चातक

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आ गया नया कानून !

Posted On: 23 Feb, 2013 Others में

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दिल्ली नहीं दहली, न जींद की टूटी नींद…
सबकुछ बुरा था, सबकुछ बुरा है, ना कुछ बदला था, ना कुछ बदला है। एक खबर उडी है हवाओं में, शायद कुछ सच्चाई हो; तुम भी देखो, पढ़ लो, सोचो, शायद ये खुशखबरी हो। ये सुना है, शायद पढ़ा है- किसी न्यायाधीश ने पहली बार इस देश में क़ानून को न्याय की राह सुझाई है; देश के कर्णधारों को एक सुझाव दिया है, एक मांग उठाई है। हो सके तो आप भी इसे समर्थन दें, अपनी आवाज से इसे थोडा और बल दें।
विचार है-
नारी अब असुरक्षित नहीं होगी। बलात्कारी अब बेख़ौफ़ नहीं रहेंगे। दरिंदगी को संज्ञेय अपराधों की व्याख्या करने वाली कानूनी पंक्तियों से नहीं न्याय की देवी की आँखों की पट्टी खोलकर पहचाना जाएगा। जितने भी दुर्दांत बलात्कारी है यदि वे जीवित है तो उन सभी पर आज की तारीख से ये कानून लागू होगा। दुर्लभतम में दुर्लभतम प्रकृति के मामलों में न्याय भी दुर्लभतम प्रकृति का होगा। चूंकि ये अपराध सभी अपराधिक गतिविधियों से कहीं ज्यादा जघन्य हैं इसलिए न्याय भी काल. परिस्थिति और पीड़ा के अनुसार राहत और दंड देने पर जोर देती है, इस तरह ये इकलौता कानून ही बलात्कारियों के लिए मृत्युदंड से भी भयानक दंड देने के लिए पर्याप्त होगा। पीडिता यदि स्वयं तनिक भी जिम्मेदार ना पाई जाय तो न्याय पीडिता के द्वारा सुझाए गए दंड के माद्यम से उसे राहत प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध होगा।
जघन्यतम और दुर्लभतम मामलों में अपराधी को अवयस्क साबित करके, उसे नाबालिग करार देकर बचाने की कानूनी दावं-पेंच की कोशिशों पर भी ये कानून पूर्ण-विराम लगाता है। बलात्कारी किसी भी दशा में सजा से बचने का अधिकारी नहीं हो सकता क्योंकि ये एक मात्र ऐसा अपराध है जो अपराधी तभी कर सकता है जब वह वयस्क हो अर्थात इन मामलों में उम्र का पक्ष सर्वथा अविचारणीय है। साथ ही साथ
दुर्लभतम से दुर्लभतम मामलों की सुनवाई में अभियोग तय होने से सजा तामील होने तक का कुल वक्त छह माह से अधिक नहीं होगा।
आशा है कि यह कानून सर्वसम्मति से स्वीकार किया जाएगा। इस अद्यतन न्याय-प्राविधान को देश की पूरी जनसख्या अपनी सहमति से स्वीकार करेगी और इसी के साथ ये हिन्दुस्तान का पहला और शायद दुनिया का भी पहला कानून होगा जो नागरिको के लिए, नागरिकों पर, नागरिकों के द्वारा भूत से लेकर भविष्य तक के सभी मामलों में लागू किया जाएगा।
देश का पहला अपना, वास्तविक और न्यायोचित कानून सभी हिन्दुस्तानियों को मुबारक हो!

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

alkargupta1 के द्वारा
February 27, 2013

चातक जी , अगर यह न्यायोचित कानून लागू हो जाये तो देश में होने वाले जघन्यतम घटनाएँ कदापि नहीं होंगीं ऐसे में दोषी पाए गए पीड़ित हो अथवा पीड़िता दोनों ही निश्चित समयावधि के अंतर्गत सज़ा के भागीदार होंगे …… देश हित में एक अच्छा निर्णय है …. साभार

    chaatak के द्वारा
    March 10, 2013

    आदरणीय अलका जी, क़ानून पर सहमति के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद!

yogi sarswat के द्वारा
February 26, 2013

जघन्यतम और दुर्लभतम मामलों में अपराधी को अवयस्क साबित करके, उसे नाबालिग करार देकर बचाने की कानूनी दावं-पेंच की कोशिशों पर भी ये कानून पूर्ण-विराम लगाता है। बलात्कारी किसी भी दशा में सजा से बचने का अधिकारी नहीं हो सकता क्योंकि ये एक मात्र ऐसा अपराध है जो अपराधी तभी कर सकता है जब वह वयस्क हो अर्थात इन मामलों में उम्र का पक्ष सर्वथा अविचारणीय है। साथ ही साथ दुर्लभतम से दुर्लभतम मामलों की सुनवाई में अभियोग तय होने से सजा तामील होने तक का कुल वक्त छह माह से अधिक नहीं होगा।यही होगा और नहीं होगा तो अब ना राज रहेगा न राजनीति|, होना भी चाहिए ! तभी बात बनेगी

    chaatak के द्वारा
    February 26, 2013

    स्नेही योगी जी, कानून पर आपकी राय जानकर प्रसन्नता हुई, यहाँ जोड़ना चाहूँगा कि अच्छा हो हम एक जुट होकर इस बार के चुनावों को नारी सम्मान चुनाव बना दें| नारी को न्याय नहीं तो पार्टी और नेता को वोट नहीं| हार्दिक धन्यवाद!

    chaatak के द्वारा
    February 26, 2013

    शालिनी जी, सामान राय से ख़ुशी हुई, महिलाओं की सहमति दोषियों के विरुद्ध आने वाले कानून में सबसे ज्यादा अहम् है| हार्दिक धन्यवाद!

utkarshsingh के द्वारा
February 26, 2013

अगर यह कानून पास हो पाया तो निश्चित रूप से एक अच्छी बात होगी भारत के नैतिक शुद्धीकरण का एक चरण संभवतः पूरा होगा – जो स्वतन्त्र नहीं होंगे उन्हें स्वतन्त्र होने के लिए बाध्य किया जाएगा – पर अभी एक महत्वपूर्ण चरण बाकी है – लोगों की सोच में परिवर्तन का | अधोलिखित लिंक पर आपकी मूल्यवान टिप्पडी की अपेक्षा है , कृपा करे- http://utkarshsingh.jagranjunction.com/2013/02/23/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%94/

    chaatak के द्वारा
    February 26, 2013

    कानून पर आपकी सहमति जानकर अच्छा लगा शीघ्र आपके ब्लॉग पर राय देने की कोशिश करूंगा| हार्दिक धन्यवाद!

nishamittal के द्वारा
February 25, 2013

काश ऐसा हो तथा एक सुझाव और ऐसे लोगों को जो ऐसे मान्लों में राजनीति करते हैं कड़ी सजा का प्रावधान हो

    chaatak के द्वारा
    February 25, 2013

    यही होगा और नहीं होगा तो अब ना राज रहेगा न राजनीति| सुझाव से सहमति का हार्दिक धन्यवाद!

shashi bhushan के द्वारा
February 24, 2013

आदरणीय चातक जी, सादर ! मैं भी इस न्यायोचित क़ानून का समर्थन करता हूँ ! साथ ही यह भी चाहता हूँ की आरोप गलत सिद्ध होने पर झूठे आरोपी के प्रति भी कोई सहानूभूति न दिखाई जाय ! और ऐसे बलात्कारियों का सचित्र विवरण सार्वजनिक किया जाय, ताकि ऐसा सोचनेवालों को सबक मिले !

    chaatak के द्वारा
    February 25, 2013

    आदरणीय शशिभूषन जी, सादर अभिवादन, सत और सत्य की रक्षा का वचन यदि ये सरकार ये न्याय व्यवस्था नहीं देती तो अब इसके विनाश का वक्त भी है| आपकी राय से पूरी तरह सहमत हूँ| हार्दिक धन्यवाद!

Dhavlima Bhishmbala के द्वारा
February 24, 2013

आदरणीय चातक जी, समझ में नहीं आता कि ऐसे मामलों में इतना सोचना क्यों पड़ रहा है कानून बनाने वालों को और कानून लागू करने वालों को | बहुत ही शर्म की बात है हमारे देश केलिए की जब एक कानून बनता है तो उस कानून को अंजाम तक पहुँचाने केलिए राजनीति दल हज़ार चालें चलनी शुरू कर देती है सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने स्वार्थ केलिए | काश की आपकी बातें सच हो |

    chaatak के द्वारा
    February 25, 2013

    आदरणीय धवालिमा जी, सादर अभिवादन, ये बात भी सच होगी और फैसला भी आएगा और नहीं आया तो इन्कलाब आएगा जिसमे राजनीति के नाम पर चल रही सारी दुकाने अग्नि देव के हवाले और चलाने वाले नेजों के नोक पर होंगे| रुदन के बाद तांडव ही आखिरी विकल्प बचता है| आपकी राय जानकर प्रसन्नता हुई, हार्दिक धन्यवाद !

jlsingh के द्वारा
February 24, 2013

यह सुझाव क्या चातक महोदय ने सुझाई है? है तो बहुत ही अच्छा, अगर लागू हो! दामिनी के केस का क्या हुआ? अब तो उसके माता पिता को फ्लैट मिलाने की खबर आई है! स्नेही चातक जी, मैं तो इस सुझाव का समर्थन करता हूँ. मन में कही ‘संदेह’ की किरण भी नजर आती है! कानून तो संसद बनाती है! नयायाधीश उसी को अमली जामा पहनाते हैं ….

    chaatak के द्वारा
    February 24, 2013

    स्नेही जे.एल.सिंह जी, सही कहा आपने क़ानून संसद बनाती है लेकिन ये सुझाव कानून बनाने के लिए नहीं बल्कि पुराने कानून को ही नए नज़रिए से देखने के लिए जनता की पंचायत में रखा जा रहा है चाहे तो देश की संसद इस पॅकेज को नया क़ानून मानकर फिर से पारित करने का क्रेडिट ले सकती है| स्त्री को पूर्ण सुरक्षा देने वाले इस कानून को समर्थन देने का हार्दिक धन्यवाद!


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