चातक

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आसमान तो फटा लेकिन दिल नहीं पिघला

Posted On: 28 Jan, 2013 Others में

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हतप्रभ हूँ, परेशान हूँ, रुदन करना चाहता हूँ, शर्मिन्दा हूँ सिर्फ इसलिए कि मेरा जन्म हिन्दुस्तान में हुआ। दुनिया का ये पहला और एकलौता देश है जहाँ न्यायाधीशों ने भरी अदालत में बैठकर न्याय का सामूहिक बलात्कार कर डाला। कोई इस देश का नाम गिनीज वर्ल्ड बुक में दर्ज कराओ रे! यहाँ जघन्य बलात्कारियों को दो कौड़ी के सर्टीफिकेट पर लिखी तारीख के आधार पर मासूम करार दे दिया गया। अरे, अकल के अंधे एक बार तो सोचा होता कि मासूम किसे कहा जाता है! मासूम कहा जाता है उस लड़की को जिसे नहीं मालूम था कि बलात्कारियों के देश में देर रात को फिल्म देखने नहीं जाया करते, जिसे नहीं पता था कि सारे पुरुष दोस्त मर्द नहीं होते, जिसे नहीं पता था कि दिल्ली जैसी बलात्कारी बस्ती में सिर्फ अस्मत नहीं लूटी जाती बल्कि यहाँ घूमने वाले नाबालिग शरीर में लोहे की सलाख डालकर आंतें बाहर खींच लेते हैं, जिसे नहीं पता था कि यहाँ ऐसे दुर्दांत बलात्कारी अधिवक्ता हैं जो सभी बालिग़ और नाबालिग बलात्कारियों को सड़े-गले कानूनों की तिकड़म से नाबालिग साबित करते रहेंगे जब तक स्वयं उनकी बेटियों और बहनों से बलात्कार ना हो और उनकी आंतें निकाल कर न फेंक दी जाएँ।
मासूमियत की अगर वह परिभाषा है जो बलात्कारी अदालत ने दी है तो आज का दिन उस दिन से ज्यादा काला है जिस दिन मासूम लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ था। आज हिन्दुस्तान की न्याय व्यवस्था का सबसे गन्दा और काला दिन है। इन अनपढ़ और बदक्ल न्यायाधीशों को तनिक भी तमीज नहीं है न्याय करने की, और ये दुहाई देते हैं क़ानून की कमी की। अगर यही फैसला करना न्याय करना है तो मैं चुनौती देता हूँ इस न्याय-व्यवस्था को और न्यायाधीशों पर किये जाने वाले नाजायज खर्च को! इनसे बेहतर न्याय एक मशीन कर सकती है अगर उसमे जुर्म और उससे सम्बंधित सजाओं का ब्यौरा भर दिया जाय। यदि न्याय सिर्फ और सिर्फ कानून की किताबों में लिखी धाराओं पर संभव होता तो न्यायालय में किसी जज की जरूरत नहीं थी; एक मशीन इन बेवक़ूफ़ जजों से जल्दी और बेहतर न्याय / फैसले दे सकती थी, फिर इन न्यायाधीशों की नियुक्ति क्यों? इसलिए क्योंकि मशीन मानवीय अहसासों को नहीं समझ सकती, एक जैसे ही दो अपराधो के बीच विभेद नहीं कर सकती, जबकि एक से दिखने वाले दो अपराधों में जमीन आसमान का अंतर होता है। लेकिन आज का फैसला इन न्यायाधीशों की अक्षमता पर मुहर लगा चुका है। एक आसान से केस का फैसला भी सही न दे सकने वाले जज पर आज पूरा हिन्दुस्तान शर्मसार है। नक़ल करके डिग्री और रिश्वत दे कर जज बनने वाले ये लोग न्याय क्या ख़ाक देंगे! ये न्यायाधीश तो नेताओं के भी बाप निकले!
अरे तुम्हें क़ानून की व्याख्या करनी नहीं आती है तो हट जाते उस केस से कमसे कम अन्याय तो न करते! एक डाक्टर जब किसी रोग का इलाज नहीं कर पाता है तो वह विशेषज्ञों की सलाह लेता है और तब भी नहीं कर पाता है तो उसे किसी बेहतर डाक्टर को रेफर करता है लेकिन इस नीम हकीम ने खुद तो क़ानून की पढाई की नहीं और किसी से पूछा भी नहीं। मैं नहीं मान सकता कि हिन्दुस्तान के सभी न्यायाधीश इतने अक्षम है कि वे ‘बाल-अपराध’ और ‘नाबालिग’ शब्द की कानूनी व्याख्या तक नहीं कर सकते। और यदि इनकी क्षमता इतनी खराब है तो मैं चुनौती देता हूँ उन सभी न्यायधीशों को (जो मान बैठे हैं कि इस केस में नाबालिग की वही व्याख्या होगी जो आज उस गंवार जज ने की है) कि हमारे कानून के अनुसार व्याख्या नहीं की गई है और गलत तरीके से अपराधी को संरक्षण दिया जा रहा है। आज हर हिन्दुस्तानी का विश्वास न्याय से उठ चुका है देखो न्याधीशों आज हुए इस अन्याय से आसमान फट चुका है, जमीन रो रही है, हमारी आत्माएं तुम्हें श्राप दे रही है, हर माँ, हर बहन, हर बेटी तुम्हें और तुम्हारे उस परिवार को बददुवायें दे रही हैं जिसे तुम एक मासूम के खून से सनी अन्याय की रोटियाँ खिल रहे हो! काश कि तुमने ढंग से कानून की पढाई की होती, तो तुम आज न्याय कर पाते, काश उन अधिवक्ताओं ने जो बलात्कारियों का केस लड़ रहे है एक बार ये अपराध अपने घर की किसी स्त्री के साथ होते महसूस किया होता, काश हमारे देश की अदालतों में कुछ ईमानदार और चरित्रवान न्यायाधीश भी होते!

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36 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bhagwan Babu के द्वारा
February 6, 2013

चातक जी ये हिन्दुस्तान कभी नही बदल सकता… चाहे कुछ भी कर ले कोई… कानून भी बदल ले…. किसी को सजा भी दे दे … पर ये हिन्दुस्तान कभी नही बदल सकता… अब आप ही सोचिये.. इतना दंगा होने के बाद भी… आज भी हर दूसरे दिन दिल्ली मे ही बलात्कार और बलात्कार करने की कोशिश करने के न्युज आते रहते है.. अगर किसी को सजा हो गई होती तो क्या ये और वारदातें न होती….. मुझे नही लगता कि न होती…. तब भी होती…. और आगे भी होती रहेगी….. क्योंकि इसके लिए कानून कुछ भी नही कर सकता…… कानून सिर्फ आम जनता को परेशान करने के लिए होते है….  बस…. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…. http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2013/02/05/%E0%A4%97%E0%A4%BC%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B9/

    chaatak के द्वारा
    February 6, 2013

    स्नेही भगवान बाबू, दिल्ली और भारत सरकार, न्यायालय और प्रशासन के बारे में आपकी राय जानकर ख़ुशी हुई| इन्हें आईना दिखाने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

rekhafbd के द्वारा
February 4, 2013

चातक जी आज हर हिन्दुस्तानी का विश्वास न्याय से उठ चुका है देखो न्याधीशों आज हुए इस अन्याय से आसमान फट चुका है, जमीन रो रही है बिलकुल सही लिखा है अपने ,सार्थक लेख ,बधाई

    chaatak के द्वारा
    February 6, 2013

    रेखा जी, आपके वैचारिक समर्थन से खुशी हुई और बधाई आपको तब दूंगा जब छहों बलात्कारियों के शव कीड़े खा रहे होंगे!

Baijnath Pandey के द्वारा
February 4, 2013

आदरणीय चातक जी सप्रेम अभिवादन हम भारतवासी खुलेआम गुलामी की जिंदगी जी रहे हैं . यह गुलामी अंग्रेजों की गुलामी से ज्यादा भयावह है क्योंकि यहाँ तो हमारे पास मीडिया का भी पूरा साथ नहीं है . सब कुछ बिका पडा है . कोई भी सरकार समर्थित व्यक्ति , अल्पसंख्यक अथवा प्रभावशाली उच्च वर्ग का आदमी जब चाहे हमारे साथ कुछ भी कर लेता है और हम कुछ बोल भी नहीं पाते . पाश्चात्य लोग हमारी माँ बहनों के साथ रेप कर के हमारी बेचैनी पर मुस्कुराते हैं . राष्ट्रभक्तों की समाधियाँ उखाड़ कर वहां क्रूर अंग्रेज शाशकों की मूर्तियाँ लगाईं जाती हैं . हमारी सन्यासिनों को जबरन पकड़कर जेल में रखकर विभिन्न प्रकार से प्रताड़ित किया जाता है . साथ हीं हमें दुनिया के सामने बदनाम भी किया जाता है . इतने सब के वावजूद हमारे अपने देशवासी कभी भय से तो कभी लालच में इन्ही लोगों का गुणगान किया करते हैं . पता नहीं क्यूँ हमारा खून पानी हो गया है . भारतीय होने पर आज शर्म से मर जाने का मन करता है .

    chaatak के द्वारा
    February 6, 2013

    स्नेही बैजनाथ जी, सादर अभिवादन, हमारी सहन शक्ति दिखा रही है कि हमारे खून में पिता का तत्व ख़त्म और माता का अंश सुस्त हो चुका है इतनी कायर तो हमारी नारियां भी नहीं थीं!

MANISHARAGHAV के द्वारा
February 1, 2013

चेतन भाई , आप शायद अब भी परिस्थितियों से अन्जान हैं मेरे भाई यह तो होना ही था । आपका गुस्सा अपनी जगह जायज हैं पर एक बात बताइए जब ऊँचे ओहदे पर आरक्षण से आये हुए कम नम्बर आने वाले अफसर बैठेगे तो यह तो होगा ही अभी तो देखते जाओ तेल देखो तेल की धार देखो जब प्रमोशन में भी आरक्षण होने लगेगा उस वक्त के न्याय प्रक्रिया या अन्य विभागों में काम कैसा होगा यह अकल्पनीय है ।

    chaatak के द्वारा
    February 1, 2013

    मनीषा जी, सादर अभिवादन, आपकी टिप्पड़ी में जो बात कही गई है वो बिलकुल सही है मैं भी सोच रहा था कि आखिर कोई इस बात को क्यों नहीं कह रहा है कि अपराध प्रशासन से दस कदम आगे इसलिए है क्योंकि अपराध में आरक्षण नहीं है अपराधी अपनी काबिलियत पर शातिर अपराधी होने की पदवी पाता है जबकि प्रशासन में उच्च पद पर आने के लिए आरक्षण चलता है !

Malik Parveen के द्वारा
February 1, 2013

चातक जी नमस्कार, बिलकुल सही कहा … मैं आपकी बात से सहमत हूँ … जब इतनी धांधलिया होती हैं तो सर्टिफिकेट भी झूठा हो सकता है और अगर सच में वो नाबालिग भी हो तो भी उसको कड़ी सजा मिलनी चाहिए क्यूंकि उसके द्वारा किया दुष्कर्म असहनीय है और उससे वो किसी भी तरह मासूम नहीं हो सकता …. अगर वो नाबालिग होकर ये सब कर सकता है तो फिर बालिग होकर उससे क्या उम्मीद की जा सकती …

    chaatak के द्वारा
    February 1, 2013

    मालिक परवीन जी, सादर अभिवादन, आपकी राय जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई| बात अब सिर्फ एक अदालती कर्यवाही और सड़े गले पन्नों पर लिखे चुटकुलों पर फैसला सुनाने की नहीं है अब बात है सिर्फ न्याय की जिसकी जगह सिर्फ अन्याय किया जा रहा है| विश्वास कीजिये इन न्यायाधीशों की सीट दोजख में बुक है ‘महान्यायी’ फौलाद को जंग चढ़ा रहा है इनकी आत्माओं में उतारने के लिए!

arunsoniuldan के द्वारा
February 1, 2013

सार्थक लेखन चातक जी…..भ।वनाओं के साथ तर्क का भी प्रबल समावेश………वास्तव में न्यायाधीश का यही वास्तविक कर्तव्य होता है कि वह प्रत्येक मामले में विष्टिता और संवेदनशीलता का परिचय दे…….न कि खींची गयी लकीर पीटता रहे…..अभी न्याय नहीं हुआ……यह अन्याय है… ..उस लडकी के साथ भी और उन करोडों लोगों के     साथ भी जो भारतीय न्याय व्यवस्था में विस्वास रखते हैं……..

    chaatak के द्वारा
    February 1, 2013

    स्नेही अरुण जी, आपकी बात सही है न्याय नहीं हुआ है ये अन्याय है और हम इस अन्याय को सहने के लिए बाध्य हैं/किये जा रहे हैं| भारतीय न्याय व्यवस्था से विश्वास उठ चुका है!

yogi sarswat के द्वारा
January 30, 2013

मैं नहीं मान सकता कि हिन्दुस्तान के सभी न्यायाधीश इतने अक्षम है कि वे ‘बाल-अपराध’ और ‘नाबालिग’ शब्द की कानूनी व्याख्या तक नहीं कर सकते। और यदि इनकी क्षमता इतनी खराब है तो मैं चुनौती देता हूँ उन सभी न्यायधीशों को (जो मान बैठे हैं कि इस केस में नाबालिग की वही व्याख्या होगी जो आज उस गंवार जज ने की है) कि हमारे कानून के अनुसार व्याख्या नहीं की गई है और गलत तरीके से अपराधी को संरक्षण दिया जा रहा है। आज हर हिन्दुस्तानी का विश्वास न्याय से उठ चुका है देखो न्याधीशों आज हुए इस अन्याय से आसमान फट चुका है, जमीन रो रही है, हमारी आत्माएं तुम्हें श्राप दे रही है, बस एक ही बात कहूँगा “जाके पाँव न फटी बिवाई वो का जाने पीर पराई ” सार्थक लेखन चातक साब

    chaatak के द्वारा
    January 30, 2013

    स्नेही योगी जी, सुना तो होगा आपने ‘निर्बल को ना सताइये जाकी मोटी हाय, मुई खाल की स्वांस से सार भसम होव्य जाय’ तो मेरी प्रार्थना है आप सभी ब्लोगर बंधुओं से कि इस बात को सच्चे मन से स्वीकार करें कि हम भले ही बलवान और सक्षम होने का अभिमान मन में पाले हैं लेकिन इन ज्यादतियों को और इनके प्रति अपनी लाचारगी को देखकर उसी मुई खाल की तरह आह भरे जो लौह को भी भस्म कर सकती हैं, शायद अब ईश्वर हमें न्याय देगा इसलिए अपने आहों की दरख्वास्त वहीँ भेजें, असर आएगा|

    jlsingh के द्वारा
    January 31, 2013

    आप सब का जोरदार समर्थन करता हूँ……आहे भी भर रहा हूँ …इन जजों, न्यायविदों(अन्यायियों) को स्वाहा करना चाहता हूँ! अंधेर नगरी चौपट राजा…“जाके पाँव न फटी बिवाई वो का जाने पीर पराई ” … इनके घर में भी तो बहू बेटियां होंगी! …..क्यों नहीं फटता, आसमान इनके ऊपर! …..हे राम! ….हे कृष्ण! ….हे वीर हनुमान! ….कुछ तो करो! …..इन दुष्टों को कौन सबक सिखाएगा????

    chaatak के द्वारा
    January 31, 2013

    आदरणीय जे.एल. सिंह जी, आज हमारी पीड़ा एक जैसी है हमारी अभिव्यक्तियाँ एक जैसी हो चुकी हैं हमारी एक राय है हमें एक ही चीज़ हासिल करनी है वह है ‘न्याय’ और विडंबना देखिये कि मिलता है सिर्फ अन्याय वो भी न्याय के लिफ़ाफ़े में रखकर| लानत है ऐसी व्यवस्था पर !

shashibhushan1959 के द्वारा
January 30, 2013

आदरणीय चातक जी, सादर ! आप आहत हैं, मैं आहत हूँ, इस देश का हर नागरिक आहत है, पर राजनीति और क़ानून के ये गंदे खिलाड़ी अपने कारनामों पर खुश हो रहे होंगे, और हमारी मजबूरियों पर ठहाके लगा कर हँस रहे होंगे ! मुठ्ठियाँ भींच जाती हैं, लहू उबलने लगता है, पर पिंजरे में बंद परिंदे की तरह केवल फडफडा कर शांत हो जाना पड़ता है ! इस सड़ी-गली व्यवस्था के दुर्गंधमय वातावरण में दम घुट रहा है ! चारो तरफ अँधेरा ही अँधेरा है, और इस अँधेरे में इन दुराचारियों की कुत्सित हँसी के अतिरिक्त और कुछ सुनाई भी नहीं दे रहा है !

    chaatak के द्वारा
    January 30, 2013

    आदरणीय शशिभूषण जी, सादर अभिवादन, हमारी पीड़ा का अंदाजा हर आम आदमी को है या ये कहूं कि हर दिल में वही पीड़ा है और जिस तरह की सरकारी नौटंकी चल रही है और जिस अंदाज में फैसले सुनाये जा रहे है ये लोकतंत्र के शव को दफनाने की घंटी के शोर के सिवाय कुछ नहीं| एक बार रूस में सर्वहारा वर्ग की क्रांती ने पूजीपतियों की खून से अपने देश को सींचा था और लगता है इस बार हिन्दुस्तान सम्पूर्ण अभिजात्य वर्ग की कुर्बानी लेकर भारत माता को बोझ से हल्का करेगा तभी न्याय चेतेगा, तभी दरिन्दे सहमेंगे|

akraktale के द्वारा
January 30, 2013

आदरणीय चातक जी सादर, बिलकुल दुरुस्त बात है इसतरह से दोषी को बचाना कतई भी जायज नही है. जिसे कुदरत ने बालिग़ बना दिया उसे हम जब तक चाहे क़ानून बनाकर नाबालिग कह लें, इससे प्रकृति का नियम तो नहीं बदल सकता. जघन्य अपराध करने वाले को दंड भी वैसा ही मिलना चाहिए. हमारे धार्मिक ग्रंथों से एकाध प्रसंग इस तरह का आया भी है और वहाँ अपराधी को भी गलती अनुसार सामान दंड दिया गया था. यहाँ भी दंड अवश्य ही अपराध के सामान ही मिले यही सब चाहते हैं.सादर.

    chaatak के द्वारा
    January 30, 2013

    स्नेही रक्तले जे, सादर अभिवादन, मुझे तो लगता है जैसे समस्या अपराधी के बालिग़ होने की नही है बल्कि समस्या है इन न्यायाधीशों, प्रशासकों और नेताओं के घरों में बैठे नाबालिग अपराधियों की जिनकी सुरक्षा ठीक उसी वक्त खतरे में पड़ जायेगी जैसे ही एक नजीर तैयार होगी| वास्तविकता यही है कि यहाँ चिंता एक दरिन्दे की नहीं बल्कि हर माननीय के घर में बैठे उस दरिन्दे की है जिसे नाबालिग होने का सर्टिफिकेट पकड़ा का कर कानूनन बेगुनाह बनाने की कवायद चलती आ रही है| ये सिर्फ हथकंडा है और निहयात शर्मनाक है किसी भी देश, कौम और दुनिया के लिए|

jlsingh के द्वारा
January 30, 2013

आदरणीय चातक भाई, सादर अभिवादन! आपने बहुत कुछ लिख कर अपने दिल का गुब्बार निकाल लिया …आश्चर्य तो इस बात की है की किसी न्यूज़ चैनेल या एनी प्रिंट मीडिया भी इसकी खास चर्चा नहीं हुई, सभी डरते हैं—नयायालय की अवमानना के खिलाफ लिखने बोलने से! आखिर नयायालय की अवमानना केवल किसी के कहने लिखने भर से होती है … अन्याय का साथ देने से उसकी अवमानना नहीं होती! ये त्वरित अदालतें भी क्या कर रही है अब तक? इस देश में कुछ भी सम्भव है …. मन तो मेरा भी हो रहा है कि मैं भी नाबालिग होने का सर्टिफिकेट बनवा कर जघन्य अपराध कर डालूँ….

    chaatak के द्वारा
    January 30, 2013

    स्नेही जे.एल. सिंह जी, न्यायालय मान देने लायक हो तो जरूर मान पायेगा लेकिन जिस तरह न्याय को शर्मसार करके जबरदस्ती मान लेने की कवायद चल रही है उसे भले ही 1,241,491,959 हिन्दुस्तानी स्वीकार कर ले मैं इसे किसी भी तरह का मान देने को तैयार नहीं| आशा है आपका अनुसरण अन्य हिन्दुस्तानी भी करेंगे और कमसे कम ४५ साल की उम्र तक हर व्यक्ति को नाबालिग बनाए रख्नेगे|

January 30, 2013

आज हर हिन्दुस्तानी का विश्वास न्याय से उठ चुका है देखो न्याधीशों आज हुए इस अन्याय से आसमान फट चुका है, जमीन रो रही है, हमारी आत्माएं तुम्हें श्राप दे रही है, हर माँ, हर बहन, हर बेटी तुम्हें और तुम्हारे उस परिवार को बददुवायें दे रही हैं जिसे तुम एक मासूम के खून से सनी अन्याय की रोटियाँ खिल रहे हो!…………………एक दम दमदार लिखे हो भाई………………….मजा आ गया………….इतने पर तो मुर्दों में जान आ जाएँ पर हम कमबख्त भारतीय……………….हाँ…………….हाँ…………………नींद आ रही है………………शुभ रात्रि…………….!

    chaatak के द्वारा
    January 30, 2013

    स्नेही अलीन जी, सादर अभिवादन, काश के हमारे दिलों से निकली आहें असर कर सकतीं, अभी तो ‘पीर हिमालय पर्वत सी बढ़ चुकी है’|

    chaatak के द्वारा
    January 29, 2013

    काश कि हिन्दुस्तान में न्याय सभी को मिल सके!

seemakanwal के द्वारा
January 29, 2013

अब अपराधियों का हौसला और भी बढ़ेगा .वे निश्चित होकर अपराध करेंगे .

    chaatak के द्वारा
    January 29, 2013

    सीमा जी, आपका अंदेशा बिलकुल सही है| जिस देश के सर्वोच्च न्यायालय का जज खुलेआम ये कहता हो कि वह स्वयं सडकों पर हो रहे आन्दोलन का हिस्सा बनना चाहते थे और फिर भी एक बदक्ल न्याय के स्थान पर न्याय को मानवता के लिए एक भद्दा चुटकुला सिद्ध कर देता है, उस देश का भविष्य वही है जो आपने कहा है|

divya (div 81) के द्वारा
January 29, 2013

अपराध कि गंभीरता को दरकिनार कर ऐसे फैसले बेहद अफसोसजनक है  कुछ महीने ही है उसके बालिग़ होने में मगर वो सर्टिफिकेट के अनुसार, उसकी हरकत और कर्म तो शैतानी और पिशाचों कि सोच वाले है | बहुत ही दुखद और निराशाजनक है

    chaatak के द्वारा
    January 29, 2013

    दिव्या जी, निराशा भी होती है और घृणा भी लेकिन हम वे शेर हैं जो लोकतंत्र रूपी पिंजरे में प्रशासन के नजरबन्द हैं और ऊपर से (अ)न्यायी क़ानून के अनगिनत ताले जड़ दिए गए है| हम अपने रोष को दर्शाने के लिए अपनी पूँछ फटकारते हैं आँखों से चिंगारियां चटकाते हैं और फिर वो हमारी ही आँखों को जलाकर आंसुओं से भर देता है| हमारे पास सिर्फ पछतावा है हमारे पास सिर्फ आहें हैं, रुदन है और जीने के लिए एक गंदा परिवेश!

    chaatak के द्वारा
    January 29, 2013

    स्नेही अग्रज, सादर अभिवादन, आपकी दी गई लिंक पर जो खबर है वो कमोवेश मेरे ही शहर से सम्बंधित है आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि आरोपित ACJM महोदय काफी प्रकांड विद्वान् है इन्होने B.A. Third डिवीज़न M.A. Third डिवीज़न और LL.B. सेकंड डिवीज़न में पास किया है ये दोषी हैं या नहीं इसका फैसला तो जस्टिस सुधीर अग्रवाल जी जो कि मामले की जांच कर रहे है वही करेंगे और मुझे लगता है शायद वे न्याय भी कर सकें, लेकिन जिन लड़कियों ने इनके विरुद्ध शिकायत की है उनमे से एक के बारे में तो ये भी कहा जा रहा है कि वो अबला नारी तीन बार अपने प्रेमियों के साथ पहले भी फरार हो चुकी है और उसने अपने माता-पिता के विरुद्ध भी शिकायत कर रखी है यदि इन बातों में सच्चाई है तो सजा सिर्फ जज साहब को नहीं वरन उसके माता पिता को भी होनी चाहिए| इस केस में हकीकत कम और अफसाना ज्यादा नजर आ रहा है और इसकी तुलना दामिनी केस से करना मैं समझूंगा अपमानजनक है| जहाँ ये जरूरी है कि अपराधी को सजा मिले वहां पर लिंगभेद करना भी गलत है हर बार पुरुष ही गलत है मैंने कभी ना कहा है और न ही इस मामले में मेरी कोई अंधभक्ति है दामिनी केस में भी मैं अपराधी को जघन्यतम सजा का पक्षधर हूँ और गोंडा केस में भी लेकिन गोंडा केस में यदि दोषी लडकी है तो उसे मैं सुधार का मौक़ा दिए जाने और कोमल दंड दिए जाने की भी सिफारिश करूंगा क्योंकि कुछ भी हो वो स्त्री है|

    ashvinikumar के द्वारा
    January 30, 2013

    प्रिय अनुज ,,मै मि0 थर्ड की विद्वता का लोहा मानता नही अदमय साहस पराक्रम उनके जीवन मे न जाने कितनी बाधाएँ आयीं होंगी लेकिन अर्जुन की तरह वह सदेव थर्ड को भेदने मे कामयाब रहे इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं :)  खैर उक्त भागमभाग बालिका /स्त्री /महिला /के आरोप मे अगर सच्चाई है तो उचित दंड आवश्यक है लेकिन अगर दुर्भावना से प्रेरित होकर उसने ऐसा दुषारोप से नयाय के अति सम्मानित पद को लाछित करने का प्रयाश किया है तो उसे कठोरतम दंड मिले ताकि भविष्य मे किसी ऐसे दुशचक्रियों की घृणित योजनाबद्ध कार्यों परलगाम लगाई जा सके ,,,भाई भाई मै इसे समझ नही पाया —- अपराधी को सजा मिले वहां पर लिंगभेद करना भी गलत है——दोषी लडकी है तो उसे मैं सुधार का मौक़ा दिए जाने और कोमल दंड दिए जाने की भी सिफारिश करूंगा क्योंकि कुछ भी हो वो स्त्री है|—-पुनश्च अनुज अनुज …………जय भारत

    chaatak के द्वारा
    January 30, 2013

    स्नेही अग्रज, आपके विचार जानकर प्रसन्नता हुई मेरी राय भी आपसे जुदा नहीं है, बशर्ते स्त्री वर्ग पर मैं कोमल दंड का पक्षधर हूँ और उसका कारण व्यक्त करने पर मैं तथाकथित नारीवादियों का नाहक ही निशाना बन जाऊँगा इसलिए विनम्रतापूर्वक मैं सिर्फ अपना रुझान रख रहा हूँ कारण नहीं| अग्रज को एक बार फिर हार्दिक धन्यवाद !

nishamittal के द्वारा
January 29, 2013

आपसे सहमत हूँ यही क़ानून काअंधापन है

    chaatak के द्वारा
    January 29, 2013

    निशा जी, ये कानून का अंधापन नहीं है, हिन्दुस्तान का क़ानून अंधा नहीं है| ये कानून के जानकारों की मक्कारी या फिर शायद उनकी बलात्कारी मानसिकता है|


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