारा
December 30, 2015

आपका यह लेख मैंने पहले भी पढ़ा था चातक जी और निस्संदेह ऐसा सटीक, निर्भीक और बेलाग लेख दूसरा कोई इस विषय पर मैंने नहीं देखा । आपने जो कहा वह अक्षरशः सत्य है और यह सत्य इस देश के दुर्भाग्य को ही रेखांकित करता है । लेकिन इस विषय का एक दूसरा पक्ष भी है जिस पर मैं शीघ्र ही अपने विचार एक लेख के माध्यम से रखूंगा । साप्ताहिक सम्मान के लिए आपको हार्दिक बधाई । आप इसके पूर्णतः अधिकारी हैं ।

    chaatak के द्वारा
    December 30, 2015

    जितेन्द्र माथुर जी, भावनाएं सभी की एक जैसी है और सभी की मांग वही है बस कहने का तरीका अलग हो सकता है काश गुनाह का आंकलन करने वालों की मंशा भी अच्छी होती| ब्लॉग पर चर्चा आगे बढ़ाने के लिए आभारी हूँ|

sadguruji के द्वारा
December 30, 2015

“दुनिया का कोई कानून ऐसा नहीं है जिसकी व्याख्या न्याय को होने से रोके बशर्ते न्याय करने वाला व्यक्ति न्याय देते समय निर्विकार और दृढ-प्रतिज्ञ हो कि वह सिर्फ न्याय करेगा और कानून के अनुसार करेगा |” आदरणीय चातक जी ! सहमत हूँ आपसे ! अत्यंत सार्थक और विचारणीय लेख ! “बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक” सम्मान से सम्मानित होने और नववर्ष के मंगलमय होने की हार्दिक बधाई !

    chaatak के द्वारा
    December 30, 2015

    सद्गुरु जी, आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाये, हमारा संघर्ष न्याय मिलने तक या होने तक जारी रहेगा …

jlsingh के द्वारा
December 29, 2015

दुनिया का कोई कानून ऐसा नहीं है जिसकी व्याख्या न्याय को होने से रोके बशर्ते न्याय करने वाला व्यक्ति न्याय देते समय निर्विकार और दृढ-प्रतिज्ञ हो कि वह सिर्फ न्याय करेगा और कानून के अनुसार करेगा| तरस आता है मुझे उन अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों पर जिनके पास कानून के अपर्याप्त होने का रोना तो है लेकिन उपलब्ध कानून की व्याख्या करने की या तो मंशा नहीं या फिर अक्ल या फिर दोनों ही नहीं है बस कुर्सी मिल गई है तो नौकरी बजा रहे हैं| आदरणीय चातक जी, आपकी भावुक घोषणा मैंने फेसबुक पर भी पढ़ी थी. वस्तुत: हम सभी हतप्रभ हैं सुप्रीम कोर्ट की निष्क्रियता पर. इस देश में न्याय खरीदे जा सकते हैं तभी तो अपराध नहीं रुक रहे. काश की ऐसी घटना किसी VIP के साथ हुई होती तब भी क्या यही फैसला होता? या फिर कानून को हाथ में लेने पर मजबूर होते? बहरहाल आपको मिले सम्मान की बधाई! आप ऐसे ही अपनी कलम चलते रहें शायद कोई बदलाव आये! सादर

    chaatak के द्वारा
    December 29, 2015

    स्नेही जे. एल. सर, काफी दिनों से आस लगाए बैठे थे कि न्याय मिलेगा, आत्मा को शांति मिलेगी देश को राहत मिलेगी लेकिन सारी बातें कोरी कल्पना निकल गई ….. दुखद है देश का दुर्भाग्य है कि जिस देश के लोगों की आस्था बढ़ानी चाहिए न्याय व्यवस्था में उसी देश के लोगों को न्याय का मुंह न ताकने की अपील कर रहा हूँ! दुखद है !!!!

aksaditya के द्वारा
December 29, 2015

मीडिया से ले कर इस देश का प्रधानमंत्री तक मार्केटिंग कर रहा है और बिक रहे हैं इस देश की बेटियों के कफ़न जिनपर बलात्कार के दाग हैं| एक ह्रदय को छूने वाले और दिमाग को झकझोरने वाले बेहतरीन लेख के लिए बधाई बंधू..

    chaatak के द्वारा
    December 29, 2015

    मित्र अक्सादित्य, ह्रदय में कुछ टूट सा गया है जिस देश की बड़ी अच्छी सी छवि बना रखी थी उसमे इस देश का फ्रेम तक नहीं बचा है उसकी अभिव्यक्ति मात्र है|

rppandey के द्वारा
December 29, 2015

mitr , Nirbhaya ke sath har jagah rajniti hui , uske ma baap ne bhi rajniti kiya /

    chaatak के द्वारा
    December 29, 2015

    शायद आपकी बात सही हो फिर भी निर्भया को न्याय तो मिलना चाहिए था …

ishwar singh rautela के द्वारा
December 29, 2015

य़दि आप सक्षम होते तो क्या करते और कैसे

    chaatak के द्वारा
    December 29, 2015

    सक्षम होता तो सारे ‘यदि’ ‘अवश्य’ बन जाते न्याय होता वो भी कानून के अनुसार बिना एक पंक्ति का उलंघन किये ……..

chaatak के द्वारा
December 29, 2015

हार्दिक धन्यवाद जागरण ।

Aakash Tiwaari के द्वारा
December 24, 2015

चातक जी… शायद आपको मेरी वो पोस्ट याद हो…”अब बलात्कार नही करूँगा”.. कुछ इस तरह की सजा की आवश्यकता ही थी..मगर अफ़सोस जिनसे उम्मीद करके जिन्हे सत्ता तक पहुँचाया गया वो भी बेकार निकले…..आपने वही लिखा है जो मै खुद लिखना चाहता था… आकाश तिवारी

    chaatak के द्वारा
    December 25, 2015

    आकाश जी, आपकी वह पोस्ट मैं कैसे भूल सकता हूँ, अफ़सोस हमें भी है कि जिनसे उम्मीद थी उन्होंने फिर नाउम्मीदी ही दी है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है और पूरा विश्वास है मुझे लोकतंत्र में उलझे भारतीय युवा जनमानस पर, न्याय होकर रहेगा, वीभत्स कुकर्म पर वीभत्स न्याय…..


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