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नक्सलवाद या राजनीतिक आतंकवाद

Posted On: 7 Oct, 2012 Others में

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हिन्दुस्तान में राजनीति राष्ट्र की सेवा और विकास का हेतु होने के बजाय लोकतांत्रिक तानाशाही का जरिया मात्र रही है। यह तानाशाही काफी हद तक देश को घुन की तरह चाट चुकी है फिर भी लोकतंत्र में आस्था का डंका पीटने वाले बेशर्मो को इस बात का अंदाजा नहीं है कि उनके पैरों तले जमीन कब की खिसक चुकी है। देश के किसी भी हिस्से में देखिये ये राजनीतिक आतंकवाद फन काढ़े विष वमन कर रहा है। कमोवेश हर जगह के हालात एक जैसे हैं अंतर सिर्फ इतना है कि कुछ जगहों पर इसके विरोध में लोगों ने हथियार तक उठा लिए हैं और कुछ जगहों पर संगठन की कमी के कारण अभी सिर्फ दिलों में बारूद इकट्ठा हो रहा है। गौरतलब है कि जो तस्वीर उभर रही है वह बहुत ही भयानक है और किसी भी समय हकीकत की जमीन पर उतर सकती है। राजनीतिक और प्रशासनिक पर्यवेक्षक शासन और सत्ता के सामने सिर्फ वही तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं जो वह देखना चाहती है। वैसे भी ये इतने प्रैक्टिकल होते हैं कि इनका ध्यान सिर्फ अपने वेतन, भत्ते और हनक बनाने पर ही केन्द्रित रहता है। राजनेताओं द्वारा जिस तरह क़ानून और व्यवस्था को बंधक बनाने की परिपाटी और विरोधियों का दमन करने का चलन अपना लिया गया है वह इस लोकतांत्रिक तानाशाही का निकृष्टतम रूप है। राजनेताओं की इसी राजनीति की प्रतिक्रिया स्वरुप जन्मे हिंसक विरोध को नक्सलवाद की संज्ञा दी जा रही है। नक्सलवाद जाने-अनजाने देशद्रोह तक की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, और जिन स्थानों पर वे पूरी तरह से नक्सलियों के रूप में चिन्हित कर दिए गए हैं वहां उनका राजनीतिक इस्तेमाल भी धड़ल्ले से हो रहा है। यानी प्रतिक्रिया स्वरुप की जाने वाली हिंसा को अब राजनीतिक हथियार बनाकर नासूर में तब्दील कर दिया गया है। स्पष्ट है कि इन नक्सलियों के हालात अब पाकिस्तान द्वारा पोषित आतकवादियों के समकक्ष है जिनके पास पुनर्वास का कोई रास्ता नहीं है। जग-जाहिर है कि इंसान जब हथियार उठता है और उसके लिए पीछे लौटने के दरवाजे बंद हो जाते हैं तो वह जेल में मरने के बजाय आज़ाद जिन्दगी जीते हुए एन्काउन्टर होने की सबसे बड़ी और अदम्य इच्छा पाल लेता है।
नक्सलवाद की जड़ों और उनके प्रभावों पर केन्द्रित ना रहते हुए मेरा मकसद राजनीतिक आतंकवाद से पनप रहे आक्रोश और बेहद चिंताजनक विचारधारा की तरफ ध्यान आकृष्ट करना है। राजनीति अब राज्य और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरी तरह से भुलाकर आम आदमी और स्थानीय क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व कायम करने का साधन बन गई है प्रशासनिक कार्यों में बेढंगे और निहायत घटिया स्तर पर हस्तक्षेप करना राजनेताओं का प्रमुख उद्देश्य बना हुआ है। चुनावों के बाद सबसे पहले उन लोगों की लिस्ट बनती है जिन्होंने चुनाव में विरोध किया हो, और उनके दमन की योजनायें तैयार की जाती है, (बहुतेरे नेता इसे बाकायदा नाकाबंदी की संज्ञा देते है) उसके बाद बारी आती है अपने लोगों (जाहिर सी बात है इनमे कोई शरीफ आदमी नहीं होता) को कमाई करवाने और उनका रोब-दाब बढ़ाने की, सो स्थानीय प्रशासन से बाकायदा उनकी पहचान कराई जाती है कि ये आज से आपके नए दामाद हैं। और फिर बारी आती है सगे-सम्बन्धियों और आर्थिक हितैषियों की जिन्हें नाली, खडंजे, सड़के और जितने भी सरकारी निर्माण के ठेके पट्टे (यहाँ तक की बीयर और शराब की दुकानों के लाइसेंस तक) उन्हें सौंपने की। जिन लोगों की तनिक भी दिलचस्पी इन चीजों में होगी उन्होंने अक्सर क्षेत्र के माननीयों को अपने हाथों से सार्वजनिक उपक्रम (शिक्षा, चिकित्सा, खाद्य, निर्माण एवं आपदा प्रबंधन विभाग आदि) के कार्य बांटते देखा होगा। बात सिर्फ यहीं तक सीमित होती तो भी स्थिति विस्फोटक न होती। अपराधियों को संरक्षण देकर जिस तरह का असुरक्षित वातावरण पैदा किया जा रहा है वह लोकतंत्र से स्वास्थ्य के लिए बिलकुल भी लाभदायक नहीं है। दमन और विद्वेष की नीव पर खडी सरकारें हर घर में नक्सली पैदा करने की कोशिश करती नजर आ रही हैं। इन राजनेताओं को इतना भी समझ में नहीं आता है कि ये वास्तव में उस पद के हकदार भी नहीं है जिस पर बैठकर ये इतराते हैं और तानाशाहों जैसी भोंडी हरकतें करते हैं। कुछेक नेताओ को छोड़कर सारे राजनेताओं की हालत ये है कि उन्हें विधायक या संसद इसलिए बनने का मौका मिला क्योंकि मतदाता मतदान करने ही नहीं आया। महज २० से २५ प्रतिशत वोटों को पाकर राजनेता बन गए इन राजनीतिज्ञों को कमाई और राजनीतिक ताकत को छोड़कर राजनेता के किसी फ़र्ज़ का ककहरा तक नहीं आता है। शिक्षित युवाओं और सभ्य हिन्दुस्तानियों के दिल पर क्या गुजरती होगी जब उनके द्वारा चुने गए नेता भारत की जनता और भारत माता में अपनी निष्ठा की बात न कहकर व्यक्ति विशेष में अपनी निष्ठा का ढोल पीटता है? शायद ये बात आज कोई राजनेता नहीं सोचता; हिन्दुस्तान की अधिकाँश जनता भी शायद इस छोटी सी बात की गंभीरता को नहीं समझ पाती और हर बार छली जाती है। लेकिन जिस तरह शिक्षा और संचार के माध्यमों का विकास हो रहा है आज इस देश की जनसँख्या का एक बहुत बड़ा युवा तबका राजनीति की दशा और दिशा पर निगाह रखता है और हर रोज उसका असंतोष बढ़ता जाता है, मैं इसी असंतोष को नक्सलवाद के बीज के रूप में देखता हूँ जो आगे चलकर बहुत ही विकराल रूप ले सकता है। ये राजनीतिक आतंकवाद यदि इसी तरह जारी रहा तो विस्फोट बहुत दूर नहीं है, असंतोष यदि ब्रिटेन में राजा और रानी का सार्वजानिक क़त्ल करवा कर कामनवेल्थ की स्थापना कर सकता है तो हिन्दुस्तान में पूर्ण शुद्धिकरण का नाद करके लोकतांत्रिक-अधिनायक की व्यवस्था भी दे सकता है।

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85 प्रतिक्रिया

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October 30, 2012

बहुत ही अच्छी सार्थक प्रस्तुति जाग्रति भाबना पूर्ण आलेख की बधाई

Darshan के द्वारा
October 22, 2012

चातक जी, आपके चेताने वाले लेख ने बहुत प्रभावित किया | परमात्मा से प्रार्थना है, कि आपके के ऐसे जाग्रति लाने वाले लेख हम सब को मिलते रहें | धन्यवाद | बर्बाद गुलिस्तां करने को जब एक ही उल्लू काफी था, हर शाखपे उल्लू बैठा है अन्जामें गुलिस्तां क्या होगा | जायें तो जायें कहाँ, समझेगा कौन यहाँ | दर्द भरे दिल की जुबां, जायें तो जायें कहाँ | मुझे तो अँधेरे में प्रकाश की किरण भी नज़र नहीं आ रही | पूरे उत्तर-पूर्व में आंतक का बोलबाला है जिसकी आवाज में मार्कसिस्ट विचारधारा के बीज नज़र आते हैं | उसके बाद नेपाल, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र तक नक्सलवाद की की गहरी जढ़े फैली हुई हैं | जवाहरलाल यूनिवर्सिटी को अगर कार्ल मार्क्स यूनिवर्सिटी कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी | देहली और देश की दूसरी कई युनिवर्सितिस में भी मार्कसिज्म का बोलबाला है | कश्मीर और मुस्लिम बाहुल्य वाले क्षेत्रों में जिहादी विचार और बंगलादेशी पूरे असाम और देश यहाँ – वहां बस गए है | महाराष्ट्र में ऍम-अन-अस ने तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के गुर्गो ने आंतक मचा रखा है | सरकार की शह पर हरयाणा और राजस्थान में भू माफिया का आंतक सिर उठाये हुये है तो पंजाब में सिख गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी ( SGPC ) श्रोमणी अकाली दल (SAD) की शह पर आंतकवादियों के सम्मान में समारक – गुरद्वारे बना रहा है | जायें तो जायें कहाँ, समझेगा कौन यहाँ | दर्द भरे दिल की जुबां, जायें तो जायें कहाँ | मुझे तो अँधेरे में प्रकाश की किरण भी नज़र नहीं आ रही | पूरे उत्तर-पूर्व में आंतक का बोलबाला है जिसकी आवाज में मार्कसिस्ट विचारधारा के बीज नज़र आते हैं | उसके बाद नेपाल, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र तक नक्सलवाद की की गेहरी जढ़े फैली हुई हैं | जवाहरलाल यूनिवर्सिटी को अगर कार्ल मार्क्स यूनिवर्सिटी कड़े तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी | देहली और देश की दूसरी कई युनिवर्सितिस में भी मार्कसिज्म का बोलबाला है | कश्मीर और मुस्लिम बाहुल्य वाले क्षेत्रों में इस्लामिक विचारबंगलादेशी पूरे असाम और देश यहाँ – वहां बस गए है | महाराष्ट्र में ऍम-अन-अस ने तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के गुर्गो ने आंतक मचा रखा है | सरकार की शह पर हरयाणा और राजस्थान में भू माफिया का आंतक सिर उठाये हुये है तो पंजाब में आंतकवादियों के सामान के लिये सिख गुरुद्वारे प्रबंधक कमेटी ( SGPC ) श्रोमनी अकाली दल (SAD) की शह पर आंतकवादियों के सम्मान में समारक – गुरद्वारे बना रहा है | जायें तो जायें कहाँ, समझेगा कौन यहाँ | दर्द भरे दिल की जुबां, जायें तो जायें कहाँ | मुझे तो अँधेरे में प्रकाश की किरण भी नज़र नहीं आ रही | पूरे उत्तर-पूर्व में आंतक का बोलबाला है जिसकी आवाज में मार्कसिस्ट विचारधारा के बीज नज़र आते हैं | उसके बाद नेपाल, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र तक नक्सलवाद की और दूसरी और बंगलादेशी जढ़े फैली हुई हैं | जवाहरलाल यूनिवर्सिटी को अगर कार्ल मार्क्स यूनिवर्सिटी कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी | देहली और देश की दूसरी कई युनिवर्सितिस में भी मार्कसिज्म का बोलबाला है | कश्मीर और मुस्लिम बाहुल्य वाले क्षेत्रों में जिहादी विचार और दूसरी और बंगलादेशी पूरे असाम और देश यहाँ – वहां बस गए है | महाराष्ट्र में ऍम-अन-अस ने तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के गुर्गो ने आंतक मचा रखा है | सरकार की शह पर हरयाणा और राजस्थान में भू माफिया का आंतक सिर उठाये हुये है तो पंजाब में आंतकवादियों के सामान के लिये सिख गुरुद्वारे प्रबंधक कमेटी ( SGPC ) श्रोमनी अकाली दल (SAD) की शह पर आंतकवादियों के सम्मान में समारक – गुरद्वारे बना रहा है | समस्या का समाधान शायद राष्ट्रपति शासन और फिर राष्ट्रपति प्रणाली -व्यवस्था कायम करने में है | अन्यथा देश में ओलिगार्ची ( OLIGARCHY) व्यवस्था कायम हो चुकी है अर्थात देश में गिने – चुने व्यक्तियों – परिवारों का राजपाठ कायम हो चुका है |

Darshan के द्वारा
October 22, 2012

चातक जी, आपके चेताने वाले लेख ने बहुत प्रभावित किया | परमात्मा से प्रार्थना है, कि आपके के ऐसे जाग्रति लाने वाले लेख हम सब को मिलते रहें | धन्यवाद | बर्बाद गुलिस्तां करने को जब एक ही उल्लू काफी था, हर शाखपे उल्लू बैठा है अन्जामें गुलिस्तां क्या होगा | जायें तो जायें कहाँ, समझेगा कौन यहाँ | दर्द भरे दिल की जुबां, जायें तो जायें कहाँ | मुझे तो अँधेरे में प्रकाश की किरण भी नज़र नहीं आ रही | पूरे उत्तर-पूर्व में आंतक का बोलबाला है जिसकी आवाज में मार्कसिस्ट विचारधारा के बीज नज़र आते हैं | उसके बाद नेपाल, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र तक नक्सलवाद की की गहरी जढ़े फैली हुई हैं | जवाहरलाल यूनिवर्सिटी को अगर कार्ल मार्क्स यूनिवर्सिटी कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी | देहली और देश की दूसरी कई युनिवर्सितिस में भी मार्कसिज्म का बोलबाला है | कश्मीर और मुस्लिम बाहुल्य वाले क्षेत्रों में जिहादी विचार और बंगलादेशी पूरे असाम और देश यहाँ – वहां बस गए है | महाराष्ट्र में ऍम-अन-अस ने तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के गुर्गो ने आंतक मचा रखा है | सरकार की शह पर हरयाणा और राजस्थान में भू माफिया का आंतक सिर उठाये हुये है तो पंजाब में सिख गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी ( SGPC ) श्रोमणी अकाली दल (SAD) की शह पर आंतकवादियों के सम्मान में समारक – गुरद्वारे बना रहा है | जायें तो जायें कहाँ, समझेगा कौन यहाँ | दर्द भरे दिल की जुबां, जायें तो जायें कहाँ | मुझे तो अँधेरे में प्रकाश की किरण भी नज़र नहीं आ रही | पूरे उत्तर-पूर्व में आंतक का बोलबाला है जिसकी आवाज में मार्कसिस्ट विचारधारा के बीज नज़र आते हैं | उसके बाद नेपाल, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र तक नक्सलवाद की की गेहरी जढ़े फैली हुई हैं | जवाहरलाल यूनिवर्सिटी को अगर कार्ल मार्क्स यूनिवर्सिटी कड़े तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी | देहली और देश की दूसरी कई युनिवर्सितिस में भी मार्कसिज्म का बोलबाला है | कश्मीर और मुस्लिम बाहुल्य वाले क्षेत्रों में इस्लामिक विचारबंगलादेशी पूरे असाम और देश यहाँ – वहां बस गए है | महाराष्ट्र में ऍम-अन-अस ने तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के गुर्गो ने आंतक मचा रखा है | सरकार की शह पर हरयाणा और राजस्थान में भू माफिया का आंतक सिर उठाये हुये है तो पंजाब में आंतकवादियों के सामान के लिये सिख गुरुद्वारे प्रबंधक कमेटी ( SGPC ) श्रोमनी अकाली दल (SAD) की शह पर आंतकवादियों के सम्मान में समारक – गुरद्वारे बना रहा है | जायें तो जायें कहाँ, समझेगा कौन यहाँ | दर्द भरे दिल की जुबां, जायें तो जायें कहाँ | मुझे तो अँधेरे में प्रकाश की किरण भी नज़र नहीं आ रही | पूरे उत्तर-पूर्व में आंतक का बोलबाला है जिसकी आवाज में मार्कसिस्ट विचारधारा के बीज नज़र आते हैं | उसके बाद नेपाल, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र तक नक्सलवाद की और दूसरी और बंगलादेशी जढ़े फैली हुई हैं | जवाहरलाल यूनिवर्सिटी को अगर कार्ल मार्क्स यूनिवर्सिटी कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी | देहली और देश की दूसरी कई युनिवर्सितिस में भी मार्कसिज्म का बोलबाला है | कश्मीर और मुस्लिम बाहुल्य वाले क्षेत्रों में जिहादी विचार और दूसरी और बंगलादेशी पूरे असाम और देश यहाँ – वहां बस गए है | महाराष्ट्र में ऍम-अन-अस ने तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के गुर्गो ने आंतक मचा रखा है | सरकार की शह पर हरयाणा और राजस्थान में भू माफिया का आंतक सिर उठाये हुये है तो पंजाब में आंतकवादियों के सामान के लिये सिख गुरुद्वारे प्रबंधक कमेटी ( SGPC ) श्रोमनी अकाली दल (SAD) की शह पर आंतकवादियों के सम्मान में समारक – गुरद्वारे बना रहा है | समस्या का समाधान शायद राष्ट्रपति शासन और फिर राष्ट्रपति प्रणाली -व्यवस्था कायम करने में है | अन्यथा देश में ओलिगार्ची ( OLIGARCHY) व्यवस्था कायम हो चुकी है अर्थात देश में गिने – चुने व्यक्तियों – परिवारों का राजपाठ कायम हो चूका है |

vikas के द्वारा
October 22, 2012

चातक जी नमस्कार, सप्ताह के श्रेष्ठ ब्लॅागर सम्मान पर हार्दिक बधाई, आपने बहुत ही ज्वलंत मुद्दा उठाया है । आज के युग मे राजनीति और अपराधियों की मिलीजुली सरकार चल रही हैं ।इससे जो अत्यन्त प्रताडित होते है वे विद्रोह करते है पर इसका मतलब ये भी नहीं कि हर नक्सली सरकार से पीडित होता है कुछ तो अन्य कारणों से । पर फिर भी जो स्थितियाँ है वे घातक है ।

aman kumar के द्वारा
October 16, 2012

बहुत सामयिक लेख ! पर सवाल तो ये है की एस सब का जिम्मेदार कोन है ? वो है वोटर जो चुनाव ही गलत करता है ! या वोट ही नही करता ? केजरीवाल जी भी अकेले से लगते है | चुनाव में पर्त्यो को हरा केर भर का रास्ता दिखाना बहुत बड़ा और मुस्किल है |

    chaatak के द्वारा
    October 16, 2012

    अमन जी, लेख पर अपनी राय प्रकट करने का हार्दिक धन्यवाद,वोटर गलत चुनाव करने और सजा भुगतें तब भी बात कुछ तर्कसंगत है लेकिन यहाँ वोट देने वाले उन लोगों के कर्मों की सजा भुगत रहे हैं जिन्होंने वोट ही नहीं किया| आज की सरकार उन वोटो से नहीं नहीं बनी है जो पोल हुए बल्कि उन वोटों से बनी है जो पोल ही नहीं हुए|

dharamsingh के द्वारा
October 15, 2012

ब्लागर आफ़ द वीक चुने जाने की हार्दिक बधाइ । उत्तम विचार हैं ।   20 साल मार्शलल ला लागू  होना चाहिए व सभी सैकुलरो को आजीवन  तभी सुधरेंगे

    chaatak के द्वारा
    October 16, 2012

    स्नेही धर्मसिंह जी, सादर अभिवादन, आपकी राय से १००% सहमत हूँ| चुनाव करने का अधिकार सहज ही पा गई हिन्दुस्तान की रियाया जब तक तानाशाही हुकूमत का स्वाद नहीं चखेगी इसकी सेकुलराई नहीं निकलने वाली ६० वर्ष में भी जो जनता अपना प्रतिनिधि चुनना नहीं सीख पाई उसे कुछ कष्ट तो निश्चित रूप से मिलना चाहिए| वैसे भी कांग्रेस ने ये सबक देना शुरू कर दिया है इस समय अर्ध-तानशाही तो चल ही रही है| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

ashvinikumar के द्वारा
October 15, 2012

प्रिय अनुज यूं ही भटकते भटकते अचानक जागरण जंकशन पर पहुच आया ,,लेकिन अच्छा ही हुआ जो तुम मिल गए तो नूर आ गया वर्ना चरागों से …. ,,यकीन मानो जिस व्यवस्था की सड़ांध से हम व्यथित हैं यह समस्या आज की नही है यह चली आ रही है और चलती रहेगी कुछ काल के लिए इसमे कमी अवश्य आ जाती है वैसे ही जैसे वर्ष मे एक बार बसंत का मौसम आता है और फिर चला जाता है क्योंकि कमीनों की दुनिया मे कमीनगी अधिकतर बहुमत मे आ ही जाती है विगत एक वर्षों से राजनेता इनके आचरण और आंदोलन इत्यादि को बेहतर तरेके से समझने का प्रयाश कर रहा हूँ ,,और अब मुझे कोई ताज्जुब नही होगा अगर अमुक नेत्री पिता बन जाये और अमुक नेता माँ अरे भाई ई तो कब्र मे पूरी तरह से शायद उर्वर रहते होंगे अपना D.N.A देने को आतुर ……खैर सुना अपने बेनी बाबू भूँक रहे थे कि कोई नेता न न केंद्रीय मंत्री तो कम से कम 71 करोड़ की चीटिंग करेगा तभी उसे चीटिंग मानना चाहिए वर्ना वो कह रहा है की उसने चीटिंग नही की तो नही की ,, अब खुजलीवाल को लाख खुजली होती रहे या या स्टेम्प्ड्यूटी चोर सियारों के झुंड मे हुवाँ हुवाँ करता रहे ,, अभी टीवी पर डाक्यूमेंटरी चल रही है मुमताज़ और शाहजहाँ की ,,कहा जा रहा है बेचारे शाहजहाँ ने अपनी शरीके हयात के गम मे सात दिनों तक खाना नही खाया और बेचारे की दाढ़ी सफ़ेद हो गई जिसकी कीमत रिआया को बीस वर्षों तक चुकानी पड़ी ताजमहल बना के,, कहीं का ईंट कहीं का रोड़ा साले ने एक नुक्ता जोड़ा –मुमताज़,, वैसे कहा तो यह भी जाता है की हरम मे माहाना माकूल रकम अदा किया जाता था बीबियों को उनकी कार्यकुशलता के अनुसार ,,ये तो सियासत है ये उनका ही है काम ,,महबूब का जो :-( अरे फिर याद आया एक पत्रकार महोदय टी0 वी0 पर मोदी से बार बार माफी मांगने के लिए कह रहे थे और और मोदी साहब आराम से जनता के तरफ देखकर हाथ हिला रहे थे ,,मै आज तक नही समझ पाया की किस बात की माफी और किस्से ,,अरे यार माफी उससे मांगी जाती है जो उसका पात्र हो अन्यथा शठे शाठ्यम ……… उस पत्रकार ने जरूर अम्मा से बैक डोर से कुछ न कुछ लिया जरूर होगा …पागल हुआ पड़ा था .. भाई विषय से भटकने के सारी…………जय भारत

    chaatak के द्वारा
    October 16, 2012

    स्नेही अग्रज, सादर अभिवादन, व्यवस्था की सड़ांध को दूर करने का दायित्व अब हिन्दुस्तान की आम जनता को ही उठाना चाहिए, और इसके लिए यदि युवा आगे नहीं आएगा तो फिर हो चुकी सफाई| कहने को तो ये सफाई है लेकिन करना तो सफाया है इसलिए अब अन्ना की गोद से निकलकर आगे आना होगा| आपकी इस विस्तारित प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

MAHIMA SHREE के द्वारा
October 15, 2012

चातक जी नमस्कार सर्वप्रथम सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान के लिए आपको हार्दिक बधाई ! वाकई में आज राजनीती एक तरह के आतंकवाद ही हो गयी है … एक भ्रस्त राजनेता किस तरह सत्तासीन होने के बाद आपने कर्तव्यो की पूर्ति करता है ..उसका कच्चा चिठा आपने बखूबी दिया जो बेहद चिंतनीय और आक्रोश पैदा करने वाला है .. पर इन सबके पीछे कंही ना कंही आम जनता का भी परोक्ष रूप से हाथ है जो ज्यादातर टाइम जाति के नाम पर वोट करती है या फिर थोड़ी सी शराब और अन्य कमजोरियों की वजह से इनके कुसी पे बिठाती है / अगर आज का पढ़ा लिखा शहरी युवा वास्तव में देश के प्रति जागरूक होकर .. अपना योगदान करें …. और लोगो को जागरुक करें .तो इस राजनितिक आतंकवाद का सफाया किया जा सकता है ….. पुन बधाई आपको

    chaatak के द्वारा
    October 15, 2012

    महिमा जी, सादर अभिवादन, आपकी बात सोलह आने सही है, जब तक युवा राष्ट्रवाद को सर्वोपरि मानकर स्वयं आगे नहीं आएगा ये राजनीतिक आतंकवाद यूँ ही बना रहेगा और हम इसके हाथो की कठपुतलियाँ! प्रतिक्रिया और वैचारिक सहमति का हार्दिक धन्यवाद!

Anil Saxena के द्वारा
October 14, 2012

चातक जी, बहुत ही नपे तुले शब्दों में बहुत कुछ कह दिया आपने. देखा जाये तो हमारे देश में लोकतंत्र का जितना दुरूपयोग हुआ है शायद यही लगता है कि यह देश इसके लायक था ही नहीं. सिर्फ वोटों की खातिर देश को बारूद के ढेर पर बैठाने में इन नेताओ को जरा भी संकोच नहीं होता. देश प्रेम का जज्बा तो जैसे इनके दिलों से मिट चुका है. कोई भी पार्टी चुनावो में ऐसे लोगो को टिकट देना चाहती है जिसकी हैसियत कम से कम एक करोड़ से ज्यादा हो. उसका इतिहास कुछ भी रहा हो. ज़ाहिर है कि कितना भी शरीफ या देश प्रेमी कोई क्यों न हो अगर उसके पास करोड़ों की रकम नहीं है तो चुनाव की सोच भी नहीं सकता. युवा आक्रोश आज चरम पर है. सही लिखा है आपने कि यह ज्वालामुखी कभी भी फट सकता है. गागर में सागर भरे इस लेख के लिए आपको बधाई.

    chaatak के द्वारा
    October 14, 2012

    स्नेही अनिल जी, सादर अभिवादन, लोकतंत्र के दुरुपयोग पर आपकी राय से पूरी तरह सहमत हूँ देश-प्रेम का जज्बा कायम है तो सिर्फ उन युवाओं के दिलों में जिन्हें देश को लूटने के लिए पद और शक्ति नहीं मिली है| हिन्दुस्तान में पनप रहा आक्रोश इस बार मध्यम वर्ग के युवाओं को समग्र क्रान्ति की राह दिखायेगा ऐसा मुझे भी लगता है| सकारात्मक टिप्पड़ी का हार्दिक धन्यवाद !

Anil "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
October 14, 2012

आदरणीय चटक जी, वर्तमान में राजनीतिक दलों की और सरकारों की सोंच को तथा उसके परिणामों को सही ढंग से व्यक्त किया है आपने…. आज इस देश की जनसँख्या का एक बहुत बड़ा युवा तबका राजनीति की दशा और दिशा पर निगाह रखता है और हर रोज उसका असंतोष बढ़ता जाता है, मैं इसी असंतोष को नक्सलवाद के बीज के रूप में देखता हूँ जो आगे चलकर बहुत ही विकराल रूप ले सकता है। ये राजनीतिक आतंकवाद यदि इसी तरह जारी रहा तो विस्फोट बहुत दूर नहीं है! समसामयिक एवं महत्वपूर्ण विषय पर लिखे गए लेख तथा सप्ताह के सबसे अच्छे लेखक चुने जाने पर आपको बधाई…. http://panditsameerkhan.jagranjunction.com/

    chaatak के द्वारा
    October 14, 2012

    अनिल जी, सादर अभिवादन, ब्लॉग पर आपकी सकारात्मक राय जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई| आपकी सहमति दर्शाती है कि युवा जाग रहा है और वह इन आतंकी राजनेताओं की हरकतों को समझ भी रहा है| प्रतिक्रिया द्वारा वैचारिक सहमति प्रदान करने का हार्दिक धन्यवाद!

आर.एन. शाही के द्वारा
October 13, 2012

श्रद्धेय चातक जी, ब्लागर आफ़ द वीक चुने जाने की हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ।

    chaatak के द्वारा
    October 13, 2012

    आदरणीय शाही जी, सादर अभिवादन, ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया से बहुत ख़ुशी हुई, सब आप वरिष्ठों का आशीर्वाद और माँ वाग्देवी की कृपा है |

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
October 12, 2012

JWALANT VISHAY PAR UTTAM AALEKH KEE PRASTUTI KE LIYE BADHAI ! SAATH HEE BEST BLOGGER BANANE PAR HARDIK BADHAAI ! PUNASHCH !!

    chaatak के द्वारा
    October 13, 2012

    स्नेही आचार्य विजय जी, सादर अभिवादन, ब्लॉग की विषयवस्तु पर आपकी सकारात्मक राय जानकर अत्यंत हर्ष हुआ| हार्दिक धन्यवाद!

alkargupta1 के द्वारा
October 12, 2012

चातक जी , आपके तो सभी आलेख उत्कृष्ट कोटि के होते हैं …. सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान प्राप्ति के लिए हार्दिक बधाई !

    chaatak के द्वारा
    October 13, 2012

    आदरणीय अलका जी, उत्साहवर्धन का बहुत-बहुत धन्यवाद!

सचेतक के द्वारा
October 12, 2012

सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर को मेरा सादर प्रणाम। आपकी पोस्ट वास्तव में विचारोत्तेजक एवं पैनी होती हैं। वर्तमान राजनीतिक रणनीति पर कम शब्दों में बहुत प्रभावकारी प्रहार किया आपने। वास्तव में आज चुनावों के माध्यम ‘जनप्रतिनिधि’ बनना एक आम ईमानदार व्यक्ति के लिए बहुत महंगी और टेढ़ी खीर है, यही बात अपने आप में एक बड़ा प्रमाण है कि आम आदमी और एक वर्तमान जनप्रतिनिधि (?) के बीच एक बड़ी वैचारिक खाई है। शहरों में वोटिंग का प्रतिशत कम होना भी इसी बात का द्योतक है कि साक्षर लोगों को वर्तमान उम्मीदवारों में से किसी से भी कोई उम्मीद नहीं होती। इसी विपरीत वैचारिक ध्रुव के कारण आमजन में असंतोष लावे की भांति पनप रहा है। इस लावे का ज्वालामुखी बीच-बीच में क्षेत्रीय नक्सलवाद के रूप में फटता भी है। परन्तु उसका भी लाभ ये जनप्रतिनिधि किस प्रकार लेते हैं, इसको भी ठीक से बताया है आपने। नेताओं द्वारा महंगे चुनावी इन्वेस्टमेंट का रिटर्न लेने का तरीका भी खूब बताया आपने। सही बात यह है कि आज नैतिकता मात्र किताबों, प्रवचनों और व्याख्यानों में ही सिमट कर रह गई है। उत्तम पोस्ट के लिए आपको हार्दिक बधाई !

    chaatak के द्वारा
    October 13, 2012

    सचेतक जी को सादर अभिवादन, ब्लॉग पर आपकी सहमति से प्रसन्नता हुई, इसमें कोई संदेह नहीं कि आज नैतिकता मात्र किताबों, प्रवचनों और व्याख्यानों में ही सिमट कर रह गई है। प्रतिक्रिया द्वारा प्रोत्साहन का हार्दिक धन्यवाद!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 12, 2012

प्रिय चातक जी सस्नेह बधाई.

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, सादर अभिवादन, आप वरिष्ठो के आशीर्वाद और माँ वाग्देवी की कृपा है| हार्दिक धन्यवाद!

rekhafbd के द्वारा
October 12, 2012

बेस्ट ब्लागर आफ द वीक बनने पर हार्दिक बधाई चातक जी

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    बहुत-बहुत धन्यवाद! सब आप लोगों का स्नेह है और माँ वाग्देवी की कृपा!

yamunapathak के द्वारा
October 12, 2012

chatak jee बेस्ट ब्लॉगर के रूप में चयनित होने की बहुत बढ़ियाँ.

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    कोटिशः धन्यवाद, आपलोगों का समर्थन और माँ वाग्देवी की कृपा है|

Vandana Baranwal के द्वारा
October 12, 2012

आदरणीय चातक जी, बढ़िया आलेख एवं सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ ब्लागर बन्ने के लिए हार्दिक बधाई. सभी समस्याओं की जड़ में देश में मची लूट है,

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    वंदना जी, सादर अभिवादन, आप सभी का स्नेह और माँ वाग्देवी की कृपा है| ब्लॉग पर सकारात्मक राय प्रकट करने का हार्दिक धन्यवाद!

ANAND PRAVIN के द्वारा
October 12, 2012

आदरणीय चातक भाई, नमस्कार सबसे पहले तो बेस्ट ब्लॉगर बनने के लिए बधाई…………. नक्सलवाद पर आपकी लेखनी का मैं समर्थन करता हूँ………..किन्तु पूरी सच्चाई सिर्फ सिर्फ नेतागिरी ही नहीं बहुत गहरी चालों का एक समुन्द्र भी है इसके पीछे ………..जो भी हो उचित कदम उठने चाहिए सुन्दर लेख के लिए बधाई

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    स्नेही आनंद जी, सादर अभिवादन, आपका वैचारिक समर्थन पाकर बहुत ख़ुशी हुई अब वक्त है जब चालों और खेलों को बेनकाब किया जाए और ये युवा ही कर सकता है| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

Santosh Kumar के द्वारा
October 12, 2012

आदरणीय चातक जी ,.सादर नमस्ते पूर्ण शुद्धिकरण का नाद अवश्य होना चाहिए ,..नक्सलवाद का बीज कहना शायद गलत होगा लेकिन हालात विकराल हैं ,..चंद सत्ताधीश पूरे देश को नचा रहे हैं ,…..विचारोत्तेजक लेख के लिए हार्दिक अभिनन्दन ,…सम्मान मिलने पर बहुत बहत बधाई ..सादर

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    स्नेही संतोष जी, सादर अभिवादन, अमृत निकलने से पहले हलाहल निकलना नियति है, हलाहल निकल रहा है तो संकेत अच्छे हैं जरूरत है इसे पीने का साहस करने की| आशा है जल्द परिवर्तन होगा| हार्दिक धन्यवाद!

    santosh kumar के द्वारा
    October 13, 2012

    आदरणीय चातक जी ,.सादर अभिवादन आपकी सारगर्भित और आशावादी प्रतिउत्तर से मन खुश हुआ ,…जीवनदायी अमृत के लिए हलाहल पान जरूरी है ,..कृपया प्रस्तुत कीजिये समर्पित मूरख तैयार है ,…सादर

    chaatak के द्वारा
    October 13, 2012

    स्नेही संतोष जी, सादर अभिवादन, अब बहुत देर नहीं है संभवतः आने वाली दो तीन पोस्ट्स में किसी एक में इस हलाहल को पीने का आमंत्रण भी होगा, सभी शिव-भक्त तैयार रहें; मैं अभी निरंतर महादेव से रार में व्यस्त हूँ :) एक बार फिर हार्दिक धन्यवाद!

shashibhushan1959 के द्वारा
October 12, 2012

आदरणीय चातक जी, सादर ! सम्मान प्राप्ति के उपलक्ष्य में हार्दिक बधाई ! जिस दिन इन चोरों का बड़ा गर्क होगा, उस दिन भरपेट मिठाई !

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    आदरणीय शशिभूषन जी, सादर अभिवादन, आप वरिष्ठों के आशीर्वाद से सम्मान प्राप्त हुआ है| जिस दिन इन चोरों का बेडागर्क होगा वह पूरे देश के लिए जश्न का दिन होगा| हार्दिक धन्यवाद !

deepasingh के द्वारा
October 12, 2012

चातक जी वन्दे मातरम, सर्वप्रथम बेस्ट ब्लॉगर l बनने पर हार्दिक बधाई.कभी समय था जब राजनीति में जाना समाज सेवा में जाने से संबोधित किया जाता था. कभी इस देश में ऐसे नेता भी थे जो राजनीति में समाज सेवा के लिय जाया करते थे. परन्तु आज राजनीति स्वयम की सेवा का मंच बन गया हे जहाँ नेता समाज की सेवा करने की बजाय अपने लिय सेवा करते हे.किस प्रकार इस देश को नोचकर अपनी जेबे भरी जाय यही उनका लक्ष्य हो गया हे जिसके लिय वो दिन रात प्रयासरत रहते हे. जनता मरती हे मरती रहे अगर जनता आवाज़ उठाय तो उसे दबाया जाता हे.

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    दीपा जी, सादर वन्देमातरम, आपकी राय से पूर्ण इत्तेफाक रखते हुए कहूँगा कि जिस दिन युवाओं की सोच आपकी तरह हो जायेगी आमूल-चूल परिवर्तन को तभी हकीकत की जमीन पर उतारा जा सकेगा| इतने अच्छे ब्लागरों के बीच चुना जाना अच्छा लगता है और ये आप लोगों का स्नेह और माँ वाग्देवी की कृपा है| ब्लॉग को अपना बहुमूल्य समय देने और उत्साहवर्धन करने का हार्दिक धन्यवाद!

yogi sarswat के द्वारा
October 12, 2012

चातक जी, सादर नमस्कार ! आपके इस ब्लॉग से पूर्ण सहमति है.दरअसल समस्या का समाधान जब प्रशासनिक तौर पर नहीं हो पाता तो समस्या ग्रसित लोग हथियार उठा लेते हैं.ज़रूरत है प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर सामंजस्य,तालमेल,पारदर्शिता की (मिले सुर मेरा तुम्हारा)पर यहाँ तो बस अपनी अपनी ढपली;अपना अपना राग हो रहा है.यही विखंडन समाज के अवमूल्यन का मुख्य कारण है. कुछ तो मजबूरियां रही होंगी कोई यूँ ही बेवफा नहीं होता !! ब्लोगर ऑफ़ द वीक बनने पर बहुत बहुत बधाई !

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    स्नेही योगी जी, सादर अभिवादन, आपका वैचारिक समर्थन पाकर बहुत ख़ुशी हुई काश कि समस्याओं का राजनीतिकरण करें के बजाय एक ईमानदार प्रयास समस्या को हल करने के लिए किया जाए! प्रतिक्रिया और उत्साहवर्धन का हार्दिक धन्यवाद!

R K KHURANA के द्वारा
October 12, 2012

प्रिय चातक जी, सप्ताह का ब्लागर बनने पर लाख लाख बधाई राम कृष्ण खुराना

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    आदरणीय खुराना जी, सादर अभिवादन, आपको हार्दिक धन्यवाद!

Tufail A. Siddequi के द्वारा
October 12, 2012

आदरणीय चातक जी, सादर अभिवादन! ‘बेस्ट ब्लोग्गर ऑफ़ द वीक’ चुने जाने पर हार्दिक बधाई!

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    स्नेही तुफैल जी, सादर अभिवादन, बंधु को भी हार्दिक धन्यवाद!

vasudev tripathi के द्वारा
October 11, 2012

चातक जी, निश्चित रूप से राजनैतिक आतंकवाद नक्सलवाद जैसी समस्यायों के लिए काफी सीमा तक उत्तरदायी है किन्तु फिर भी नक्सलवाद को मात्र आम आदमी के भ्रष्ट तंत्र के विरुद्ध आक्रोश की संज्ञा नहीं दी जा सकती.! नक्सलवाद निश्चित रूप से आतंकवाद है जिसे किसी भी तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता|| राजनैतिक तानाशाही से मुक्ति का मार्ग जनता की जागरूकता से होकर ही जाता है, जनता की मानसिकता को इन्हीं नेताओं द्वारा बंधक बनाकर रखा गया है जिसे मुक्त कराना होगा तभी सार्थक परिवर्तन हो सकता अन्यथा नक्सलवाद तो पैदा हो सकता है राष्ट्र रक्षक क्रान्ति नहीं..!! ब्लॉगर ऑफ़ द वीक के सम्मान के लिए हार्दिक बधाइयाँ|

    chaatak के द्वारा
    October 12, 2012

    स्नेही वासुदेव जी, सादर अभिवादन, नक्सलवाद पर आपकी राय काफी हद तक सही प्रतीत होती है लेकिन ये समस्या हमारे अपने शरीर में होने वाले किसी रोग की तरह है जिसे सुधारने के लिए अब अंग को काटना पड़ेगा| ये गलत भी ना होता और पीड़ादायक भी यदि रोग स्वमेव होता हमें अपना ही अंग भंग करना पड़ रहा है क्योंकि इसे जानबूझ कर सडाया गया है इसलिए जितना आवश्यक ये है कि अंग को काटा जाए उससे भी ज्यादा आवश्यक है कि उन लोगों के हाथों को काटा जाए जिन्होंने व्यक्तिगत हित के लिए अंगों में विकार पैदा किये वर्ना ईलाज का क्या फायदा एक अंग काटिए तो दूसरे को विकृत कर दिया जाएगा| आपकी दूसरी बात कि पहले सवा अरब जनता को जागृत, शिक्षित और समर्थ बनाया जाय फिर राजनीतिक आतंकवाद से मुक्ति मिलेगी किसी यूटोपियन कहानी से कम नहीं| और यदि ऐसे समाज का निर्माण किया जाए तो कैसे जबकि सारी नीतियां ये आतंकवादी ही बनाते हैं| सभी समस्याओं को दरकिनार मान कर ये असंभव, संभव भी बना लिया जाय तो सवाल ये है कि देवदूतों के उस देश में शासन और प्रशासन की आवश्यकता ही क्या है| ब्लॉग पर प्रतिक्रिया द्वारा इसे एक और आयाम प्रदान करने का हार्दिक धन्यवाद!

surendr shukl Bhramar5 के द्वारा
October 11, 2012

प्रिय चातक जी, जय श्री राधे ‘बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक’ चुने जाने पर हार्दिक बधाई…. हिन्दुस्तानियों के दिल पर क्या गुजरती होगी जब उनके द्वारा चुने गए नेता भारत की जनता और भारत माता में अपनी निष्ठा की बात न कहकर व्यक्ति विशेष में अपनी निष्ठा का ढोल पीटता है? सरकार और नेता को क्या पता की जन साधारण के भी दिल होता है जान होती है घर और परिवार ..बच्चों के सपने …. ये तो सब सीमाए लांघ जा रहे हैं वही कहावत वर मरे या कन्या इनको बस दक्षिणा से मतलब है ….. शानदार आलेख भ्रमर ५

    chaatak के द्वारा
    October 11, 2012

    स्नेही भ्रमर जी, सादर अभिवादन, पोस्ट पर आपकी राय जानकर बहुत ख़ुशी हुई, हार्दिक धन्यवाद !

sudhajaiswal के द्वारा
October 11, 2012

आदरणीय कृष्ण जी, सादर अभिवादन! आप बहुत बार बेस्ट ब्लॉगर बने होंगे पर मैंने आज पहली बार देखा, बहुत-बहुत ख़ुशी हुई| हार्दिक बधाई!

    chaatak के द्वारा
    October 11, 2012

    स्नेही सुधा जी, सादर अभिवादन, जे०जे० पर इतने अच्छे ब्लॉगर हैं कि ये मौका बार-बार मिलना बड़ा मुश्किल होता है मेरे लिए शायद ये दूसरा मौका है और इस सम्मान को मैं आप लोगों का स्नेह और माँ वाग्देवी का आशीर्वाद कहूँगा| आपकी इतनी अच्छी प्रतिक्रिया पाकर बहुत ख़ुशी हुई| हार्दिक धन्यवाद!

jlsingh के द्वारा
October 11, 2012

आदरणीय चातक जी, सादर अभिवादन! ‘बेस्ट ब्लोग्गर ऑफ़ द वीक’ चुने जाने पर हार्दिक बधाई!

    chaatak के द्वारा
    October 11, 2012

    आदरणीय जे०एल० सिंह जी, सादर अभिवादन, सब आप बंधुओं का स्नेह और माँ वाग्देवी का आशीर्वाद है| हार्दिक धन्यवाद!

Dr. H. C. Singh के द्वारा
October 11, 2012

बेस्ट ब्लॉगर बनाने के लिए बधाई.

    chaatak के द्वारा
    October 11, 2012

    बहुत-बहुत धन्यवाद!

mishraamrish के द्वारा
October 11, 2012

बहुत बढ़िया

    chaatak के द्वारा
    October 11, 2012

    कोटिशः धन्यवाद!

Santlal Karun के द्वारा
October 11, 2012

चातक जी, पूरा आलेख कथ्य की सफल लक्ष्य-साधना के साथ प्रस्तुत किया गया है | ईश्वर से प्रार्थना है कि आप की भविष्यवाणी सच साबित न हो, पर भविष्य के गर्भ में पल रहे भारतीय नेताओं के सामूहिक बलात् अपकर्म के परिणामी, राष्ट्रनाशक गर्भपिण्ड की थाह आप ने अवश्य ले ली है | इतने लघु कलेवर में वर्तमान भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी विसंगति को भली भाँति स्पष्ट कर देना– गागर में सागर भरने-जैसा है | इतने मर्मवेधी तथ्य-कथ्य के अत्यंत पठनीय प्रस्तुतीकरण और Best Blogger of the Week के लिए हार्दिक बधाई व साधुवाद !

    chaatak के द्वारा
    October 11, 2012

    आदरणीय संतलाल जी, सादर अभिवादन, आपने ब्लॉग पर आशीर्वाद देकर अभिभूत कर दिया सब आप स्नेही वरिष्ठों और माँ वाग्देवी का आशीर्वाद है| प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन का हार्दिक धन्यवाद!

manoranjanthakur के द्वारा
October 11, 2012

लेखनी , जानकारी , विषयबस्तु सब उत्तम …. ब्लॉगर बनना सर्वोतम … बधाई

    chaatak के द्वारा
    October 11, 2012

    स्नेही मनोरंजन जी, सादर अभिवादन, सब आप बंधुओं का स्नेह और माँ वाग्देवी का आशीर्वाद है| प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन का हार्दिक धन्यवाद!

yamunapathak के द्वारा
October 11, 2012

चातक जी aapke is blog se purna सहमति है.दरअसल समस्या का समाधान जब प्रशासनिक तौर पर नहीं हो पाता तो समस्या ग्रसित लोग हथियार उठा लेते हैं.ज़रूरत है प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर सामंजस्य,तालमेल,पारदर्शिता की (मिले सुर मेरा तुम्हारा)पर यहाँ तो बस अपनी अपनी ढपली;अपना अपना राग हो रहा है.यही विखंडन समाज के अवमूल्यन का मुख्य कारण है. साभार

    chaatak के द्वारा
    October 11, 2012

    यमुना जी, सादर अभिवादन, शासन और प्रशासन की सांठ-गाँठ पर बिलकुल सही जुमले का प्रयोग किया है आपने आपकी राय जानकर बहुत ख़ुशी हुई| प्रतिक्रिया द्वारा वैचारिक सहमति का हार्दिक धन्यवाद!

utkarsh singh के द्वारा
October 10, 2012

आपके निष्कर्ष से पूर्णरूप से सहमत हूँ | अपने कई लेखों में मैने इस ओर संकेत भी किया है | हमारा राजनीतिक नेत्रित्व दरसल एक विशिष्ट वर्ग में तब्दील होता जा रहा है जिसका हित जनता के हितो से पूर्णतया भिन्न है | नक्सलवाद सिर्फ भ्रष्ट राजनीतिक वर्ग का ही नही सामंतवादी सामाजिक मान्यताओं के भी विरुद्ध है उदाहरण के लिए बिहार जहा इसने दलितों की लड़ाई लड़ी| बंधुआ मजदूरी के विरुद्ध आवाज उठाई | पर तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश का माडल यह बताता है की इस लड़ाई को संवैधानिक तरीके अपना कर भी लड़ा जा सकता है |

    chaatak के द्वारा
    October 11, 2012

    स्नेही उत्कर्ष जी, ब्लॉग पर आपकी राय और सहमति जानकर बेहद ख़ुशी हुई, प्रतिक्रिया द्वारा बिंदु पर प्रकाश डालने का हार्दिक धन्यवाद!

ashishgonda के द्वारा
October 10, 2012

आदरणीय गुरूजी! सादर चरण स्पर्श, बहुत ही गंभीर आलेख, जैसा कि सब जानते हैं कि आपकी लेखन गद् और पद्य दोनों तरफ बखूबी चलती है, परन्तु इस लेख में आपकी लेखनी अपने निर्भीकता का परिचय देती हुई अलग इतिहास स्थापित कर रही है. आतंकवाद और भ्रष्टाचार कैसे मिटेगा जब इसे मिटने वाले खुद भ्रष्ट हों? यही हालत नक्सलवाद का भी है, आखिर क्यों उनके लिए कोई कठोर कानून नहीं बनाया जा रहा? कृपया मेरी भी एक रचना पढ़े “एक अधूरी प्रेम-कथा”- http://ashishgonda.jagranjunction.com/2012/10/08/%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE/

    chaatak के द्वारा
    October 11, 2012

    आशीष जी, सस्नेह आशीर्वाद, इस गंभीर विषय पर आपकी राय जानकर बेहद ख़ुशी हुई| युवा अभी भी नहीं जागेगा तो ये नेता हर युवा को नक्सली और आतंकी बनाकर छोड़ेंगे| मैंने तो सिर्फ इनके आतंक की ओर इशारा मात्र किया था और कल ही हमारे अपने शहर के मंत्री विनोद कुमार उर्फ़ पंडित सिंह जी ने घृणित आतंकी कार्यवाही को अंजाम दिया हालत ये हैं की गोंडा में इस समय एस० पी०, डी० एम् और सी० एम० ओ० सभी इस राजनीतिक आतंकवाद के डर से छुट्टी पर चले गए हैं| ये है असली आतंकवाद! मैंने पहले भी समस्या नाम से एक ब्लॉग लिखकर सूबे की मुख्यमंत्री से गुजारिश की थी कि पूर्व जिलाधिकारी श्री राम बहादुर जी को दुबारा गोंडा में भेजा जाए क्योंकि जनता को राजनीतिक आतंक से बचाने का काम सिर्फ वे ही कर सकते हैं लेकिन सत्ता में आते ही ब०स०पा० के फैसलों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित मुख्यमंत्री जी को जनता की आवाज सुनाई ही नहीं पड़ी| अब जनता स्वयं फैसला करे कि उसे क्या चाहिए, राजनीतिक आतंकवाद या न्याय| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

    ashishgonda के द्वारा
    October 12, 2012

    आदरणीय गुरूजी! सादर चरणस्पर्श, सबसे पहले तो आपको दूसरी बार “बेस्ट ब्लोगेर ऑफ द वीक” चुने जाने पर हार्दिक बधाई, और माँ सरस्वती और माँ हिंदी से यही प्रार्थना है कि ये सिलसिला आगे भी जारी रखें. मुझे भी मंत्री विनोद कुमार उर्फ़ पंडित सिंह जी के शर्मनाक कारनामो की जानकारी हुई थी, आपकी उस पोस्ट को भी पढ़ा था जिसमे आपने आदरणीय श्री रामबहादुरजी को पुनः गोंडा में लाने की मांग की थी, तब भी मेरी पूर्ण सहमति थी और अब तो और ज्यादा इच्छा है इन डरपोक लोगो के बीच एक सच्चा शेर तो आये.पदवी की द्रष्टि से शेर तो ये भी जो डर के भाग गए तभी तो किसी की पंक्तियाँ याद आ गईं- “दिखाओ चाबुक तो सलाम करते हैं, ये वे शेर हैं जो सर्कस में काम करते हैं…”

shashibhushan1959 के द्वारा
October 10, 2012

आदरणीय चातक जी, सादर ! आप इसे नक्सलवाद न कहें ! यह जनविद्रोह है, जिसे सरकारी अमला नक्सलवाद की संज्ञा दे देता है ! अभी तक तो यह कुछ ही क्षेत्रों में है, पर अब लगता है कि इन नेताओं के कारनामों से यह विस्तृत होकर सम्पूर्ण देश में फ़ैल जाएगा ! अभी कल “आजतक” चैनल पर एक खबर दिखाई जा रही है, जिसमें क़ानून मंत्री सलमान खुर्शीद और उनकी पत्नी के घृणित काले कारनामों को उजागर किया जा रहा है ! इन नीचों ने मासूम, बेबस विकलांगों के हिस्से का पैसा जाली कागजात बनाकर जिस ढंग से हडपा है, उसे देखकर तो यहीं लगता है कि हम वास्तव में जंगल राज में जी रहे हैं ! मंत्री क़ानून का…….. और काम गैरकानूनी ! थू……..थू…….!!!!! सोनिया के दामाद कि कथा से सभी अवगत हो चुके हैं ! घोटालों की लिस्ट इतनी लम्बी होती जा रही है कि आप को याद रखना मुश्किल है, फिर भी ये बेशर्म सीना ताने गद्दी पर बैठे हैं, और हम बेबस हैं ! हालात ऐसे हैं कि अब यह सोचना पड़ रहा है कि जनता जन विद्रोह क्यों न करे ? सादर !

    chaatak के द्वारा
    October 10, 2012

    आदरणीय शशिभूषण जी, सादर अभिवादन, आपकी राय से मैं अक्षरशः सहमत हूँ, राजीति अब सिर्फ नाम की राजनीति है कम-से-कम हमारे देश में तो ये बाकायदा एक संगठित आतंकवाद है जो हर विरोध को नक्सलवाद, उग्रवाद और आतंकवाद की संज्ञा देकर हुकूमत पर अपना दावा पक्का करने की फिराक में रहता है| एक संजीदा और सटीक टिप्पड़ी के लिए हार्दिक धन्यवाद!

Dhavlima Bhishmbala के द्वारा
October 8, 2012

चातक जी, इन राजनेताओं कि राजनीति के बारे में जितना भी सोचा जाये और जितने भी कटाक्ष वार किये जाये शायद फिर भी कम ही होगा, बहुत ही अफ़सोस कि बात है कि अपने ही घर को नोचने केलिए अपने ही खड़े हुए है | बहुत ही अच्छा प्रहार किया है आपने राजनीति के क्षेत्र में | बहुत-बहुत बधाई |

    chaatak के द्वारा
    October 8, 2012

    धवलिमा जी, सादर अभिवादन, बहुत सही पहचाना आपने इन राजनेताओं को गैंडे से मोटी खाल है इनकी और आँखों में सूअर का बाल चाहे जितने कटाक्ष करो चाहे जितनी निंदा करो ये तटस्थ रहकर सिर्फ नोचने-खसोटने और लड़वाने में लगे रहते हैं| इनके कान पर जूँ नहीं रेंगती| प्रतिक्रिया द्वारा राय व्यक्त करने का हार्दिक धन्यवाद!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 8, 2012

प्रिय चातक जी, सस्नेह में भी इसी समस्या के बारे में मंथन कर रहा हूँ. आपका लेख सराहनीय है. बधाई.

    chaatak के द्वारा
    October 8, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, सादर अभिवादन, आप भी इसी समस्या पर मंथन कर रहे हैं ये जानकर ख़ुशी हुई| हमें किसी भी तरह से इस समस्या की जड़ को खोदना पड़ेगा वर्ना राजनीतिक आतंकवाद इस विषवृक्ष को हर घर में रोपने से नहीं चूकेगा| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

sudhajaiswal के द्वारा
October 8, 2012

आदरणीय कृष्ण जी, सादर अभिवादन! शिक्षित वर्ग की आधी आबादी तो भ्रष्टाचार में लिप्त है, जरूरत इस बात की है कि जो लोग देशहित के लिए जागरूक हैं वो एकजुट होकर जागरूकता फैलाएं तभी परिवर्तन होगा | बहुत ही उपयोगी और सार्थक लेख के लिए बहुत बधाई!

    chaatak के द्वारा
    October 8, 2012

    सुधा जी, सादर अभिवादन, आपकी राय से सहमत हूँ और चाहता हूँ कि हर नागरिक अपने नागरिक होने का फ़र्ज़ पहले निभाये और अधिकारों की बात बाद में करे और इसको शुरुआत राजनेता करें ना कि जनता| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
October 8, 2012

चातक जी ,प्रणाम ,बहुत ही अच्छा आलेख ,और चेतावनी भबिष्य की बहुत खूब ,आभार यह इस समय इसका आगज हो चुका है ,,,,,,,,,,,,,,,, मैं इसी असंतोष को नक्सलवाद के बीज के रूप में देखता हूँ जो आगे चलकर बहुत ही विकराल रूप ले सकता है। ये राजनीतिक आतंकवाद यदि इसी तरह जारी रहा तो विस्फोट बहुत दूर नहीं है, असंतोष यदि ब्रिटेन में राजा और रानी का सार्वजानिक क़त्ल करवा कर कामनवेल्थ की स्थापना कर सकता है तो हिन्दुस्तान में पूर्ण शुद्धिकरण का नाद करके लोकतांत्रिक-अधिनायक की व्यवस्था भी दे सकता है।

    chaatak के द्वारा
    October 8, 2012

    स्नेही अनुराग जी, सादर अभिवादन, आपकी राय भी मेरे जैसी है ये जानकर बहुत ही ख़ुशी हुई, वैचारिक समर्थन का हार्दिक धन्यवाद!

drbhupendra के द्वारा
October 8, 2012

चातक जी मैं तो खुद ही नक्सल प्रभावित इलाके का रहने वाला हूँ… नक्सलवादी लोग अपने स्वप्रेरणा से कभी भी नहीं बनाते , लोगो के अन्दर असंतोष तो हैं पर इतना भी नहीं की वो खुद हथियार उठा ले … लोगो के असंतोष का लाभ उठाकर उनके हाथ में हथियार पकडाने वाले बहुतेरे हैं. वो डरे लोगो को और भयभीत करते है और हथियार थमा देते है… सरकार को इन इलाको का समुचित विकास करने से पहले इन लोगो को ख़तम करना आवश्यक है ..क्योकि ये इतने दुष्ट होते है की उन इलाको का विकास होने ही नहीं देते नै तो इनकी नेता गिरी ख़तम हो जाएगी.. एक उदाहरण आपको देता हु.. सरकार ने भूकंप से बचने के लिए अष्टाकार आकृति में प्राथमिक पाठशालाओ का निर्माण शुरू किया तनइन्होने जोर शोर से ये बात लोगो में फैलाई की अब चौकोर पाठशालाओ के जगह ये अष्टाकार इसलिए बन रहे है ताकि इनमे आकर सैनिक रहे और एक साथ आठ दिशाओं में लोगो के ऊपर गोली चला सके … और लोग भी अपने यहाँ पाठशाला बनाने का विरोध करने लगे..इसी तरह पक्की सड़क बनाने की बात हुई तो इन लोगो ने कहा की पक्की सड़क बन जाने से ये पुलिस वाले बड़े आराम से यहाँ गाँव में आने लगेंगे और अत्याचार करेंगे सो लोगो ने सड़क बनाने का विरोध कर दिया … इनको आगे समाप्त किया जाय … फिर विकास या न्रेत्रित्व परिवर्तन बदलने की बात करना सार्थक है ..

    chaatak के द्वारा
    October 8, 2012

    स्नेही डॉ. भूपेन्द्र जी सादर अभिवादन, आपकी बात अक्षरशः सही है नक्सलवाद का एक ही इलाज है और वो है इनका पूर्ण दमन लेकिन ये आधा इलाज ही है एक संगठन ख़त्म होगा तो दूसरा उठ खड़ा होगा क्योंकि इनको हथियार पकड़ने पर मजबूर करने वाले हाथों की भी कमी हैं है| नक्सलवाद को समाप्त करने से भी पहले जरूरी है कि उन राजनीतिक आतंकवादियों का पूरा सफाया होना चाहिए जो इन्हें हथियार देते हैं या फिर उठाने पर मजबूर करते हैं| प्रतिक्रिया द्वारा एक सही राय से अवगत कराने का हार्दिक धन्यवाद!

jlsingh के द्वारा
October 7, 2012

आज इस देश की जनसँख्या का एक बहुत बड़ा युवा तबका राजनीति की दशा और दिशा पर निगाह रखता है और हर रोज उसका असंतोष बढ़ता जाता है, मैं इसी असंतोष को नक्सलवाद के बीज के रूप में देखता हूँ जो आगे चलकर बहुत ही विकराल रूप ले सकता है। ये राजनीतिक आतंकवाद यदि इसी तरह जारी रहा तो विस्फोट बहुत दूर नहीं है, असंतोष यदि ब्रिटेन में राजा और रानी का सार्वजानिक क़त्ल करवा कर कामनवेल्थ की स्थापना कर सकता है तो हिन्दुस्तान में पूर्ण शुद्धिकरण का नाद करके लोकतांत्रिक-अधिनायक की व्यवस्था भी दे सकता है। वो दिन कब आयेगा ? स्नेही चातक जी, नमस्कार! आप ने सही चिंता जाहिर की है, पर कोई तो होना चाहिए बिगुल फूंकनेवाला … एक एक कर सभी धराशायी होते जा रहे हैं …. अन्ना का आन्दोलन, स्वामी रामदेव की रैली … और अब मोदी जी की हुंकार और इंकार ….. चिंगारी हर आम आदमी के मन में है उसे ज्वाला बनाने वाला कोई तो चाहिए? Rate this Article:

    chaatak के द्वारा
    October 8, 2012

    स्नेही जे०एल० सिंह जी, सादर अभिवादन, यदि हर रोज विकराल बनता जा रहा राजनीतिक आतकवाद जल्द समाप्त न हुआ तो वह दिन भी दूर नहीं है जब पूर्ण शुद्धिकरण का नज़ारा देखने को मिलेगा, चिंगारी को शोला बनाने के लिए हर प्रयत्न ये राजनीतिक आतंकवादी स्वयं कर रहे हैं, सही कहते हैं – जब सियार की मौत आती है तो वह शहर की ओर भागता है| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!


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