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आम चुनाव: पारदर्शी हमाम

Posted On: 30 Apr, 2014 Others में

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आम चुनावों के इस मौसम में सभी पार्टियों, नेताओं, और मीडिया तक को पारदर्शी हमाम में नहला दिया है| अब हमाम में लोग कैसे होते हैं ये हम क्यों बताएं भाई!
सबसे पहले मीडिया की बात कर लेते हैं [क्योंकि बात करने का ठेका तो मीडिया का ही है]
लोकतंत्र के इस चौथे स्तम्भ पर इससे पहले इतनी दीमक कभी नहीं दिखी थी| इसने एक बार जो बिना झाग वाले इस हमाम में गोटा लगाया तो निकला ही नही| आज हालात यह है कि मीडिया के अंग-प्रत्यंग की थ्री-डी तस्वीरें जनता के मानस पटल पर अंकित हो चुकी हैं| चुनाव के परिणाम कुछ भी हों परन्तु जब इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा तो यह दौर मीडिया की ताकत का बेजा इस्तेमाल और गैरजिम्मेदाराना पत्रकारिता के लिए जाना जायेगा|
२०१४ के लोकसभा चुनाव में चर्चा, संवाद, और रिपोर्टिंग के नाम पर जो नंगई और तमाशा किया गया उसके बीच पत्रकारिता और ईमानदारी को छोड़कर बाकी सबकुछ नजर आया| इलेक्ट्रानिक मीडिया की बढ़ती ताकत का प्रयोग लोकतंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता था परन्तु टी०आर०पी० को छोड़कर बाकी किसी भी मुद्दे पर ना तो मीडिया गंभीर रहा और ना ही इसके कैमरे की निगाह वहां पहुंची जहाँ से लोकतंत्र को बल मिलता| कुछेक प्रस्तुतकर्ताओं और रिपोर्टरों को छोड़ दें तो अधिकतम सारे मीडिया एंकर सिर्फ और सिर्फ न्यूज एक्टर और न्यूज एक्ट्रेस नजर आये जिन्होंने भ्रस्ट नेताओं की तरह ही लटके-झटके और भाँति-भाँति के भाव-भंगिमाएं बनाकर किसी न किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष या विपक्ष में प्रचार/कैम्पेन किया| कुछ न्यूज एक्टर/ऐक्ट्रेस ने तो जनता की आवाज को सीधे-सीधे नकारते हुए बेशर्मी से भरे हुए वक्तव्य और मंशा प्रकट करने में भी झिझक नहीं दिखाई| पत्रकारिता की संजीदगी निरर्थक टी० वी० बहस और लाईट, कैमरा, एक्शन में कब और कहाँ खो गई पता ही नही चला|
पार्टियों के एजेंडे और नीतियां इस आम चुनाव में कहीं मुद्दा बनते नजर नहीं आये| सिर्फ कांग्रेस और भाजपा के मेनिफेस्टो सामने आये जिन्हे न तो समझने की कोशिश की गई न समझाने की| दुखद बात यह है कि स्वयं को सेकुलरिज़्म की आका घोषित कर चुकी कांग्रेस भी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के भरोसे अपनी लाज ढकने की कोशिश करते नजर आ रही है| शेष सारी पार्टियां किसी न किसी तरह जातियों और सम्प्रदायों को बांटने और वोट बैंक पर कब्ज़ा करने के लिए लुंगी डांस करते रहे वो भी बिना लुंगी के|
नेताओं ने हर तरह की लफ्फाजी, बदतमीजी और अनर्गल प्रलाप की जबरदस्त प्रैक्टिस की| आचार संहिता जैसी किसी चीज से किसी नेता का दूर-दूर तक वास्ता नहीं रहा और ऐसा करने में राष्ट्र की एकता, अखंडता और भाईचारा तार-तार होकर बिखरते रहे और हमाम गुलजार होता रहा|

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshbajpai के द्वारा
May 4, 2014

इलेक्ट्रानिक मीडिया की बढ़ती ताकत का प्रयोग लोकतंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता था परन्तु टी०आर०पी० को छोड़कर बाकी किसी भी मुद्दे पर ना तो मीडिया गंभीर रहा और ना ही इसके कैमरे की निगाह वहां पहुंची जहाँ से लोकतंत्र को बल मिलता| प्रिय श्री चातक जी टी आर पी की चाहत में मिडिया पंगु होता जा रहा है | लोक तंत्र से भला क्या मतलब | बधाई की आप इस विषय में चिंतन कर रहे है |

    chaatak के द्वारा
    May 5, 2014

    आदरणीय बाजपेयी जी, सादर अभिवादन, मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ मीडिया को ये भी ध्यान नही रहा कि जनता की आवाज़ को दबाने और उसपर अपनी मंशा थोपने से वही लोकतंत्र कमजोर हो रहा है जिसने उन्हें ताकत दी है| ब्लॉग पर प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

sudhajaiswal के द्वारा
May 2, 2014

आदरणीय कृष्ण जी, सादर अभिवादन, आम चुनाव में मीडिया की भूमिका का सही सटीक विश्लेषण आपने किया है| राजनीति की तस्वीर को इसने मूवी मसाला की तरह जनता के समक्ष पेश किया गया है जिससे नेताओं और राजनितिक दलों की सही तस्वीर जनता देख नहीं पा रही| टी आर पी और सत्तारूढ़ सरकार की खातिर देशहित और राजनितिक मुद्दों को मनोरंजक टीवी शो बनाकर रख दिया गया है| ईश्वर से प्रार्थना है कि इस बार ऐसी सरकार सत्ता में आये जो देशहित को सर्वोपरि माने जिससे देश के अच्छे दिन आयें| अच्छे और विचारणीय आलेख के लिए आपको हार्दिक बधाई!!

    chaatak के द्वारा
    May 2, 2014

    स्नेही सुधा जी, हिन्दुस्तान जैसे लोकतंत्र में सिर्फ दो ऐसी व्यवस्थाएं है जो नागरिकों को निःस्वार्थ और पक्षपात-रहित रहकर उनकी आवाज़ को बुलंद करने और उन्हें विश्वास देने की गारंटी होता है और वो हैं- मीडिया और न्यायालय| दुर्भाग्य है इस देश का कि दोनों ही पूरी तरह से भ्रष्ट और पथभृष्ट हो चुके हैं| ब्लॉग को समय और प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

Sumit Bhardwaj के द्वारा
May 1, 2014

चातक जी, मैं आपका तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूँ कि आपने मीडिया और राजनेताओं के नक़ाब को जनता के सामने ला दिया है |चुनाव के परिणाम कुछ भी हों |

    chaatak के द्वारा
    May 1, 2014

    सुमित जी, आपने ब्लॉग को अपना समय दिया और प्रयास को सराहा आपका हार्दिक धन्यवाद!


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