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हाथी का अंडा!

Posted On: 18 May, 2014 Others में

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वैसे तो लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह सिर्फ प्रतीक होते हैं लेकिन कभी-कभी ये बड़े सार्थक भी सिद्ध हुए हैं; जैसे हाल में ही सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव २०१४ में! यदि गौर किया जाय तो लगता है जैसे इस बार चुनाव राजनीतिक दल लड़ रहे थे लेकिन मत और परिणाम उनके चुनाव चिन्ह के अनुसार ही आये| तो सबसे पहले प्रधानमंत्री पद के तीन बड़े दावेदारों राहुल गांधी, नरेन्द्र मोदी और केजरीवाल जी की पार्टी से शुरू करते हैं| कांग्रेस का चुनाव चिन्ह हाथ का पंजा संसद से बाय-बाय (अलविदा) वाली मुद्रा में था और जनता ने उसे बाय कह दिया कांग्रेस का एक भी मंत्री नहीं कह सकता कि उनके पंजे के इशारे को जनता ने दूर तक अलविदा न कहा हो| फिर बारी आई कमल की, सभी दलों ने मिलकर अकेले कमल पर ही कीचड़ उछाले अब ये पता नहीं चल पाया है कि इन्हें इस श्रमसाध्य कार्य के लिए मनरेगा से पेमेंट मिली या नहीं, लेकिन कमल जो खिला तो पूरा हिन्दुस्तान भगवा रंग में रंग गया| फिर झाड़ू की बारी आई और जनता ने पूरी पार्टी पर ऐसी झाडू लगाई कि वंशवाद की राजनीति ख़त्म करने का दम भरने वाले कविराज ने अपने पहले इलेक्शन को ही आखिरी घोषित कर सन्यास लेने के संकेत दे दिए तो युगपुरुष केजरीवाल अपनी निम्बस २०१४ (झाड़ूकाप्टर) पर बैठकर वापस दिल्ली की गद्दी बचाने पहुँच गये, इस चुनाव चिन्ह का उन्हें व्यक्तिगत फायदा भी मिला है पुरानी झाडू की 108 परिक्रमा करके उनकी पुरानी खांसी भी काफी ठीक हो गई है|
बिहार में जे.डी.यू. का तीर तो जन्मजात उल्टा बना है इस बार इसका मुंह जनता ने सीधे सुशासन बाबू की ओर मोड़ दिया; बेचारे मोदी-गान करते-करते खुद बचे-खुचे ही बचे| गुजरातियों को 24 घंटे लाईट देने वाले नेता की तुलना में लालू की लालटेन का दम उन्हें बिहार की जनता ने समझा दिया| लोग जानते थे कि चुनाव के बाद लालू जनता को बिना तेल की लालटेन ही थमाने वाले है सो लालू को माचिस का एगो तीली नहीं मिला कि कहीं पर लालटेन जला कर फिर से चारा खा सकें|
सबसे सार्थक चुनाव चिन्ह रहा सपा की सायकिल और बसपा का हाथी| जनता जानती है कि कमल की खुशबू हवाओं में तैर रही हो तो किसी भी हवाई जहाज को मात दे देगी और पिता-पुत्र चाहे जितना दम लगायें उनकी सायकिल बिना चालीस बार पूरी ओवरहालिंग के लखनऊ से दिल्ली नहीं पहुँच सकती सो अपने चहेते धरतीपुत्र की सायकिल के दोनों पहिये ही निकाल लिए| सबसे कमाल का चुनाव चिन्ह रहा बसपा का हाथी, सोशल-इंजीनियरिंग का ये स्वयंभू वाहक कब जेनेटिक इंजीनियरिंग का अजूबा बन कर अन्डे देने लगा खुद मायावती को पता नहीं चला, वैसे सोशल मीडिया के सूत्रों से पता चला है कि इस विषय पर डिस्कवरी चैनल और नेशनल जियोग्राफी ने शोध शुरू कर दिया है जबकि मायावती का कहना है कि पूरी दुनिया में ऐसा सिर्फ उनके हाथी ने किया है और अन्डे देने वाले इस हाथी पर सिर्फ दलितों का अधिकार है वैसे इसका पेटेन्ट हमेशा की तरह मायावती जी के नाम पर ही रहेगा न कि दलितों के|

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    chaatak के द्वारा
    May 28, 2014

    बिलकुल सही योगी जी, आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ | ब्लॉग को समय देने का हार्दिक धन्यवाद!

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
May 23, 2014

बहुत खूब चातक जी, व्यंगात्मक लहजे में बहुत सुन्दर ढंग से विश्लेषित लेख.

    chaatak के द्वारा
    May 23, 2014

    स्नेही शिवेंद्र जी, ब्लॉग को समय देने और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद!

harirawat के द्वारा
May 23, 2014

अति सुन्दर विवेचना के लिए चातक जी साधुवाद ! कमल खिला, उसकी सुगंध से लालटेन बुझ गयी, लालू चारा कैसे खाएगा, पत्नी पुत्री भी इसको जला नहीं पाई हैं ! मुलायम की साइकिल पंक्चर होगई, वंश परम्परा का दीप बुझ गया, उधर काश्मीर में क्या हुआ :? बेटे की सूरत भी पापा की सीट नहीं बचा पाया ! बंगाल में मारकिष्ट चारों खाने चीत, भूल गए लालू नीतीश का पुराना फार्मूला “धर्मनिरपेक्ष” करवाया जमा जमाया सता का सफाया, मायावती के हाथी माया द्वारा जमा किये गए असीमित धन सम्पति के बोझ तले दम तोड़ गए, मैडम को कहीं का भी नहीं छोड़ गए ! काम लिखा ज्यादा समझना ! हरेन्द्र जागते रहो !

    chaatak के द्वारा
    May 23, 2014

    बहुत खूब हरेन्द्र जी, सच कहा आपने कम लिखा है परन्तु काफी अर्थ छिपा है इन कम शब्दों में ! ब्लॉग को समय देने और व्यंग को व्यंग का साथ देने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

nishamittal के द्वारा
May 22, 2014

सुन्दर विश्लेषण

    chaatak के द्वारा
    May 22, 2014

    ब्लॉग को वक्त देने का हार्दिक धन्यवाद !

rajanidurgesh के द्वारा
May 20, 2014

चातकजी हाथी का अंडा अत्यंत उपयुक्त व्यंग्य का पुट देता आलेख सार्थक रचना

    chaatak के द्वारा
    May 21, 2014

    रजनी जी, ब्लॉग को समय देने और व्यंग के शीर्षक की सार्थकता पर राय देने का हार्दिक धन्यवाद!

Martadey के द्वारा
May 20, 2014

न भई न यह अंडा नही है यह तो प्रसिध नारा तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार का फटा हुआ जूता है । जनता ने इसबार उसमें गू भरकर हाथी के पिछवाडे जैसै मुह पर ऎसा खींचकर मारा है की मुह टेढा हो कर उलटा सीधा बक रहा है । इधर लैपटाँप देकर विकास का डंका पीटने वाले सायकिल के पहिये फुस हो गये, सैफइ उतसव में 300 करोड उड़ाने वालो को जनता ने सही सबक सिखाया । अब बाप, चाचा और सुपुत्र मिलकर खंभा नोच रहे है। मज़ा आ गया है । सबसे खुशी मायावती के सुपड़ा साफ होने पर है।

    chaatak के द्वारा
    May 21, 2014

    स्नेही मित्र, लोकतंत्र में जनता जब चाहे ताकतवर नेताओं को धूल चटा सकती है सपा और बसपा इस सच्चाई को भूलकर कुल आम मुलमानो को और दलितों को ‘मेरी जेब में हैं’ कहने लगे थे| जबकि सच्चाई ये है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी नागरिक ये बर्दाश्त नहीं कर सकता कि वह किसी की जेब में है| ब्लॉग को समय देने और प्रतिक्रिया द्वारा अपनी राय रखने का हार्दिक धन्यवाद !

sudhajaiswal के द्वारा
May 20, 2014

आदरणीय कृष्ण जी, बहुत सही व्यंग किया है| बहुत पसंद आया, हार्दिक बधाई!

    chaatak के द्वारा
    May 21, 2014

    स्नेही सुधा जी, काफी दिनों बाद व्यंग लिखा आपकी राय जानकर बेहद ख़ुशी हुई ! हार्दिक धन्यवाद!

rameshbajpai के द्वारा
May 18, 2014

सबसे कमाल का चुनाव चिन्ह रहा बसपा का हाथी, सोशल-इंजीनियरिंग का ये स्वयंभू वाहक कब जेनेटिक इंजीनियरिंग का अजूबा बन कर अन्डे देने लगा खुद मायावती को पता नहीं चला, | प्रिय श्री चातक जी बहुत खूब | शब्दों से परे|

    chaatak के द्वारा
    May 18, 2014

    आदरणीय बाजपेयी जी, सादर अभिवादन, हौसला-अफ़ज़ाई का तहे-दिल से शुक्रिया !

jlsingh के द्वारा
May 18, 2014

सार्थक व्यंग्य चातक जी!

    chaatak के द्वारा
    May 18, 2014

    आदरणीय जे.एल. सिंह जी, ब्लॉग को वक्त देने के लिए हार्दिक धन्यवाद!


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