चातक

आओ खोजें हिंदुस्तान

123 Posts

4032 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1755 postid : 463

उत्तर प्रदेश और बढ़ता अपराधीकरण

Posted On: 30 May, 2013 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend


हमारे प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक, और क़ानून व्यवस्था के सन्दर्भ में कहने के लिए, बताने के लिए और समझने के लिए इतना अधिक है कि संभवतः धरती को कागज़, समुद्रों को स्याही और सभी जंगलों को काटकर लेख्नियाँ बनानी पड़ जाएँ।
प्रथमदृष्टया उपरोक्त विचार अतिश्योक्ति प्रतीत हो सकते हैं किन्तु वास्तविकता के धरातल पर इसका ठोस आधार है। जिस प्रकार नेहरु जी ने कहा था कि ऊंची-ऊंची पर्वत श्रंखलायें, मनोरम घाटियाँ, विस्तृत मैदान, हरे-भरे खेत और विशालकाय रेगिस्तान सभी चित्र भारत के हैं (हालाकि कोई दो चित्र एक से नहीं हैं), ठीक उसी प्रकार आज उत्तर प्रदेश में रहने वाले और प्रदेश से बाहर रहने वाले लोगों के दृष्टिकोण उत्तर प्रदेश के बारे में एक जैसे नही हैं। थोड़ी और गहराई में जाएँ तो प्रदेश के प्रत्येक वर्ग के लिए एक अलग ही उत्तर प्रदेश है। यहाँ की आर्थिक, सामाजिक और कानून व्यवस्था जो एक वर्ग की नजर में है वह दूसरे की नज़र में नहीं है। यह कहने का मेरा अभिप्राय यह है कि मेरा दृष्टिकोण मेरा अपना दृष्टिकोण है और इससे बहुत सारे लोग सहमत हो सकते हैं और ये भी हो सकता है कि कोई एक भी मुझसे सहमत न हो।
सर्वप्रथम प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था पर मैं अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करना चाहूँगा। आर्थिक समानता जैसी कल्पना तो कहीं भी मौजूद नहीं है परन्तु एक निश्चित आर्थिक सुरक्षा किसी भी प्रदेश की प्रथम आवश्यकता मानी जा सकती है। विकास की तीव्र प्रक्रिया में कोई भी व्यक्ति एक मजबूत कड़ी तभी बन सकता है जब उसे आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध हो। कमोवेश ये सुरक्षा प्रदेश के नागरिकों को तनिक भी उपलब्ध नहीं है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि पिछले कुछ दशकों में आर्थिक असुरक्षा की भावना प्रदेश के मध्यम एवं निम्न वर्ग पर इतनी हावी हो गई है कि ‘छीनो-झपटो’ की संस्कृति विकसित होकर विकराल रूप धारण कर रही है। युवाओं एवं किशोरों द्वारा किये जाने वाली असामाजिक एवं गैरकानूनी गतिविधियों में होने वाली तीव्र बढ़ोत्तरी इसी आर्थिक असुरक्षा का परिणाम है। इस आर्थिक असुरक्षा की भावना ने युवाओं और किशोरों के आत्मिक बल को कितना कमजोर कर दिया है इसका प्रमाण हज़ार रुपये का बेरोजगारी भत्ता पाने को सेवायोजन कार्यालयों में लगी लम्बी कतारें दे चुकी हैं। विश्वास नहीं होता कि ये बच्चे उन्ही लोगों की आदि-औलादें है जो भूखों मरने के लिए तैयार थे लेकिन भीख लेने के लिए नहीं। आज़ादी मिलने के बाद जो एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिला वह ये भी है कि जिस युवा, जिस किशोर को काम का हक छीनने के लिए लालायित होना चाहिए था वो अपने आपको लाचार-बेरोजगार बताकर हराम का भत्ता लेने को लाइन लगाये खड़ा है। प्रदेश की आर्थिक स्थिति का इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा कि इसने युवाओं के आत्मबल को ही तोड़करख दिया है। बेरोजगारी भत्ते पर गुजर करने वाले नवयुवक क्या खा कर देश और प्रदेश के विकास में सहायक होंगे। उत्तर-प्रदेश को वास्तवथा में उत्तम-प्रदेश बनाना है तो सरकार योग्यता के आधार पर काम बांटे और उसकी मजदूरी ये वेतन दे जिससे प्रदेशवासी गर्व की भावना से प्रेरित होकर काम करें और सर उठा कर आसमान में अपने लिए नई बुलंदियों के सितारों को खोजें। पथ-भ्रष्ट, शोकाकुल और निराश से लटके चेहरे अपनी चमकती किस्मत के सितारों को भला क्या देखेंगे! यदि मेरी राय ली जाए तो मैं कहूँगा, जिला, ब्लॉक, एवं ग्रामसभा स्तर पर योग्य और कुशल लोगों की तलाश की जाए और उन्हें उनकी योग्यता और कुशलता के अनुरूप कार्य दिया जाय। वित्तीय अनुदान और सहायता सिर्फ असहाय, बुजुर्ग और पूरी तरह से अक्षम व्यक्तियों को ही (ससम्मान) प्रदान किया जाए। यदि इस तरह सरकार सभी को रोजगार प्रदान करने में सफल हो तो प्रदेश अपने आप प्रगित के पथ पर बढ़ने लगेगा। हर चेहरे पर ख़ुशी होगी। तेजी से बढ़ रहा नव-धनाढ्य वर्ग और धन का सार्वजनिक प्रदर्शन भी चिंताजनक है। एक ओर जब आडम्बरपूर्ण शानो-शौकत की बिजलियाँ चमक रही हों तो दूसरी तरफ कई दिनों से ठन्डे पड़े चूल्हे का दिल तो दहकने ही लगेगा। यही आग जन्म देती है अपराधीकरण को और किसी भी तरह अमीर बनने की चाहत को। धनी वर्ग की चमचमाती दुनिया बेरोजगारों और गरीब युवाओं को मुंह चिढाती रहती है और इसी चकाचौंध की तरफ वो पतंगों की तरह बेतहाशा निकल पड़ते हैं जिसकी परिणिति होती है या तो हताश से भरे अकर्मण्य युवाओं के रूप में या फिर अपराधीकरण के रूप में।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

24 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 15, 2013

प्रिय चातक जी लोग सामने कुछ भी हाथ में पा जाते हैं रोटी कम्बल साइकिल लैपटाप तो दाता को विधाता ही समझ बैठते हैं काश गुणवत्ता बढाई जाती शिक्षा सचं के ज्ञान दे सकती तो सब कुछ स्वतः मिल जाता …सार्थक लेख ,,जय श्री राधे भ्रमर ५

    chaatak के द्वारा
    June 18, 2013

    स्नेही भ्रमर जी, सादर अभिवादन, सही कहा है आपने लोगों की मानसिकता इस कदर दूषित हो चुकी है कि उन्हें न गुणवत्ता नज़र आती है और न ही अपने सही मार्ग का पता बस सभी को भीख में मिली वस्तुओं को अधिकार कहने की बेशर्मी आ गई है| हार्दिक धन्यवाद!

prashant choubey के द्वारा
June 7, 2013

मुफ्त लैपटाप बाँटने के बजाय अगर सरका रऐसा रोजगार और शिक्षा लाती जिसेस इंटर पास छात्र स्वंय  का लैपटाप खरीद लेता तो इस यूपी पर मुझे गर्व होता

    chaatak के द्वारा
    June 7, 2013

    स्नेही प्रशांत जी, आपकी राय से मैं भी पूरी तरह इत्तेफाक रखता हूँ| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

rashmisri के द्वारा
June 5, 2013

जब तक राजनेता अपराध को प्रश्रय देते रहेगे ,युवा अपराध की ओर आकर्षित होता रहेगा ,वो देख रहा है नेताजी ने किस प्रकार से गद्दी हासिल करी है वो युवाओं के आदर्श बन रहे है ,!आज हमारे देश ओर प्रदेश को A.P.J.Kalam, किरण बेदी जैसे लोगों के नेतृतव की जरुरत है ! लेख के लिए हार्दिक बधाई!

    chaatak के द्वारा
    June 6, 2013

    रश्मि जी, अपराधों का आकर्षण बड़ा ही जबरदस्त होता है एक बार इसका स्वाद चखा तो फिर जन्दगी भर राष्ट्रवाद, और देशप्रेम जैसी चीजें सपने में भी दस्तक देना बंद कर देती है और शातिर सपाई ये बात अच्छी तरह से जानते है| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

priti के द्वारा
June 4, 2013

उत्तर -प्रदेश के हालातों का आपने एकदम सही चित्रण किया है. मैं आपसे पूर्णतः सहमत हूँ .भटकी हुई युवा पीढ़ी को रह दिखाना तो दूर उन्हें दिग्भ्रमित करने का काम ही कर रही हैं राजनीतिक पार्टियाँ, मुख्यमंत्री की गद्दी सपा और बसपा के बीच फुटबाल बन कर रह गयी है ,जब जिसके पीला में होती है वो अपने-अपने हितों को साधने में लग जाता है .विशुद्ध वोट-बैंक की राजनीति.

    chaatak के द्वारा
    June 4, 2013

    प्रीती जी, सादर अभिवादन, ब्लॉग में प्रस्तुत विचारों से आपकी सहमति जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई| अब कुछ अच्छे लोगों को आगे आना होगा और इस खेल के बारे में युवाओं और किशोरों को जागरूक करके उन्हें अन्दर सो रहे राष्ट्रवाद को फिर से जगाना होगा वर्ना वो दिन दूर नहीं जब हिन्दुस्तान के हालात अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे हो जायेंगे या फिर चीन हम पर शासन कर रहा होगा| हार्दिक धन्यवाद!

yogi sarswat के द्वारा
June 3, 2013

बेरोजगारी भत्ते पर गुजर करने वाले नवयुवक क्या खा कर देश और प्रदेश के विकास में सहायक होंगे। उत्तर-प्रदेश को वास्तवथा में उत्तम-प्रदेश बनाना है तो सरकार योग्यता के आधार पर काम बांटे और उसकी मजदूरी ये वेतन दे जिससे प्रदेशवासी गर्व की भावना से प्रेरित होकर काम करें और सर उठा कर आसमान में अपने लिए नई बुलंदियों के सितारों को खोजें। पथ-भ्रष्ट, शोकाकुल और निराश से लटके चेहरे अपनी चमकती किस्मत के सितारों को भला क्या देखेंगे! यदि मेरी राय ली जाए तो मैं कहूँगा, जिला, ब्लॉक, एवं ग्रामसभा स्तर पर योग्य और कुशल लोगों की तलाश की जाए और उन्हें उनकी योग्यता और कुशलता के अनुरूप कार्य दिया जाय। वित्तीय अनुदान और सहायता सिर्फ असहाय, बुजुर्ग और पूरी तरह से अक्षम व्यक्तियों को ही (ससम्मान) प्रदान किया जाए। यदि इस तरह सरकार सभी को रोजगार प्रदान करने में सफल हो तो प्रदेश अपने आप प्रगित के पथ पर बढ़ने लगेगा। हर चेहरे पर ख़ुशी होगी। तेजी से बढ़ रहा नव-धनाढ्य वर्ग और धन का सार्वजनिक प्रदर्शन भी चिंताजनक है। एक ओर जब आडम्बरपूर्ण शानो-शौकत की बिजलियाँ चमक रही हों तो दूसरी तरफ कई दिनों से ठन्डे पड़े चूल्हे का दिल तो दहकने ही लगेगा, लेकिन श्री चातक जी समाजवादी सरकार तो अपने आपको प्रदेश का सबसे बड़ा सुधारक घोषित करने पर लगी हुई है ! कोई समस्या हो तो बसपा की , झगडा फसाद हो तो भाजपा का , कोई कांड हो तो कांग्रेस का किया धरा होता है फिर इनका क्या है ?

    chaatak के द्वारा
    June 3, 2013

    स्नेह योगी जी, आपने सही कहा सपा के हिस्से में कोई जिम्मेदारी नहीं है इस पार्टी ने सिर्फ प्रदेश का बेडा गर्क करने का बीड़ा उठा रखा है| अभी तो आतंकवादियों और बांग्लादेशी दामादों पर से मुक़दमे उठाने में व्यस्त हैं और कुछ शेष बचा है क्या .. फिर भी मजे की बात देखिये कि इन बाप बेटे पर देशद्रोह का अभियोग तक नहीं लगाया गया है| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

rajanidurgesh के द्वारा
June 2, 2013

chatakji bahut sarthak lekh badhai

    chaatak के द्वारा
    June 2, 2013

    Rajanidurgesh ji, Thanks a lot !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 1, 2013

आदरणीय चातक जी सस्नेह सार्थक लेख हेतु बधाई apke सुझाव बेहतर

    chaatak के द्वारा
    June 1, 2013

    आदरणीय कुशवाहा जी, ब्लॉग पर आपके विचार जानकर ख़ुशी हुई| हार्दिक धन्यवाद!

sachin pandit के द्वारा
June 1, 2013

Krishan Babu,maine jagran junction join kiya hai, so kuch preshaniyo ka aanaa swabhawik hai,isliye apse kuch solution chahta hu.please help me. jagran junction par blog english me hi type ho rha hai,ise Hindi me kis tarah type kiya jaye….????

    chaatak के द्वारा
    June 1, 2013

    सचिन जी, ब्लॉग को हिंदी में लिखने के लिए आप HTML टैग को क्लिक करके फिर लिखना शुरू करें एडिटर के ठीक नीचे टाइप इन हिंदी आप्शन को एक्टिवेट कर दें आपकी समस्या समाप्त हो जायेगी अभी आप शायद visual टैग वाले एडिटर पर लिख रहे हैं|

sachin pandit के द्वारा
June 1, 2013

Krishan Babu,uttam lekh ke liye koti kiti badhai. By:- drswin.jagranjunction.com

    chaatak के द्वारा
    June 1, 2013

    स्नेही सचिन जी, लेख को पसंद करने और प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

omdikshit के द्वारा
June 1, 2013

कृष्ण जी ,नमस्कार. बहुत सही कहा आप ने. मैंने …21 मई 12 को ही ……बेरोज़गारी-भत्ता या भीख …में .इसी बिंदु को उठाया था.उसके बाद …मेरे कहने पर नहीं ….लेकिन सरकार ने रोज़गार देने का कदम उठाया है.आशा है इसे आगे भी अपनाया जायेगा.

    chaatak के द्वारा
    June 1, 2013

    स्नेही दीक्षित जी, सादर अभिवादन, रोजगार हर नागरिक का हक़ है और सरकार को इसी और ध्यान देना चाहिए रेवड़ियां बाँट कर सिर्फ स्वाभिमान का क़त्ल होता है और देश गर्त में जाता है इतनी तमीज नेताओं को भी होनी चाहिए| आपके समान विचारों को जानकर प्रसन्नता हुई| हार्दिक धन्यवाद!

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
May 31, 2013

बढ़िया लेख / देश के विकास के लिए उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाना जरुरी है /

    chaatak के द्वारा
    May 31, 2013

    स्नेही राजेश जी, ब्लॉग से आपकी सहमति जानकर अच्छा लगा, हार्दिक धन्यवाद!

sudhajaiswal के द्वारा
May 30, 2013

आदरणीय कृष्ण जी, सादर अभिवादन, आपकी किसी भी बात से असहमत होने का सवाल ही नहीं उठता | उत्तर प्रदेश को यदि उत्तम प्रदेश बनाना है तो सचमुच आपकी बातों को अमल में लाकर बनाया जा सकता है | प्रदेश की समस्याओं और समाधान की उत्तम शब्द-चित्र आपने उकेरी है | उम्दा आलेख के लिए हार्दिक बधाई |

    chaatak के द्वारा
    May 31, 2013

    स्नेही सुधा जी, सादर अभिवादन, प्रदेश को गर्त में उतरते एक अरसा बीत रहा है और ये आज भी तीखी ढलान पर ही फिसलता जा रहा है| अच्छा हो कि कुछ नेता अपने कर्तव्य का भी निर्वहन करें| ब्लॉग पर आपकी राय जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई| बहुत बहुत धन्यवाद !


topic of the week



latest from jagran