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मैं सुन लूँगा !

Posted On: 3 Apr, 2013 Others में

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बस एक बार दस्तक तो दो- मैं सुन लूँगा,
सुर्ख होठों को एक हरकत तो दो- मैं सुन लूँगा !
जिन्दगी से एक शिकायत सी है- धुल जायेगी,
मन में एक गाँठ सी है- खुल जायेगी।
अपनी पलकों को एक जुम्बिश तो दो- मैं सुन लूँगा,
सुर्ख होठों को एक हरकत तो दो- मैं सुन लूँगा !
थमा थमा सा एक मंजर है- उतर कर देखो,
जमा सा शोख एक पहर है- संवर कर देखो।
ये दो आँखें तुम्हारा आईना बनने तो दो- मैं सुन लूँगा,
सुर्ख होठों को एक हरकत तो दो- मैं सुन लूँगा !
आपके कदमो की आहट है- यकीं है,
कोई शुबहा, ना भरम है- यकीं है।
आती हुई हवाओं को बस छू तो दो- मैं सुन लूँगा,
सुर्ख होठों को एक हरकत तो दो- मैं सुन लूँगा !

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36 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 13, 2013

बहुत सुन्दर बधाई प्रिय चातक जी

    chaatak के द्वारा
    May 18, 2013

    आदरणीय कुशवाहा जी, हार्दिक धन्यवाद!

roshni के द्वारा
May 2, 2013

चातक जी नमस्कार .. हमेशा की तरह दिल को चुने वाली पंक्तियाँ … दो शब्द मेरी और से काश की बिना दस्तक के भी तुम सुन पाते, काश के बिना कहे ही तुम सब समझ जाते , वो लफ्ज नहीं बने जो बयाँ करे आँखों को झांकते जो इन आँखों में सब राज खुल जाते … आभार

    chaatak के द्वारा
    May 3, 2013

    रौशनी जी, सादर नमस्कार, कविता पर आपकी राय जानकर ख़ुशी हुई, चार पंक्तियों में ही बहुत कुछ कह दिया| हार्दिक धन्यवाद!

ompal choudhary के द्वारा
April 12, 2013

आती हुई हवाओं को बस छू तो दो —– मैं फिर भी सुन लूँगा, बात तुम्हारे मन की, करुणा की है —- मैं फिर भी सुन लूँगा ! हवाओं को रुख कुछ भी, तेरी आवाज़– फिर भी सुन ही लूँगा कनारा हो दूर कितना भी, किनारा —-मै फिर भी ढूंढ़ ही लूँगा

    chaatak के द्वारा
    April 12, 2013

    स्नेही ओमपाल जी, इन पंक्तियों ने सचमुच मन मोह लिया हार्दिक धन्यवाद!

ompal choudhary के द्वारा
April 12, 2013

तुम्हारे लिखने का अदाज़ निराला है –मै उसको पढ़ लूँगा आवाज़ तुम्हारे मन की है दबी दबी -फिर भी मै सुन लूँगा

    chaatak के द्वारा
    April 12, 2013

    स्नेही ओमपाल जी, सादर अभिवादन, पंक्तियों की ये लयबद्ध प्रशंसा दिल को छू गई| हार्दिक धन्यवाद!

shukla Bhramar5 के द्वारा
April 12, 2013

अपनी पलकों को एक जुम्बिश तो दो- मैं सुन लूँगा, सुर्ख होठों को एक हरकत तो दो- मैं सुन लूँगा ! क्या बात है चातक भाई ..मन जवान हो जाए बूढों का भी ..किन यादों में खो के लिखे ,,,सुन्दर भ्रमर ५

    chaatak के द्वारा
    April 12, 2013

    स्नेही भ्रमर जी, सादर अभिवादन, रचना को समय देने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद! राज की बात है राज ही रहने दो!

Shweta के द्वारा
April 11, 2013

भाव बड़े गहरे हैं …बेहतरीन नज़म !!!

    chaatak के द्वारा
    April 11, 2013

    श्वेता जी, रचना को अपना बहुमूल्य समय देने और प्रतिक्रिया देने का हार्दिक धन्यवाद!

seemakanwal के द्वारा
April 10, 2013

बहुत खूब . हार्दिक आभार

    chaatak के द्वारा
    April 11, 2013

    आदरणीय सीमा जी, रचना को समय देने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद!

arunsoniuldan के द्वारा
April 9, 2013

   आदरणीय….. आपके कदमो की आहट है- यकीं है, कोई शुबहा, ना भरम है- यकीं है।             प्रशंसनीय रचना……..अव्यक्त भावों की स्पर्शी प्रस्तुति ।

    chaatak के द्वारा
    April 11, 2013

    स्नेही अरुणेश जी, रचना के भावों पर आपकी राय का हार्दिक धन्यवाद !

yamunapathak के द्वारा
April 8, 2013

chaatak jee ek sundar gazal ke liye बधाई.

    chaatak के द्वारा
    April 8, 2013

    Thanks a lot yamuna ji !!!

alkargupta1 के द्वारा
April 5, 2013

चातक जी , बढ़िया रचना सुन्दर भावाभिव्यक्ति

    chaatak के द्वारा
    April 5, 2013

    हार्दिक धन्यवाद, अलका जी!

yogi sarswat के द्वारा
April 5, 2013

अपनी पलकों को एक जुम्बिश तो दो- मैं सुन लूँगा, सुर्ख होठों को एक हरकत तो दो- मैं सुन लूँगा ! थमा थमा सा एक मंजर है- उतर कर देखो, जमा सा शोख एक पहर है- संवर कर देखो। ये दो आँखें तुम्हारा आईना बनने तो दो- मैं सुन लूँगा, सुर्ख होठों को एक हरकत तो दो- मैं सुन लूँगा ! बहुत सुन्दर और बहुत ही गहरे भाव श्री चातक जी ! बहुत बहुत पसंद आई आपकी रचना !

    chaatak के द्वारा
    April 5, 2013

    स्नेही योगी जी, सादर अभिवादन, रचना पर आपकी इतनी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया से बहुत ख़ुशी हुई, हार्दिक धन्यवाद!

    chaatak के द्वारा
    April 5, 2013

    रचना पर दृष्टिपात का हार्दिक धन्यवाद!

jlsingh के द्वारा
April 5, 2013

स्नेही चातक जी, नमस्कार! वियोगी चातक का स्वर निराले अंदाज में! बहुत सुन्दर!

    chaatak के द्वारा
    April 5, 2013

    आदरणीय जे. एल. सिंह जी, सादर नमस्कार, रचना पर आपके स्नेह का हार्दिक धन्यवाद!

    chaatak के द्वारा
    April 4, 2013

    हार्दिक धन्यवाद!

bhagwanbabu के द्वारा
April 4, 2013

बहुत सुन्दर रचना …. बधाई… एक मेरी रचना पर अपना कीमती समय देकर कुछ बताईये… http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2013/04/04/%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B5%E0%A5%8B/

Bhagwan Babu के द्वारा
April 4, 2013
Bhagwan Babu के द्वारा
April 4, 2013

बहुत सुन्दर…. रचना.. बधाई जरा मेरी एक नई रचना पर प्रकाश डाले…  इंतजार… है.. http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2013/04/04/%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B5%E0%A5%8B/

    chaatak के द्वारा
    April 4, 2013

    जी जल्दी आपके ब्लॉग पर हाजिरी लगाऊंगा!

divya (div 81) के द्वारा
April 4, 2013

वाह बहुत खूब ………………. 

    chaatak के द्वारा
    April 4, 2013

    धन्यवाद दिव्या जी!


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