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समाजवाद की कमजोर याददाश्त

Posted On: 6 Feb, 2013 Others में

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सही कहूं तो मुझे हमेशा से ही हिन्दुस्तान के दो बहुचर्चित युवराजों की काबिलियत पर शक था और अब मेरा शक सही भी साबित हो चुका है | पहले युवराज हैं कांग्रेसी खानदान के राहुल गांधी जिनपर फिलहाल मैं कुछ लिखने के मूड में नहीं हूँ और दूसरे हैं सामाजवादी खानदान के अखिलेश यादव एक पैदाइशी नेता, मैं आज इन्ही के बारे में थोड़ी राग-दरबारी गाना चाहता हूँ | अखिलेश जी जब मुख्यमंत्री जी बने तो सभी खबरिया चैनलों ने मध्ययुगीन भाट कवियों की तरह वीर-रस रूपी चाटुकारी गायन शुरू कर दिया | अखिलेश जी के स्कूल से लेकर कालेज तक की सारी रिपोर्टिंग ऐसे हुई जैसे इनसे ज्यादा मेधावी और होनहार बालक कभी पैदा ही नहीं हुआ | जिन अध्यापकों और प्रोफेसरों का साक्षात्कार किया गया किसी की हिम्मत नहीं हुई कि ये बताता कि महोदय ‘दिन भर पढ़ा, सवेरे सफा’ वाले अग्रिम-पंक्ति छात्र थे | खैर ‘प्रतिभा’ छुपाये भी छुपती कहाँ है? गद्दी-नशीन होते ही महोदय (माननीय) ने पहली बार मुंह खोला और ‘विधायको को विधायक-निधि से कार खरीदने की सुविधा’ प्रदान कर दी | जनता समझ गई नौसिखिया है क्योंकि विधायक निधि से तो सिर्फ लक्जरी गाड़ियाँ ही खरीदी जाती हैं या काम के नाम पर कमीशन खाया जाता है वो भी बिना बताये| फिर इसे बता कर आरोप लेने की जरूरत क्या है| विपक्ष ने लपक लिया और खटिया खड़ी हो गई, चौबीस घंटे में पहला फैसला उलटे मुंह वापस हो गया|
कुछ ही दिनों में पूरा प्रदेश अपराधों की चपेट में आ गया हलाकि इसकी बानगी तो पहले दिन ही सपाइयों द्वारा पुलिस की पिटाई से हो चुकी थी| रिकार्ड तो तब कायम हो गया जब एक जज पर बलात्कार पीडिता से अश्लील हरकत करने का मामला उछला और चपेट में आ गया गोंडा का पूरा पुलिस और न्याय महकमा|
अपनी स्मरण शक्ति का लोहा तो युवा मुख्यमत्री ने तब मनवा लिया जब उन्होंने हाल में ही (बमुश्किल २० दिन पहले) हुए स्टिंग आपरेशन को ‘माया-राज’ में हुआ काण्ड कहते हुए, पशु तस्करी के मुख्य आरोपी को मंत्री का कैडर प्रदान किया और उसे क्लीन-चिट पकड़ा दी| जनता अभी इसे चाटुकारों की हरकत मानकर मुख्यमंत्री को मासूम मानने की गलतफहमी पालने की कोशिश कर ही रही थी तब तक स्वयं मुख्यमंत्री ने कमान सँभालते हुए उन एस.पी. महोदय का ही तबादला कर दिया जिन्होंने पशु-तस्कर को बेनकाब कर क़ानून के कमजोर पंजों में जकड़ने की कवायद की थी| कोई आश्चर्य नहीं कि कल की खबर में तबादले का कारण जज साहब के विरुद्ध हुई कथित साजिश के कारण उनके तबादले को जांच कमेटी की सिफारिश बताया जाएगा ना कि वह समाजवादी सुरक्षाकवच जिससे आज उत्तर-प्रदेश का हर सपाई नेता और कार्यकर्ता संरक्षित है|
जिस तरह राजनीतिक परिवार-वाद ने अब नस्ल-दर-नस्ल विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधान-मंत्री पैदा करने शुरू कर दिए हैं वह देश और लोकतंत्र की आत्मा को लहूलुहान करके अस्थिरता और अराजकता की ओर जाते देश की तस्वीर सामने ला रहा है|
जिस तरह से अखिलेश जी को हर मामले पर ‘मायावती राज में हुआ था’ कहने की आदत पड़ चुकी है वह प्रदेश के लिए चिंताजनक है| ये मानसिकता है पाकिस्तानी हुक्मरानों की जो अपने देश में हुए किसी भी गलत कार्य को ‘हिदुस्तान की साजिश’ कहकर पकिस्तान की जनता को गुमराह करते है और अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड लेते हैं| इनके बयान देखकर तो कांग्रेस को दिग्विजय सिंह की याद आ जाती है जिन्हें किसी भी घटना और दुर्घटना के पीछे आर.एस.एस. और भगवा आतंकवाद दिखाई देता है| इस तरह की मानसिकता को युवा राजनीति नहीं कह सकते हैं बल्कि इसे फोबिया कहा जाएगा ‘माया फोबिया’| अच्छा होता कि अखिलेश जी उत्तर प्रदेश को उस राजनीतिक ताजगी का अहसास कराते जो आज देश की जरूरत है लेकिन उन्होंने अपराधियों को समर्थन और संरक्षण प्रदान करके सिद्ध कर दिया है कि वो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कठपुतली परंपरा के युवा अधिकारी के सिवाय और कुछ नहीं|


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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aman kumar के द्वारा
February 12, 2013

बहुत सही कहा आपने | समाजबाद का नारा तो गद्धी पाने को दिया गया था ! अब जनता ही जाती -धर्म के नाम पर मरने को बेठी है तो नेताओ की क्या गलती ?

    chaatak के द्वारा
    February 12, 2013

    स्नेही अमन जी, सादर अभिवादन, आपकी बात से १००% सहमत हूँ| इनकी हकीकत खासकर युवाओं को समझनी चाहिए!

akraktale के द्वारा
February 12, 2013

आदरणीय चातक जी सादर, परिवारवाद से लोकतंत्र को हो रहे नुक्सान को शायद अब जनता समझ सके. सुन्दर प्रस्तुति. 

    chaatak के द्वारा
    February 12, 2013

    स्नेही रक्तले जी, सादर अभिवादन, जब तक जनता नहीं जागेगी ये वंशवाद इसी तरह चलता रहेगा काश कि अब लोगों की आँख खुल जाए! हार्दिक धन्यवाद!

Sushma Gupta के द्वारा
February 11, 2013

चातक जी ,सही कहा आपने यह वंशवादी युवराजों की परम्परा आज हमारे देश की लोक -तंत्र की जड़ों को समूल नष्ट करने में अत्यंत ही कारगर सावित हो रही है , मैं तो कहूँगी कि इस वंशवाद को समाप्त करने हेतु भी तत्काल ही नए एवं प्रभावयुक्त क़ानून की अति आवश्यकता है,एक विचारपूर्ण आलेख हेतु आपको आभार सहित वधाई…

    chaatak के द्वारा
    February 11, 2013

    सुषमा जी, वंशवाद की समस्या का समूल नष्ट होना बेहद जरूरी है इस बात पर आपकी वैचारिक सहमति पाकर बेहद प्रसन्नता हुई काश कि हम इसी तरह इनके विरुद्ध एक जनमत भी तैयार कर सकें !

yogi sarswat के द्वारा
February 11, 2013

अपने गुनाहों को छुपाने का बहुत बढ़िया तकिया कलाम है “ये पुरानी सरकार का है ” लेकिन कितने दिन बचे हैं एक और अग्नि परीक्षा में ? मुलायम को चिंता है कहीं सीट कम न हो जाएँ इसलिए अधिकारियों को इधर उधर भगाए हुए हैं लेकिन कितना सफल होगा ये प्रयास ये देखना बाकी है क्योंकि आदमी को पता है की समाजवादी पार्टी क्या दे सकती है देश और प्रदेश को ?

    chaatak के द्वारा
    February 11, 2013

    स्नेही योगी जी, सादर अभिवादन, मुलायम और अखिलेश जिस तरह सत्ता का फायदा उठा रहे है वह चारित्रिक पतन की हद है आशा है जल्द इनसे निजात मिलेगी!

shashibhushan1959 के द्वारा
February 10, 2013

आदरणीय चातक जी, सादर ! लोटे और गिलास में नहीं बल्कि कुएं में ही भंग पड़ी है ! लेकिन ये जनप्रतिनिधि हैं, जो भी करें धन्य-धन्य हैं ! सादर !

    chaatak के द्वारा
    February 10, 2013

    आदरणीय शशिभूषन जी, सादर अभिवादन, आपकी बात से इनकार नहीं किया जा सकता है जनप्रतिनिधि ही नहीं हमारे वोटर भी धन्य हैं|

Mohinder Kumar के द्वारा
February 8, 2013

चातक जी आजकल के नेताओं के पास सिर्फ़ एक सूत्री कार्यक्रम है और वह है “तुझे पराई क्या पडी अपनी निवेड तू” अपने आप को सर्व शक्तिमान और बलवान बना, धनवान बना… जनता जाये भाड में… तो ऐसे में और क्या आशा की जा सकती है. जनसेवा तो आदमी के खून में हो तभी मूर्त रूप ले सकती है. लिखते रहिये.

    chaatak के द्वारा
    February 8, 2013

    मोहिंदर जी, आपकी इस बात से मैं भी पूरी तरह सहमत हूँ| वैचारिक समर्थन का हार्दिक धन्यवाद!

deepakk के द्वारा
February 7, 2013

आदरणीय चातक जी सार्थक अभिव्यक्ति के लिए बधाई, राजनीति में वंशवाद हमेशा से चलता आ रहा है…राजनीति हो या कोई और क्षेत्र जब तक मूल में सेवा का भाव नहीं होगा यह सब चलता रहेगा….कुछ अपवादों को छोड़कर हम देखे उच्च वर्गीय परिवारों में वंशवाद एक आम बात है…डॉक्टर के बच्चे डॉक्टर.उद्योगपति के बच्चे उद्योगपति,खिलाडी के बच्चे खिलाडी और राजनेता के बच्चे भी राजनेता….शायद इसलिए क्यों की भविष्य की नीव पहले से तैयार मिलती है….किसी भी क्षेत्र में भविष्य तय करने के पहले अगर युवा इस बात का मूल्यांकन करे की क्या उस क्षेत्र में वो सच में मानवसेवा कर पायेगा तो शायद वंशवाद ख़त्म हो. वंशवाद एक गंभीर और व्यापक समस्या है.इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति विशेष तो प्रभावित होता ही है राष्ट्र की प्रगति और भविष्य पर भी असर पड़ता है.

    chaatak के द्वारा
    February 8, 2013

    हमारे राष्ट्र की पहिये मंथर गति के साथ आगे बढ़ रहे है इसमें कोई दो राय नहीं, लेकिन इसके आगे बढ़ने में कम-से-कम इन खानदानी नेताओं का तो कोई योगदान नहीं है इतन हमें पता है!

nishamittal के द्वारा
February 7, 2013

वंशवाद और व्यक्ति पूजा राजनीति के ऐसे कुचक्र हैं जो देश प्रदेश को बर्बाद करते रहे हैं.

    chaatak के द्वारा
    February 7, 2013

    निशा जी, राजनीति में वंशवाद वह जहरीली अमरबेल है जो राष्ट्र रूपी मजबूत से मजबूत दरख़्त को सुखाने की ताकत रखती है |

jlsingh के द्वारा
February 7, 2013

आदरणीय चातक जी, सादर अभिवादन! हम आप तो कलम ही चला सकते हैं. एक दो राजकुमार/युवराज ज्यादा चर्चित हैं पर इस देश में युवराजों की फ़ौज तैयार होनेवाली है. झारखण्ड के दिशोम गुरु शिबू सोरेन जिनपर कई हत्यायों के आरोप तो हैं ही अब उन्हें धमकी मिलने लगी है! उनका युवराज हेमन सोरेन झारखण्ड की गद्दी से उतर जो गया है! लालू और रामविलास भी अपने युवराजों को दूध पिला पिलाकर तैयार कर रहे हैं. चौटाला जी भी युवराज ही थे अब उनके सुपुत्र भी घोटाले में फंस गए हैं. उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे, सिंधिया परिवार, पायलट आदि लम्बी सूची है. क्या करें, हमलोगों के पिताजी……

    chaatak के द्वारा
    February 7, 2013

    आदरणीय जे.एल. सिंह जी, सादर अभिवादन, आपकी राय से पूर्ण सहमति है सिर्फ इतना जोडूंगा की ये वंशवाद राष्ट्र के लिए लाइलाज जहर बन चुका है इनके पूर्वज विष-वमन कर चले गए और इन्हें दंश मारने के लिए पीछे छोड़ गए|


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