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बलात्कारी सिपाही

Posted On: 6 Sep, 2012 Others में

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ब्लॉग नहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से गुजारिश है यहाँ मैंने अपनी राय नहीं अपने शहर, अपने गाँव की व्यथा और प्रदेश सरकार से अपेक्षा लिखी है। इसमें सजावट नहीं, बनावट नहीं, विद्वता और समझदारी नहीं सिर्फ नग्न हकीकत को कहने वाले शब्द है। क्योंकि आज एक गाँव निःशब्द है, क्षोभ में डूबा है, हमें क़ानून को अपने हाथ में ना ले पाने का मलाल है !


०५ सितम्बर २०१२ दिन बुधवार सुबह का समय


एक १२ वर्षीय बालिका अपने भाई को स्कूल छोड़कर लौट रही थी। रास्ते में सिपाही (सुनील तिवारी) जिसकी तैनाती बलरामपुर जिले में है (इस कुकर्मी के पिता भी बलरामपुर में ही कोतवाली में मुंशी के पद पर तैनात हैं ) ने बालिका को जबरदस्ती रोक लिया। बालिका को पास की झाडी में ले जाकर उससे बलात्कार किया। जब अस्त-व्यस्त हालत में कुकर्मी झाड़ियों से निकल रहा था तभी उधर से गुजर रहे ग्रामप्रधान और उनके कुछ साथियों की नज़र उस पर पड़ी। उन्हें वहीं पर पड़ी लेडीज़ सायकिल को देखकर उस पर शक हुआ और सिपाही को दबोच लिया गया, धुलाई होने पर सिपाही ने सच उगला। बालिका की दशा देखकर लोगों का पारा चढ़ा। कुकर्मी ने पुलिसिया रोब दिखाना शुरू किया जिसपर ग्रामीणों ने उसे लात-जूतों पर रख लिया। कुछ लोग बालिका (बेहोशी की स्थिति में) को अस्पताल लेकर भागे और थोड़ी ही देर में कोतवाली नगर की पुलिस भी वहां पहुँच गई। अपराधी के साथ-साथ गाँव वाले भी कोतवाली पहुंचे। थोड़ी देर में कुकर्मी सिपाही के पिता लक्ष्मीकान्त तिवारी भी ५०,०००/- रुपया लेकर मामला निपटाने पहुँच (एक पुलिसवाले को अच्छी तरह पता होता है कि किस अपराध के लिए पुलिस कितने पैसों में बिकती है ) गए; लेकिन ये देखकर आक्रोशित गाँव वाले जब कुकर्मी के पिता को कोतवाली में ही जूतों पर रख लेने को आमादा हो गए तो स्टाफ धर्म निभाते हुए कोतवाली के सिपाहियों ने बाप को वहां से टरका दिया।


बच्ची की हालत गंभीर हैं महिला अस्पताल के सी.एम्.ओ. ने बलात्कार की पुष्टि कर दी हैं लेकिन प्रश्न ये है कि इन पुलिसिया दानवों की करतूतों का बोझ गोंडा की जनता कब तक उठाएगी?


उपरहितन पुरवा गाँव में (जहाँ ये घटना घटित हुई थी) आज मातम का माहौल है, सभी पछता रहे हैं कि कुकर्मी कोतवाली कैसे पहुँच गया? मौके पर ही हिसाब पूरा क्यों नहीं कर पाए हम? आखिर जब वह सिपाही बच्ची को रस्ते में रोक रहा था तब हममे से कोई उधर से क्यों नहीं गुजरा? ना जाने कितने पछतावे हैं जो पूरा गाँव कर रहा है।


गोंडा में पुलिसिया गुंडागर्दी चरम पर है और इसका कारण है प्रदेश की सपा सरकार जिसके सफेदपोश यहाँ मंत्री और विधायक बने बैठे हैं और बेनी बाबू जिन्होंने गोंडा में सुशासन देने वाले िलाधिकारी श्री राम बहादुर जी को पहले ही नपवा दिया। बचे थे सिर्फ नगर कोतवाल श्री भरतलाल यादव जी जिन्हें इन बलात्कारी पोषक नेताओं ने जिला बदर कर दिया ताकि इनके गुंडे और पुलिसिया चाटुकार खुलेआम जघन्य अपराधों को अंजाम दे सकें। उपरोक्त दोनों अधिकारियों के हटते ही जिले में अपराधों की बाढ़ सी आ चुकी है। खासकर बेंदाज़ हुई है पुलिस जिसने सारे नियम कानून ताक पर रख दिए हैं।


इस ब्लॉग के माध्यम से मैं उत्तर प्रदेश के मुख्य-मंत्री श्री अखिलेश यादव जी से ये कहना चाहूँगा कि वे ना सिर्फ ऐसे मामलों का संज्ञान लें बल्कि हमारे शहर में बढ़ रहे पुलिसिया आतंक को रोकने के लिए पूर्व जिलाधिकारी श्री राम बहादुर जी को और नगर कोतवाल श्री भरतलाल यादव वापस गोंडा में तैनात करें। सत्ता के लालच में अच्छे अधिकारियों को हटाने की कुत्सित नीति यदि युवा भी करने लगे तो जनता के आक्रोश को ना तो आपके मंत्री संभाल पायेगे और न ही उनके टुकड़ों पर भौंकने और काटने वाले अपराधी।

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53 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Anil Saxena के द्वारा
October 16, 2012

चातक जी , पुलिस वाला बेख़ौफ़ वैसे ही नहीं हो जाता. जब तक उसे किसी बड़े नेता या अफसर का संरक्षण नहीं मिला होता है. आज शासन और प्रशासन मिलकर देश में कोहराम मचाये हुए है. आम जनता रो रही है लेकिन उसे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा . वैसे इस दुर्दशा के लिए मैं जनता को भी काफी हद तक जिम्मेदार मानता हूँ . क्यों नहीं दूसरे के दर्द को अपना दर्द समझती? क्यों संवेदनाएं मृत कर रखी है. जब अपने पर बीतती है तभी क्यों गला फाड़ती है. हमें संवेदनशील होना पडेगा. हमें व्यवस्था को करवट दिलानी पड़ेगी. भगवान् भी उन्ही का साथ देते है जो जीतने की आशा के साथ आगे बढते है. चातक जी मैं आपके सारे ब्लॉग पढ़ रहा हूँ . आपकी पैनी लेखनी मुझे कुछ न कुछ लिखने को मजबूर कर रही है. भगवान् आपकी लेखन धार बनाये रखे.

    chaatak के द्वारा
    October 17, 2012

    स्नेही अनिल जी, सादर अभिवादन, यु०पी० में तो स०पा० सरकार आने के बाद से बाकायदा सरकारी संरक्षण मिला है आताताइयों को, इनकी हिमाकत इतनी ज्यादा है कि इस बलात्कारी सिपाही का बाप अगले ही दिन प्रधान जी की गवाही तोड़ने के लिए उनके घर पैसा लेकर पहुँच गया, बदतमीज को देशी गालियाँ और जूते चप्पल लेकर खदेड़ना पड़ा| जनता जिम्मेदार है इस बात पर मुझे शक है हाँ व्यवस्था को करवट दिलाने वाली बात बिलकुल सही है| आप मेरे ब्लॉग पढ़ रहे हैं ये जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई, मैं आपके ब्लॉग का इन्तजार करूंगा, मेरी हार्दिक इच्छा है कि युवा जागृत हो और हर क्षेत्र में हर आयुध के साथ राष्ट्र सेवा में मुखर होकर सामने आये| कलम एक बेहतरीन आयुध है बशर्ते इसका इस्तेमाल सावधानी और जिम्मेदारी से किया जाय| शुभकामनाएं!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
September 25, 2012

कुत्तों की कमी नहीं है. बधाई, आदरणीय चातक जी, सादर

    chaatak के द्वारा
    October 17, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, सादर अभिवादन, आपकी बात बिलकुल सही है लेकिन ये तो कुत्तों और सूअरों से भी गए गुजरे हैं|

yamunapathak के द्वारा
September 15, 2012

चातक जी इस घृणित समस्या पर ही मैंने “उफ़ यह कैसी भूख”ब्लॉग लिखा था. ऐसा करने वाले ना तो कुछ विवेकपूर्ण पढ़ते हैं ना ही सोचते हैं .बस खुराफात भरे होते हैं दिल दिमाग में.

    chaatak के द्वारा
    September 15, 2012

    यमुना जी, आपकी राय बिलकुल सही है मैं सिर्फ इतना जोड़ना चाहूँगा कि ऐसे विकृत लोगों के लिए मानवाधिकार की भी बात नहीं होनी चाहिए इन्हें जानवरों से भी गई गुजरी श्रेणी में रखिये और पागल कुत्ते समझकर गोली मार दीजिये|

renukajha के द्वारा
September 14, 2012

श्रीमान जी, समझ में नही आता ये बिमारी इतनी ज्यादा क्यूँ संक्रामक होती जा राही है ईस समाज में ??????????????

    chaatak के द्वारा
    September 14, 2012

    रेणुका जी, ये बीमारी संक्रामक इसलिए है क्योंकि समाज को बिलकुल निरीह और बेदम कर दिया गया है क़ानून कितनों को न्याय देता है ये अदालतों में विचारधीन मामले बताते हैं| पुलिस किस कदर जनता की सेवा में मशगूल है वो हर रोज के अखबार बताते हैं| हम अभियोग तो समाज पर लगाते हैं लेकिन कभी ये भी सोचते हैं कि समाज को इस आयातित संविधान ने कितना बेबस बना रखा है? घटना पर आपकी संवेदनशील सोच सराहनीह है| हार्दिक धन्यवाद!

vishnu के द्वारा
September 12, 2012

चातक जी ऐसी बातो को सुनकर मन बहुत दुखी होता है और सोचता है ऐसी आजादी का क्या मतलब जिसमे हमारी लड़की और स्त्रियाँ सुरिचित न हों I जैसा सुना है की इससे तो अच्छा अंग्रेजो का शासन था कम से कम अपराध के आधार पर उसे सजा मिलती थी

    chaatak के द्वारा
    September 12, 2012

    स्नेही विष्णु जी, हिन्दुस्तान अब सिर्फ नाम का संस्कृतिवान रह गया है वास्तविकता ये है कि हम उस बुरे दौर से गुजर रहे है जहाँ शासन और प्रशासन हमें जानवर बना देना चाहता है जबकि न्याय व्यवस्था हमें मूक-बधिर बने रहे देखना चाहती है|

Mohinder Kumar के द्वारा
September 11, 2012

चातक जी, भयंकर स्थिति है जब बाड ही खेत को खाने लगे. ऐसे लोगों को न्याय के भरोसे न छोड कर तुरन्त सामाजिक सजा देनी चाहिये जो फ़ांसी से कम न हो.

    chaatak के द्वारा
    September 11, 2012

    स्नेही मोहिंदर जी, सादर अभिवादन, आपकी राय से पूर्ण इत्तेफाक रखते हुए ऐसे मामलों में समाज को क़ानून हाथ में लेने की छूट की सिफारिश मैं भी करता हूँ|

    September 15, 2012

    और समाज जो परदे की आड़ में आये दिन ऐसे घिनौने कामों को अंजाम दे रहा है उसको कौन सजा देगा………………. http://merisada.jagranjunction.com/2012/09/13/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9D-%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81-%E0%A4%9C/

    chaatak के द्वारा
    September 15, 2012

    अलीन जी, मुझे पूरा यकीन है आप समाज को तनिक भी नहीं समझते, बुरा करने वाले हमेशा असामाजिक (यानी जो सामाजिक नहीं होते) लोग करते हैं| यह भी संभव है कि आप किसी ऐसी जगह से ताल्लुक रखते हों जहाँ पर कायर और कुकर्मी समाज होगा अस्तु आपकी राय समाज के बारे में वैसी ही बन गई है| परिवेश का असर होना लाज़मी है और गंदे परिवेश में आदमी कब तक अपनी घुटन को दबाये! ऐसे में समाज को यदि कोई अच्छा कहेगा तो निश्चय ही पीड़ा होगी| आपके आंकलन से मैं इनकार नहीं कर सकता लेकिन मेरा अनुभव आपसे सर्वथा भिन्न है इसलिए मैं आपके अनुभव को सार्वभौम भी नहीं मान सकता| आशा है कि आप अपने आस-पास परिवेश को अच्छे समाज में ढलने की कोशिश करेंगे और कामयाब भी होंगे| हार्दिक शुभकामनाएं!

अजय यादव के द्वारा
September 10, 2012

आदरणीय चातक जी, सादर प्रणाम | आजकल रक्षक ही भक्षक बनते जा रहें हैं |नये भर्ती रंगरूट एवं दुष्ट पुलिस कर्मी पुलिस की मर्यादा को ताक पर रखकर इस तरह की अशोभनीय घटनाओं को अंजाम दे रहें हैं |छेड़खानी /बलात्कार /विना वजह मारपीट /हिंसा ,नशेखोरी आदि में लिप्त हैं | आपकी बात वा ब्लॉग के लिंक को मैंने प्रदेश के बड़े पुलिस अधिकारियो तक पहुचाने की कोशिश की हैं |

    chaatak के द्वारा
    September 11, 2012

    स्नेही अजय जी, सादर अभिवादन, आपकी बात से पूर्ण सहमति के साथ आपका हार्दिक आभार कि आपने ब्लॉग को उन लोगों तक पहुंचाया जिनके कान पर यदि जूँ भी रेंग गयी तो आने वाले समय में ऐसी जघन्य घटनाओं पर रोक लग जायेगी\

Chandan rai के द्वारा
September 10, 2012

चातक जी , ऐसे नृशंश कृत्यों की ना केवल भर्त्सना होनी चाहिय बल्कि तंत्र को आगे आकर कड़े कदम उठाने चाहिय , आज हम जब प्रगतिशील रस्ते पर बढ़ रहे है ,ऐसे दौर में हमारा चरित्र उतनी ही गिरावट की तरफ है ! एक महत्वपूर्ण बात यह है की कोई भी घटना अचानक नहीं होती , अत हमें अपने प्रियजन के साथ एक हद वैचारिक खुलापन रखा होगा जिससे हमें उसके साथ होने वाली किसी भी घटना से अभिनाग्य हो सके , स्कूली पाठयकर्म में कन्या आत्मरक्षा ,यौन शिक्षा को शामिल किया जाना चाहिय एक बेहतरीन लेख के लिए हार्दिक अभिनन्दन स्वीकारें !

    chaatak के द्वारा
    September 11, 2012

    चन्दन जी, आपकी बातों से पूर्ण सहमति है सिर्फ आखिरी अंश को छोड़कर| बलात्कार का सम्बन्ध ना तो रक्षा कौशल से हैं और ना ही यौन शिक्षा से बल्कित यौन शिक्षा तो ज्यादा घातक है| यदि बलात्कार को कोई शिक्षा रोक सकती है तो वह नैतिक शिक्षा है जो पुरुष को भी मिले और स्त्री को भी|

yogi sarswat के द्वारा
September 10, 2012

चातक जी, इस कुशाशन व गंदगी को अब हम आपको मिलकर ही साफ़ करना होगा..जब रक्षक ही भक्षक हो जाये तो जनता को क़ानून तो हाथ मैं लेना ही पड़ेगा

    yogi sarswat के द्वारा
    September 11, 2012

    इन शब्दों में ही अपनी बात कहना चाहता हूँ श्री चातक जी

    chaatak के द्वारा
    September 11, 2012

    स्नेही योगी जी, आपके मत से पूरी तरह सहमत हूँ| धन्यावाद!

Himanshu Nirbhay के द्वारा
September 10, 2012

चातक जी, इस कुशाशन व गंदगी को अब हम आपको मिलकर ही साफ़ करना होगा..जब रक्षक ही भक्षक हो जाये तो जनता को क़ानून तो हाथ मैं लेना ही पड़ेगा

    chaatak के द्वारा
    September 11, 2012

    स्नेही हिमांशु जी, मैं भी आपकी बात से पूरी तरह इत्तेफाक रखता हूँ| ऐसे क़ानून के लिए वही सम्मान उपयुक्त है जो असीम जी ने कार्टून में दिखाया है| हार्दिक धन्यवाद!

Lahar के द्वारा
September 9, 2012

प्रिय चातक जी सप्रेम नमस्कार कुछ दरिन्दे पुरे समाज को गन्दा कर रहे है ! आपने एक बेहद ही संवेदनशील मुद्दा उठाया ! आपकी बात मुख्यमंत्री तक जरुर पहुच गयी होगी |

    chaatak के द्वारा
    September 9, 2012

    स्नेही लहर जी, सादर अभिवादन, आशा है कि कानों तक पहुंची बात दिल पर भी असर करे ! हार्दिक धन्यवाद!

dineshaastik के द्वारा
September 8, 2012

चातक जी माफ करना. जनता जैसा बीज बोयेगी वैसा ही काटेगी। जनता को माया के भ्रष्टाचार से इनती परेशानी नहीं थी जितनी  की सापा के गुण्डों से होगी।

    chaatak के द्वारा
    September 8, 2012

    दिनेश जी, आपकी बात बहुत हद तक ठीक लगती है लेकिन ये सिक्के का सिर्फ एक पहलू है, जनता वही काटेगी, जो बोएगी, सही है; लेकिन नेता जो बोते है, वही क्यों नहीं काटते? क्या उनके लिए कहावतें बड़ा जाती हैं| माया का भ्रष्टाचार हो या सपा का गुंडाराज है तो संवैधानिक ही न? हम हर उस सत्ता से सवाल करेंगे जो स्वयं को संवैधानिक होने का दम भरेगी एक की गलती दूसरे की सफाई नहीं बन सकती| हम पब्लिक हैं, अदालत नहीं जो नजीरों के गुलाम और अंधे हों; हमें सब दीखता है, हम सब सुनते हैं| सिर्फ फैसला करने का अधिकार नहीं है, और अच्छा ही है| आपकी छोटी किन्तु सटीक प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद

    September 15, 2012

    आप दोनों के बीच में आने के लिए माफी चाहूँगा…………….. जनता कोई स्वर्ग से उतरी नहीं गयी………..और न ही प्रशासन और राजनीति नरक से …………ये सभी समाज के अंग है…………..आप और हम बेहतर जानते हैं समाज के घिनौले चेहरे को………….यह प्रशासनिक और राजनितिक समस्या नहीं …………..सामाजिक है……….! मैं तो कहता हूँ कि सामाजिक नहीं मानसिक है……..सब स्वार्थ, वर्चस्व और सत्ता की लड़ाई है…….! यह तो मामला बाहर आ गया पर ऐसे हजारों मामले जो हमारे द्वारा किये जाते हैं खुद यह समाज दबा देता हैं…………….सबको एक मौका चाहिए अपना हवश मिटाने का………….आज जरुरत है मानसिक और बौद्धिक विकास की जो हम करना चाहते नहीं……………..बस धर्म, न्याय, व्यवस्था, परंपरा के नाम पर अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हुए हैं………………हाँ जाते-जाते एक बात कहना चाहूँगा….वो ये कि मैं अपवाद की बात नहीं करूँगा परन्तु हकीकत से मुंह नहीं मोड़ जा सकता……….हो सकता है कि दिनेश और चटक अपवाद हो………..परन्तु मैं अपवाद नहीं क्योंकि मैं जनता हूँ और जनता को एक पर्दा चाहिए अपने सारे बुरे कर्मों को छुपाने का…………………….आसहा करता हूँ आप लोग मेरी बात समझ पाए होंगे…………….एक बार धन्यबाद देना चाहूँगा ऐसे समस्याएं उठाने के लिए………….अच्छा तो हम चलते हैं बहुत ‘काम” है अभी क्योंकि मैं जनता हूँ …………हाँ…………हाँ……………..हाँ………….. जाते-जाते एक ब्लॉग का लिंक दे रहा हूँ आप दोनों उसकी दो चार पोस्टिंग पढ़िए ………..अच्छा लगेगा यदि स्वार्थ, सत्ता और वर्चस्व से ऊपर जाकर कुछ देखना चाहें तो …………… http://pardeepneel.jagranjunction.com

    chaatak के द्वारा
    September 15, 2012

    स्नेही अनिल जी, आपके रोष को मैं भली भाँती समझता हूँ| बात इससे नहीं बनती की हम समाज या राजनीति की गंदगी का रोना रोयें बात इससे बनती है कि हम गंदगी को मिटाने के लिए कदम बाधाएं, अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठायें क्या फर्क पड़ता है कि हमारी आवाज़ अकेली हो; यदि लोग तैयार नहीं हैं तो हम उन्हें कोसने की बजाय अपना गला सहलाएं, थोड़ी थूक सट्कें और फिर चिल्लाएं| समाज में अगर हम अकेले ही अच्छे बचे हैं तब भी ये हमारा दायित्व है कि हम बजाय दूसरो को कोसने के कि कोई साथ क्यों नहीं आता स्वयं समाज को दुरुस्त करने का प्रयास करें| आपके विचार जानकर अच्छा लगा!

    September 16, 2012

    आदरणीय आपकी इस बात से शत प्रतिशत सहमत…………..

    chaatak के द्वारा
    September 16, 2012

    अनिल जी, आपकी सहमति को मैं अकेले व्यक्ति की सहमति नहीं मानता बल्कि मेरे विचार से ये हर उस व्यक्ति की सहमति है जो युवा है और बिगड़ी हुई व्यवस्था को अपनी कर्मठता से सुधारने की कोशिश करना चाहता है| एक बार फिर हार्दिक धन्यवाद!

bharodiya के द्वारा
September 8, 2012

चातक भाई ईन के बाप के गुंडों से परेशान जनता माया मेंम को लाये थे । फिर उस के बेटे को क्यों लाया गया, भाजपवाले क्या करते थे ?

    chaatak के द्वारा
    September 8, 2012

    स्नेही भरोदिया जी, आप भी इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ होंगे कि चुनाव में सिर्फ जनता की मर्जी नहीं चलती है| रसूख, रुपया, रक्काशा, और सबकी बाप शराब किसी भी दूसरी चीज़ से ज्यादा प्रभावी हो जाते है| अखिलेश के आने का कारण चुनावी वादे (सरकारी भीख), बहुबल और जातिगत राजनीति थी ना कि पसंद और नापसंद| भाजपा के ना आने का सबसे बड़ा कारण ये था कि इनकी बरात में सबकुछ था, दूल्हा छोड़कर सो सत्ता की दुल्हनिया खुद-ब-खुद जाकर सपा की गोद में बैठ गई! जनता को चेताने वाले सवाल उठाने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

akraktale के द्वारा
September 7, 2012

चातक जी               सादर, हम बोलते तो बहुत है की दायें गाल पर मारा अब बाएं पर मारो तो देख लेंगे किन्तु बाएं पर भी लप्पड़ खा कर चुप चाप घर चले जाते हैं इसलिए यह परिस्थितियाँ विकराल रूप लेती जा रही है. इनसे पहली बार में ही सख्ती से निपटना चाहिए. यदि ग्रामवासी सिपाही को चौकी तक पहुँचने से दुखी हैं तो अब भी कोई बात नहीं सभी सहयोग करें और इसे कानूनी सजा सख्त से सख्त मिले इसका सामूहिक प्रयास करें.

    chaatak के द्वारा
    September 8, 2012

    स्नेही रक्तले जी, सादर अभिवादन, आपने अपनी प्रतिक्रिया से ग्रामवासियों के दर्द को कम करने का एक नायब तरीका दे दिया है, भविष्य साक्षी बनेगा कि हमारे गाँव के सारे गवाह हर समय पूरी ईमानदारी से बच्ची को न्याय दिलाने को तत्पर रहेंगे| किसी के भी टस से मास होने की कोई गुंजायश नहीं है| बहुमूल्य प्रतिक्रया का हार्दिक धन्यवाद!

manoranjanthakur के द्वारा
September 7, 2012

श्री चतक भाई ये पुरे समाज हर प्रदेश की स्थिति है अब तो अबोध भी इन रावनो की शिकार हो रही है बहुत अफसोसजनक हालत होती जा रही है दुर्वग्यपूर्ण दुखद

    chaatak के द्वारा
    September 7, 2012

    स्नेही मनोरंजन जी, मुझे तो इस पूरी सच्चाई के वास्तविक दर्शन ने पूरी तरह से व्यथित कर रखा है| मेरे राय ली जाय तो मैं तो कहूँगा कोई अदालत कोई कार्यवाहीं नहीं सिर्फ विशुद्ध नैसर्गिक न्याय होना चाहिए अविलम्ब| न्याय की आवाज़ का एक और स्वर देने पर हार्दिक आभार!

krishnashri के द्वारा
September 7, 2012

स्नेही चातक जी , सादर , बहुत ही शर्मनाक एवं पुलिस को कलंकित करने वाली घटना .

    chaatak के द्वारा
    September 7, 2012

    आदरणीय कृष्ण जी, सादर अभिवादन, पुलिस विभाग को अब स्वयं को रक्षक कहने का कोई अधिकार नहीं है आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि जिस स्थान पर ये घटना हुई है वहां पर अक्सर पुलिस की गश्त होती रहती है| अपराध पर निगाह रखने के लिए नहीं बल्कि पास की कच्ची शराब की भट्टी पर पैसा वसूलने और एक सब्जी वाले के मड़हे में गोश्त नोचने के लिए|

vikramjitsingh के द्वारा
September 7, 2012

भैया……हथियार उठा लो…..जब बाड़ ही खेत को खाने लगे…तो उस बाड़ को उखाड़ फेंकना ही उचित होता है…..सारा देश ये बात कह रहा था….कि सपा के सत्ता में आते ही…..गुंडों की मौज लग जायेगी….तो क्यों ना तभी ये बात सोची गयी…….??? अब तो एक ही तरीका है……इन वर्दीधारी गुंडों का वो हाल करो…..कि ये साले…आते जाते…छोटे बच्चों को सलाम मार कर जायें.. तभी यादव साहब का सिंहासन हिलेगा…..और वो कार्यवाही करेंगे…… अब दिल्ली से भी क्या उम्मीद रखना…..वहां तो पहले ही चोरों और लुटेरों का जमावड़ा है……चुडैल इन सबकी नानी है…..इन गुंडों के समर्थन से ही तो सत्ता की पटरानी है…. …….नहीं तो चातक जी…….दिन और रात ऐसे ही आते जाते रहेंगे…..???

    chaatak के द्वारा
    September 7, 2012

    विक्रमजीत जी, यही तो मातम हो रहा है पूरे गाँव में कि तनिक सी घटना पर एक जुट होकर लड़मरने वाला गाँव इस बार बची को न्याय क्यों नहीं दे पाया? आपकी राय से पूरी तरह इत्तेफाक रखते हुए आपका हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहूंगा|

nishamittal के द्वारा
September 7, 2012

चातक जी,समाज के कलंक के रूप में प्रतिदिन होने वाली एक ऐसी ही व्यथा को मंच पर साझा किया है आपने .ऐसे में उस सिपाही को कठोर सजा मिलनी चाहिए परन्तु उसके अधम कृत्य से पीड़ित बेचारी बालिका !.हाँ गाँव के लोग साधुवाद के पात्र हैं जो उन्होंने बालिका की मदद की/.

    santosh kumar के द्वारा
    September 7, 2012

    आदरणीय चातक जी ,.. behad sharmnaak ghatnaa की भर्त्सना लायक शब्द नहीं हैं ,..बाद ही खेत खाने को तत्पर है ,…आपकी आवाज में सभी की आवाज सम्मिलित है ,..जागरण से गुजारिश है की ब्लॉग को सम्पादकीय पर स्थान दें ,..कुम्भ्करनी तंत्र की नींद खुले

    chaatak के द्वारा
    September 7, 2012

    निशा जी, पूरे प्रदेश की हालत राजधानी दिल्ली की तरह हो चुकी है| इस तरह के तंत्र में कम-से-कम स्त्री वर्ग के लिए एक अघोषित तालीबानी क़ानून लागू हो चुका है| नज़र से परे कोई नहीं जो बच गए हैं उनपर सिर्फ ईश्वर की मेहरबानी है| मदद को आवाज़ उठाने के लिए हार्दिक आभार|

    chaatak के द्वारा
    September 7, 2012

    स्नेही संतोष जी, न्याय के लिए उठी आवाज़ में स्वर मिलाने के लिए हार्दिक आभार| हमारे पूरे गाँव में आक्रोश चरम पर है आनन् फानन में पुलिस ने कुकर्मी सिपाही को अदालत में पेश कर उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का अपना फ़र्ज़ अदा कर दिया है, अगली पेशी १९ सितम्बर को है और निश्चित रूप से एक बालिका की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों के रहमोकरम पर रही यू-पी- की तेज-तर्रार पुलिस उस कुकर्मी की सुरक्षा में कोई कोर-कसार नहीं छोड़ेगी|

Ramesh Bajpai के द्वारा
September 7, 2012

प्रिय श्री चातक जी हैवानियत की यह दर्दनाक घटना सिर्फ पुलिस विभाग के लिए ही नहीं बल्कि सामाजिक मूल्यों के लिए शर्मनाक वा घातक है | मुख्यमंत्री को स्वयं दखल देनी चाहिए ताकि अपराधी को सजा वा बच्ची को न्याय मिले |

    chaatak के द्वारा
    September 7, 2012

    आदरणीय बाजपेयी जी, सादर अबिवादन, उत्तर-प्रदेश में ना शासन है और न न्याय यहाँ पर सिर्फ कुशासन या फिर दु:शासन| न्याय की उम्मीद भी कम ही दिखाई देती है| न्याय की मांग में एक और स्वर जोड़ने के लिए आभार|

jlsingh के द्वारा
September 7, 2012

स्नेही चातक जी, नमस्कार! आजकल इसीलिये ज्यादातर न्याय सड़कों पर होने लगा है क्योंकि हमारी जटिल कानूनी प्रक्रिया ब्याप्त भ्रष्टाचार न जाने क्या होने वाला है. मेरे ख्याल से यह बातें मीडिया में आई होगी और सम्बंधित अधिकारीयों तक खबर भी पहुँची होगी … आपको भी परामर्श दूंगा की इस ब्लॉग को स्थानीय समाचार पत्रों में भी जरूर दर्ज कराएँ .. हम अपना धर्म निभाएं .. उसके बाद जो होना है, हो! आपका आभार इस घटना को मंच पर साझा करने के लिए!

    chaatak के द्वारा
    September 7, 2012

    आदरणीय जे.एल. सिंह जी, सादर अभिवादन, बलात्कार जैसी घटनाओं पर हमेशा समाज को कटघरे में खड़ा करने की आदत विचारकों और राजनेताओं को बहुत रास आती है लेकिन हकीकत तो ये है कि आज समाज छुब्ध है क्योंकि उसके हाथ में कुछ भी नहीं पुलिस, सरकार और अदालतों ने हर तरफ अपने अधिकारों और ज्यादतियों की गन्दगी फैला रखी है| स्थानीय मीडिया पूरे मनोयोग से सामने आई है लेकिन कब तक? सभी को मालूम है कि इसमें कोई फायदा निकलने वाला नहीं क्योंकि क़ानून अपने कुचक्र को इतना लम्बा खींचेगा कि न्याय का कोई मतलब ही नहीं रहेगा|

drbhupendra के द्वारा
September 6, 2012

वाकई शर्मनाक घटना …

    chaatak के द्वारा
    September 7, 2012

    भूपेन्द्र जी, हार्दिक इच्छा है कि ये आवाज़ घोड़े बेचकर सो रही सपा सरकार को भी सुनाई दे|

ashishgonda के द्वारा
September 6, 2012

आदरणीय! बहुत ही शर्मनाक घटना पर आपने आलेख लिखा है, एक जो बड़ी बात ये है कि आदरणीय रामबहादुर जी को आपने दुबारा यहाँ (गोंडा) में लाने के लिए कहा, इस घटना पर पुलिस क्या करेगी ज्यादा से ज्यादा सिपाही को लाइन हाजिर कर देगी और कानून भी आँख बंद किये बैठा रहेगा क्योंकि कानून तो गरीबों के लिए है, किसी पुलिस वाले के लिए नहीं…..अगर अखिलेश सरकार इस पर कोई न्याय न कर सके तो मैं उन्हें हारा हुआ मंत्री मानूंगा, जो गुंडों से हार गया.

    chaatak के द्वारा
    September 6, 2012

    प्रिय आशीष, इस गंभीर अपराध पर आपकी राय जानकर अच्छा लगा| मैं भी आपसे सहमत हूँ अखिलेश सरकार यदि न्याय न कर सकी तो इसका एकमात्र कारण उनका निहायत ही ओछे विचार का नेता-पुत्र होना ही हो सकता है अन्यथा एक सत्यनिष्ठ शासक में रूप में उनके सिर्फ एक चरित्र सामने आना चाहिए कि वे दलगत भावना से उठकर जनहित में कुछ कठोर निर्णय लें|


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