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नरेन्द्र मोदी vs अरविन्द केजरीवाल

Posted On: 1 Apr, 2014 Others में

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हिन्दुस्तान के आम चुनावों में अब तक के सबसे ख़ास चुनाव के समय ज्यादा चर्चा सिर्फ दो व्यक्तियों की हो रही है; एक हैं, नरेन्द्र मोदी और दूसरे हैं, अरविन्द केजरीवाल| अरविन्द केजरीवाल ने भले ही एक साल से भी कम समय में राष्ट्रीय राजनीति में ख़ासा हलचल पैदा कर दी है लेकिन उनकी राजनीतिक सोच और चरित्र दोनों इसी अल्प समय में ही दागदार भी हो चुके हैं| निश्चय ही यह स्थिति उनके राजनीतिक भविष्य के लिए बहुत बुरी साबित होने वाली है| केजरीवाल का दोषपूर्ण व्यक्तित्व भी उनके मार्ग की एक बहुत बड़ी बाधा है| आजकल तो आलम ये है कि केजरीवाल को उनके अपने समर्थक भी गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि ज्यादातर लोग उनकी आरोप उछालने और दूसरों पर कीचड फेकने के स्टंट से ऊब चुके हैं| फिलहाल तो स्पष्ट देखा जा सकता है कि अरविन्द केजरीवाल के पास मोदी विरोध को छोड़कर कोई बात नही है| उनके भाषणों से यदि मोदी पर किये गए कमेंट्स को हटा दिया जाए तो वे कमोवेश मनमोहन सिंह से भी ज्यादा चुप नजर आने लगेंगे| बड़ा क्षोभ होता है ये देखकर कि एक अच्छा और पढ़ा लिखा पूर्व आई०ए० एस० शब्दों के लिए तरस रहा है उसके पास अपने देश के बारे में, उसकी समस्या, उसकी नीतियों के बारे में कोई विचार ही नहीं है!
विचार करता हूँ तो समझ में आता है कि केजरीवाल ने अन्ना के आन्दोलन में मैनेजमेंट सीखा, बोलने का हुनर माँजा और जब उन्हें लगा कि वे अब लोगों को रिझाने और सार्वजनिक रूप से झूठ को सच और सच को झूठ बनाने की कला सीख गए हैं तो अपने पूर्वनियोजित कार्यक्रम के तहत राजनीति में छलांग लगा दी| केजरीवाल के दिल्ली में सफल होने का कारण कांग्रेस विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के विरुद्ध लोगों का गुस्सा और इलेक्ट्रानिक मीडिया की मेहरबानी रही| सचमुच आश्चर्यजनक था कि दिल्ली में उनकी पार्टी दूसरे स्थान पर रही जबकि उन्होंने दिल्ली के लिए न तो किसी नीति को, न विकास की रूपरेखा को और न ही दिल्लीवासियों के लिए कोई जनकल्याणकारी योजना को सामने रखा था! सिर्फ वादे थे वो भी ऐसे जिनका कोई औचित्यपूर्ण आधार नही था| कुल मिला कर अरविन्द की शख्सियत पूरी तरह से इलेक्ट्रानिक मीडिया के रहमो-करम पर ही है और जिस मीडिया ने उन्हें बनाया है वही मीडिया उन्हें मुंह के बल गिरने से रोक नही पायेगा|
दूसरी तरफ चर्चा के, विरोधी पार्टियों के निशाने और साथ ही साथ जिज्ञासा से भी केंद्र बिंदु हैं, नरेन्द्र मोदी जिन्होंने ‘भारत कैसा होना चाहिए? कैसा है? और वे इसे कैसा बनाना और देखना चाहते हैं?’ सभी बिन्दुओं पर बड़ी ही स्पष्ट योजनायें सामने रखी, चल रही योजनाओं की खामियां उजागर की, और सवाल कि ‘क्या उनकी योजना सही है?’ पर ‘गुजरात मॉडल की सफलता’ का उदाहरण प्रस्तुत किया| मोदी ने वादे किये और उन वादों को वो निभा सकते हैं, इस बात की, ‘गुजरात में किये गए विकास के कार्यों को दिखाकर’, गारंटी भी दी| शायद  यही कारण है कि उन्हें जनमानस का समर्थन मिलता चला गया| दुरूह परिस्थितयों में बिना विचलित हुए जिस तटस्थता से उन्होंने अपने कार्य को जारी रखा वह लोगों में विश्वास जगाता है और उनकी बाते उनका व्यक्तित्व मीडिया की गुलामी से आज़ाद रहता है| मोदी ने अपने समर्थकों को यकीन दिलाया कि वे उनके विश्वास को कभी टूटने नहीं देंगे| परिणाम ये हुआ कि मोदी के समर्थकों में पार्टी कार्यकर्ताओं से हट कर देश के असली आम आदमी की बाढ़ आनी शुरू हो गई| मोदी का करिश्माई व्यक्तित्व कैमरे और शोर की देन नही है बल्कि लगतार चुनौतियों का सामना करते हुए हर बार स्वयं को सिद्ध करने की क्षमता और उनका अद्भुत समर्पण है| मोदी जब भी मंच पर होते हैं तो उनके भाषण में जहाँ विकास की स्पष्ट रूपरेखा होती है, वहीँ राष्ट्र की आतंरिक और वाह्य सुरक्षा की अदम्य इच्छा भी प्रकट होती है जो उन्हें बड़ी ही आसानी से एक आम हिन्दुस्तानी से जोड़ती है|
एक ओर जहाँ केजरीवाल सिर्फ और सिर्फ मोदी के ऊपर प्रहार के नायब तरीके खोजने में अपने मूल बिंदु ‘भ्रष्टाचार उन्मूलन’ से भटक जाते हैं वहीँ मोदी किसी और बात में समय न गंवाते हुए विकास का फार्मूला देते हैं| जहाँ केजरीवाल भ्रष्टाचार को भुलाकर साम्प्रदायिकता की बात करके मोदी को असहज करने की कोशिश करते हैं वहीँ मोदी सीधे पकिस्तान और चीन को हद में रहने की चेतावनी देते हैं| जहाँ केजरीवाल बांग्लादेशी घुसपैठियों की हिमायत और काश्मीर मसले पर अपने सहयोगियों की बातों पर लीपलोती कर खुद बेनकाब हो जाते हैं वहीँ ‘मोदी ही आतंकियों के निशाने पर क्यों?’ का जवाब जनता स्वयं ढूँढ लेती है| आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र ऐसे ही कई प्रश्नों पर जनता स्वयं विचार कर रही है और आश्चर्यजनक है कि इस बार जनता बड़ी तेजी से निर्णय भी ले रही है| क्या होगा ये भविष्य के गर्भ में है लेकिन हम ‘अच्छा होगा’ की आशा तो जरूर रख सकते हैं|

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

R K KHURANA के द्वारा
April 8, 2014

प्रिय चातक जी, कृपया इन बिन्दुयों पर भी ध्यान दीजिये ! १. गुजरात में अमित जेठिया जैसे आर टी आई कार्यकर्त्ता कि हत्या कर दी गयी ! जिसमे भाजपा के नेतायो का नाम स्पष्ट रूप से है ! २. गुजरात में दस साल तक लोकायुक्त कि नियुक्ति नहीं कि गयी ! ३. उच्चतम न्यायालय ने अमित बेन पातें को जमीन आबटन मामले में दोषी पाया फिर भी आज वो गुजरात में मंत्री है ! ४. चार सौ करोड़ के मछली पालन घोटाले में कोर्ट द्वारा दोषी पाये गए पुरषोतम सोलंकी आज भी मंत्री है ! ५. भ्रष्टाचार के मामले में जेल यात्रा कर चुके यदुरप्पा को भाजपा पार्टी में फिर शामिल किया। ६.चुनाव के शोर में सच कई बार सुनाई नहीं देता खासकर जब शोर करने वाला झूठ बोलने में माहिर हो। राम कृष्ण खुराना

    chaatak के द्वारा
    April 8, 2014

    आदरणीय खुराना जी- कुछ और भी बिन्दुओं पर प्रकाश डालते तो मामला साफ़ हो जाता- १. केजरीवाल हर बार अपने वादों और इरादों से मुकर जाते हैं| २. उनके नज़र में सभी भ्रष्ट हैं लेकिन वो अपने इल्जामो को लेकर कभी अदालत नहीं जाते यानी उनके खाते में अभी एक भी भ्रष्टाचारी का विकेट नहीं है| ३. सोनिया, मनमोहन और राहुल हर भ्रष्ट को बरी करवा ले जाते हैं यथा- कणीमोड़ी, ए राजा, मनमोहन सिंह, पवन बंसल, रावर्ट वाड्रा लिस्ट बहुत लब्म्बी है| ४. उपरोक्त सभी आरोपों के बावजूद गुजरात सबसे खुशाल और समृद्ध प्रदेश है और मोदी सबसे लोकप्रिय नेता [सभी खबरिया चैनल जो भाजपा और मोदी विरोधी भी हैं] ५. उत्तर प्रदेश में लोकपाल और आर० टी० आई० सब काम कर रही हैं फिर भी २ साल में ही सवा सौ से ज्यादा साम्प्रदायिक दंगे| ६. इन सभी बातो को दरकिनार कर देते हैं- आप ही बताइए किस पार्टी और नेता को चुने है कोई इस लायक जिसे प्रधानमंत्री के रूप में आप देखना चाहते हैं| ७. आपके द्वारा लिखा गया छठा बिंदु सीधे केजरीवाल की ही और इशारा कर रहा है ना मानिये तो आज के दैनिक जागरण में सम्पादकीय पृष्ठ पर राजीव सचान जी का लेख पढ़ लीजिये :) शीर्षक है ‘एक उतावला राजकुमार’ कृपया देश को गुमराह करने की कोशिश न करें!

jlsingh के द्वारा
April 6, 2014

क्या होगा ये भविष्य के गर्भ में है लेकिन हम ‘अच्छा होगा’ की आशा तो जरूर रख सकते हैं| आदरणीय चातक जी, सादर अभिवादन! थोडा सा मेरा मत आपसे अलग होगा यहाँ…. मोदी जी में नेतृतव और निर्णय लेने की क्षमता है, इससे इंकार नहीं कर रहा हूँ पर उनके भाषण में जो दम्भ दीखता है, वह भी बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता. केजरीवाल अभी अभी राजनीति में आए हैं और वे और उनकी पार्टी के लोग राजनीति सीख रहे हैं. उनकी नीयत और सिंद्धांत को मैं गलत नहीं मानता..जब केजरीवाल कोई बड़ा फैक्टर नहीं हैं तो, आजकल सभी लोग उसके पीछे हाथ धोकर क्यों पड़े हुए हैं. मोदी जी पहले तो कांग्रेस मुक्त भारत चाहते हैं. फिर ‘सबका’ यानी सपा, बसपा और कांग्रेस मुक्त, केजरी मुक्त. केजरीवाल को अमेरिका और पाकिस्तान का दलाल कहने में भी कोई हिचक नहीं हो रही है. अब उसपर हिंसक प्रहार किया जा रहा है.क्या मोदी जी या भाजपा जो सत्ताके करीब पहुँचती दीख रही है, उसे कोई विपक्ष नहीं चाहिए. मोदी जी के साथ जो दल और नेता आकर मिल रहे हैं, सभी क्या दूध के धुले हैं?..कल वही विपक्ष में रहकर मोदीजी और भाजपा की आलोचना किया करते थे, आज सत्ता की लालच में मोदी जी का गुणगान करने लग जाते हैं. साबिर अली का केस तो अभी हाल में ही देखा है न आपने भी… अब अमित शाह और वसुंधरा राजे सिंधिया का भड़काऊ बयान क्यों? .एक विकास पुरुष की छवि वाले व्यक्तित्व को अलगाववादी छवि को इस समय उजागर करने का क्या तात्पर्य है… ये कुछ मेरे विचार हैं देश का हित हो, यह कौन नहीं चाहता ? सादर!

    chaatak के द्वारा
    April 7, 2014

    आदरणीय जे०एल० सिंह जी, सादर अभिवादन, मत-विभिन्नता स्वस्थ लोकतंत्र के शुद्धिकरण का एक अच्छा कारक है और मुझे हमेशा अच्छा लगता है बशर्ते यह किसे द्वेष या पूर्वगृह से ग्रसित न हो| आपके मत को मैं बिंदुवार लेता हूँ- पहला तो आपने स्वयं माना है कि “मोदी जी में नेतृतव और निर्णय लेने की क्षमता है”| दूसरा आप मोदी के दम्भ की बात करते हैं तो उसे आप कमी मान सकते हैं लेकिन मैं उसे एक कुशल शासक का अहम चरित्र मानता हूँ देश का प्रधानमंत्री वही होना चाहिए जिसमे आत्मसम्मान और राष्ट्र के गौरव का अभिमान हो व्यक्तिगत गर्व से ही उपरोक्त दोनों उपजते हैं शायद इस बात से भी आप इंकार नहीं करेंगे| तीसरी बात- सत्ता का लोभ कभी ख़त्म नही होता और इसके सबसे अच्छे प्रमाण केजरीवाल हैं जो अवसर पाते ही धरना देते हैं, अवसर पाते ही अनशन छोड़ कर भाग जाते हैं, बिना अवसर के ही अन्ना को छोड़कर राजनीति करने उतरते हैं और खुद भाजपा में जाने की बात कह कर पलट भी जाते हैं| दूध का धुला कोई नही परन्तु जब सर पर मोदी जैसा शासक हो तो कोई भी बेईमान ईमानदारी से काम करना शुरू कर देगा| आपने तो देखा ही होगा कि ईमानदार अफसर आते ही क्लर्क से ले कर चपरासी तक हरिश्चंद हो जाते हैं और बेईमान अफसर के बैठते ही सारे फिर कफ़न-चोर बन जाते हैं| चौथा- आपको नही लगता कि पिछले १० वर्षों में भ्रष्टाचार चरम पर पहुँच गया है और कांग्रेस यदि भ्रष्ट है तो उसे सींच कौन रहा है? क्या ये सपा और बसपा नहीं है? फिर इनके समूल विनाश की बात पर आपको ऐतराज़ क्यों? पांचवा वसुंधरा ने बयान नहीं जवाब दिया है जब आप प्रतिकार के लिए नाकारा विपक्ष तक से सहमति जताते हैं तो सरे-आम धमकी देने वाले को जवाब देने वाले को भड़काऊ कैसे कह सकते हैं? ये तो गलत है कि प्रतिकार न किया जाए इसे तो गांधी जी भी सबसे बड़ा पाप कहते थे| छठा- अमित शाह के किस बयान को आप भड़काऊ कह रहे हैं? जिसमे वो लोगों से वोट देकर बदला लेने की बात कह रहे हैं तो इसमें भड़काऊ क्या है? मार-काट छोड़कर वोट देकर अपनी ताकत दिखाना यदि भड़काऊ है तो आग लगा देनी चाहिए हिन्दुस्तान के संविधान को क्योंकि ये भड़काऊ ताकत उसी ने हमें दी है और बार बारवोट देने को प्रेरित भी करता है! आपकी प्रतिक्रिया पाकर बेहद ख़ुशी हुई आशा है मेरे विनम्र उत्तर से आप संतुष्ट होंगे| हार्दिक धन्यवाद!

R K KHURANA के द्वारा
April 6, 2014

प्रिय चातक जी, बहुत दिनों के बाद आपकी रचना देखी ! पुरानी यादें ताज़ा हो गयी ! आपके लेख में सिर्फ मोदी की तारीफ ही लिखी है जबकि मैं समझता हूँ कि एक लेखक को राजनीती से दूर रहकर सत्य को उजागर करना चाहिय ! मैं किसी पार्टी के लिए नहीं लिख रहा ! लेकिन जहाँ तक मोदी का सवाल है तो वो भी तो कांग्रेस और शहजादे के खिलाफ ही बोलते हैं ! यह तो राजनीती है ! जो राजनीती में आता है दूसरी पार्टी के खिलाफ बोलेगा ही ! आप सिक्के के दोनों पक्षो को बराबर देखे ! आशा है मेरी बात को आप अन्यथा नही लेगे ! राम कृष्ण खुराना

    chaatak के द्वारा
    April 7, 2014

    आदरणीय खुराना जी, सादर अभिवादन, आपकी राय से इत्तेफाक रखता हूँ मैंने केजरीवाल की आलोचना की है ऐसा लेख को पढ़ने के बाद भ्रम हो सकता है परन्तु ध्यान से देखने मैंने आलोचना नही की है सिर्फ दोनों के ट्रैक रेकार्ड (आप राजनीतिक रिपोर्टकार्ड भी कह सकते हैं) पर टिप्पड़ी की है इसे थोडा सरल करके बताता हूँ- ये दो परीक्षार्थी हैं जिनमे से एक बुरी तरह से फेल हुआ है और दूसरा मेरिट लिस्ट में टॉप पर है यानि दोनों आलोचनाओं से गुजर चुके हैं अब सिर्फ ये बताया जा रहा है कि सही कौन और गलत कौन उपरोक्त रिपोर्ट कार्ड के आधार पर हम तय करें अब ऐसे में किसी को फेल बताना उसकी आलोचना और किसी को पास बताना उसकी तारीफ़ प्रतीत हो सकती है परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं हैं कृपया एक बार इस दृष्टि से साथ भी इस लेख का पुनरावलोकन करें| ब्लॉग पर राय प्रकट करने का हार्दिक धन्यवाद !

Aakash Tiwaari के द्वारा
April 5, 2014

आदरणीय श्री चातक जी, शायद आप मुझे भूल चुके होंगे..मगर मेरे जेहन में आज भी आपकी ज्वलंत रचनाये है …आपके लेख सोचने के साथ ही साथ लिखने पर भी मजबूर करते है…केजरीवाल कि करनी का फल मोदी जी को अवश्य मिलेगा… =आकाश तिवारी=

    chaatak के द्वारा
    April 7, 2014

    स्नेही आकाश जी, आपको भूलने का प्रश्न ही नहीं उठता, आप हमेशा याद रहते हैं| समय की कमी के कारण मंच पर मेरी उपस्थिति नहीं हो पाती परन्तु आप सभी मित्र याद आते हैं| लेख पर आपकी राय जानकर बेहद ख़ुशी हुई, हार्दिक धन्यवाद!

sudhajaiswal के द्वारा
April 3, 2014

आदरणीय कृष्ण जी, सादर अभिवादन, लम्बे अरसे से आपकी पोस्ट का इंतजार था। उम्दा राजनितिक समीक्षा, जितनी तारीफ करूँ कम ही होगी। नरेन्द्र मोदी vs अरविन्द केजरीवाल ठीक वैसे ही हैं जैसे आयुर्वेद (मोदी जी) vs एलोपैथ (केजरीवाल), भ्रष्टाचार नामक बीमारी से ग्रसित हमारे देश पर एलोपैथ ने जितनी तेजी से असर दिखाया उतनी ही तेजी से नदारद भी हो गयाऔर साथ ही कई और बीमारियों को न्योता भी दे गया। हर बीमारी का जड़ से खात्मा आयुर्वेद से ही संभव होगा। साबरमती के संत ने गोंरे अंग्रेजों से देश को मुक्ति दिलाई थी और गुजरात के ही गांधीनगर के संत मोदी जी देश को काले अंग्रेजों से मुक्ति दिलाएंगे।

    chaatak के द्वारा
    April 3, 2014

    स्नेही सुधा जी, ब्लॉग पर आपकी राय जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई| हमे भी पूरा विश्वास है कि काले अंग्रेजों का खात्मा पूरी तरह से हो जायेगा बस एक सही चुनाव की आवश्यकता है देश को सही दिशा और नेतृत्व की आवश्यकता है और वह इस बार मिल सकती है |

    sudhajaiswal के द्वारा
    April 4, 2014

    कृष्ण जी, लेख को मैंने कई बार पढ़ा, जो भी समाचार में सुना और देखा था उन सारे महत्वपूर्ण बिन्दुओं को आप रौशनी में ले आये हैं| आपके विश्वास की जीत हो यही दुआ है|

    chaatak के द्वारा
    April 7, 2014

    सुधा जी, भविष्य ने हमारे लिए क्या छिपा रखा है वह हमें पता नहीं लेकिन भविष्य कैसा होगा इसके लिए हम आज कुछ कर सकते हैं| लोकतंत्र में ये काम हम सही व्यक्ति को वोट दे कर ही कर सकते हैं और इस बार तो हमारे सामने विकल्प है वो भी पूरा रिपोर्ट कार्ड ले कर फिर तो हम अच्छे परिणामों की आशा जरूर कर सकते हैं| चर्चा को आगे बढ़ने के लिए हार्दिक धन्यवाद !

Ramesh Bajpai के द्वारा
April 1, 2014

प्रिय श्री चातक जी बिलकुल सही कहा आपने यह आशा ही समय पर विश्वास में बदल जाती है | लम्बे समय बाद आपकी पोस्ट पर कुछ लिख प् रहा हू | आपका न० नहीं है | शुभकामनाओ सहित ०९३३६००३८८२

    chaatak के द्वारा
    April 1, 2014

    आदरणीय श्री बाजपेयी जी, सादर अभिवादन, काफी दिनों से कुछ लिखने की न तो फुर्सत मिल रही थी न मन हो रहा था इसी वजह से जे०जे० से काफी दूर था| आपकी प्रतिक्रिया पाकर हार्दिक प्रसन्नता हुई| जल्दी आपसे फोन पर बात होगी| धन्यवाद!


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