चातक

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सेकुलर राजा जयचंद

Posted On: 1 Jul, 2012 Others में

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ये घटना काफी पुरानी है लेकिन ज्यादातर लोगों को मालूम है इसलिए मुझे बहुत गहराई में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वैसे तो इस कहानी को दोहराने की जरूरत नहीं होनी चाहिए लेकिन सेकुलराई का कीड़ा जब किसी के दिमाग में घुस जाता है तो ये किसी दीमक की तरह धर्म और राष्ट्रवाद दोनों को एक साथ चाट जाता है, इसलिए इसे पेस्टीसाइड की तरह दोहराते रहना चाहिए ताकि जो मस्तिष्क अभी तक इन कीड़ों के चपेट में नहीं आये हैं वे बचे रहें।
पूर्व ज्ञात है कि राजा पृथ्वीराज ने मुहम्मद गौरी को कई बार (मान्यता तो ये है कि १६ बार) पारित किया और हर बार उसने ये कसम खाई कि वह अब कभी दिल्ली की और आँख उठा कर नहीं देखेगा। उसकी कसम पर हर बार ऐतबार करके राजा पृथ्वीराज ने उसे मुक्त कर दिया। पृथ्वीराज हर बार आक्रमण को नाकाम करता रहा लेकिन जयचंद जिसकी पुत्री संयोगिता से उसने प्रेमविवाह किया था अपने विद्वेष के कारण सेकुलर हो गया उसके दिलो-दिमाग में अपने दामाद के लिए घृणा और मुहम्मद गौरी के लिए प्रेम दिनों-दिन परवान चढ़ता गया। यही सेकुलाराई (गैरों पे करम अपनों पे सितम) पृथ्वीराज की हार का कारण बनी। अब पृथ्वीराज  गौरी के सामने बंदी के रूप में पेश किया गया। गौरी ने कोई रहम नहीं किया वह पृथ्वीराज को बंदी बनाकर अफगानिस्तान ले गया जहाँ उसे हर तरह की अमानवीय यातना दी गई, गर्म सलाखों से उसकी आँखें फोड़ दी गई और हर रोज उसे दरबार में लाकर अपमानित किया जाता था। ये सारी देन सेकुलाराई के मद में चूर राजा जयचंद की थी जो स्वयं मुहम्मद गौरी के हाथो मारा गया। मरते समय जब जयचंद ने सेकुलर दोस्ती की दुहाई दी तो गौरी का जवाब था- तू जब अपनी कौम का ना हुआ, तूने जब अपनी सगी बेटी के सुहाग को उजाड़ने में रहम नहीं किया तो तू मेरा क्या होगा!
ज़माना गुजर चुका है लेकिन घात और प्रतिघात आज भी कायम है हथियार बदल चुके हैं लेकिन सत्ता के लिए आज भी वही संघर्ष है जिसमे हिन्दुस्तानी सेकुलर और कम्युनल बनकर अपनों से ही घात और प्रतिघात कर रहे है। ना जाने कब सुधरेंगे ये सेकुलर जयचंद, ना जाने कब इनमे इतना साहस आएगा कि ये अपने ही घर में आग लगाने से बाज़ आयेंगे पडोसी से सांठ-गाँठ करके अपने भाई की हत्या का इनका शौक न जाने कब ख़त्म होगा।

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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

सचिन के द्वारा
December 29, 2014

बढ़िया । पीके मूवी के समर्थक भी मुझे जयचंद ही नज़र आते है

    chaatak के द्वारा
    January 1, 2015

    सही है, सेकुलर सिर्फ वे लोग हैं जिनके पास स्वार्थ और पैशाचिक सोच के सिवाय कुछ नही- जैसे आमिर खान एंड हिरानी पार्टी …

anilsaxena के द्वारा
October 19, 2012

बिलकुल सही कहा है आपने , सेकुलर बनकर क्या हासिल कर लिया हमने. न अपनी भाषा के साथ न्याय कर सके और न अपनी संस्कृति के साथ. अपने देश में ही अल्पसंख्यक होते जा रहे है हम. देश के नीति नियंताओ को अब भी यदि तुष्टिकरण की नीति से मोह भंग नहीं हुआ तो इस देश को गर्त में जाने से कोई नहीं बचा सकेगा.

bharodiya के द्वारा
July 9, 2012

चातकभाई गुजराती में एक मीठीगाली है—सारी नो थामां— कोइ मित्र अगर होशियारी मारता है तो ये गाली खाता है, अपने दुसरे मित्रों से । मतलब है अच्छी मां का लडका मत बन या ओवर शरीफ मत बन । जनता ने तो गांधीजी को भी नही छोडा था । गांधीजी मरे तब कहा गया —सारीनो थयो तो गयो । —-मतलब, जनता की नजर से गांधी जी ओवर शरीफ हो गये थे, पाकिस्तान का ही पक्ष लेते थे, ईस लिए वो मरे । ओवर शरिफ आदमी हमेशां अपनों को पीडा दे कर बाहर अपनी शराफत दिखाता है । बाहर वालों में अपना नाम, ईज्जत कमाना चाहता है । वो मुर्ख जानता नही कि सामने वाला क्या सोचता है । उसे गद्दार ही समजा जाता है । जो अपनों का न हुआ दूसरों का क्या होगा । ईस गद्दार का युज हो जाने पर पिछे लात मारकर भगाते हैं । अभी जो महाशय को राष्ट्रपति बनने की ख्वाहिश रखते है उसने अरबों डोलर बांगलादेश को उधार दिए । २० करोड डोलर माफ किए । देश खूद डोलर के लिए तरसता है । ऐसा –सारीना– राष्ट्रपति भारतमें ही बन सकता है ।

rekhafbd के द्वारा
July 3, 2012

आदरणीय चातक जी , सत्ता के लिए आज भी वही संघर्ष है जिसमे हिन्दुस्तानी सेकुलर और कम्युनल बनकर अपनों से ही घात और प्रतिघात कर रहे है। ,बहुत खूब ,सार्थक लेख ,बधाई

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    रेखा जी, सादर अभिवादन, इस राजनीतिक घात प्रतिघात ने हमारे पूरे समाज और संस्कृति को विषाक्त कर दिया है अपनों से लड़ने का ये क्रम टूटना चाहिए अब हमारे अन्दर अपनों के दर्द को समझने की संवेदना होनी चाहिए| जिस व्यक्ति को अपने परिवार का दर्द नहीं दिखता वह दूसरों को राहत और सांत्वना की बात करता है तो लगता है जैसे कोरा उपहास करने वाला कोई विदूषक है या फिर बेहद मक्कार और धूर्त प्राणी| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

bharodiya के द्वारा
July 3, 2012

चातकभाई नमस्कार मेरे लिये कहने को कुछ है नही । बधाई के साथ सुरेशभाई चिपलुनकर की एक पेस्टीसाइड का टीन रखता हुं जरूरत पडे तो ढ्क्कन खोल के छीडक देना । क्या आप धर्मनिरपेक्ष हैं ? जरा फ़िर सोचिये और स्वयं के लिये इन प्रश्नों के उत्तर खोजिये….. १. विश्व में लगभग ५२ मुस्लिम देश हैं, एक मुस्लिम देश का नाम बताईये जो हज के लिये “सब्सिडी” देता हो ? २. एक मुस्लिम देश बताईये जहाँ हिन्दुओं के लिये विशेष कानून हैं, जैसे कि भारत में मुसलमानों के लिये हैं ? ३. किसी एक देश का नाम बताईये, जहाँ ८५% बहुसंख्यकों को “याचना” करनी पडती है, १५% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिये ? ४. एक मुस्लिम देश का नाम बताईये, जहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री गैर-मुस्लिम हो ? ५. किसी “मुल्ला” या “मौलवी” का नाम बताईये, जिसने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा जारी किया हो ? ६. महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुस्लिम मुख्यमन्त्री हो चुके हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मुस्लिम बहुल राज्य “कश्मीर” में कोई हिन्दू मुख्यमन्त्री हो सकता है ? ७. १९४७ में आजादी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब वह घटकर 1% रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसानफ़रामोश बांग्लादेश) में हिन्दू जनसंख्या 30% थी जो अब 7% से भी कम हो गई है । क्या हुआ गुमशुदा हिन्दुओं का ? क्या वहाँ (और यहाँ भी) हिन्दुओं के कोई मानवाधिकार हैं ? ८. जबकि इस दौरान भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10.4% से बढकर 14.2% हो गई है, क्या वाकई हिन्दू कट्टरवादी हैं ? ९. यदि हिन्दू असहिष्णु हैं तो कैसे हमारे यहाँ मुस्लिम सडकों पर नमाज पढते रहते हैं, लाऊडस्पीकर पर दिन भर चिल्लाते रहते हैं कि “अल्लाह के सिवाय और कोई शक्ति नहीं है” ? १०. सोमनाथ मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिये देश के पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये ऐसा गाँधीजी ने कहा था, लेकिन 1948 में ही दिल्ली की मस्जिदों को सरकारी मदद से बनवाने के लिये उन्होंने नेहरू और पटेल पर दबाव बनाया, क्यों ? ११. कश्मीर, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, क्या उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलती है ? १२. हज करने के लिये सबसिडी मिलती है, जबकि मानसरोवर और अमरनाथ जाने पर टैक्स देना पड़ता है, क्यों ? १३. मदरसे और क्रिश्चियन स्कूल अपने-अपने स्कूलों में बाईबल और कुरान पढा सकते हैं, तो फ़िर सरस्वती शिशु मन्दिरों में और बाकी स्कूलों में गीता और रामायण क्यों नहीं पढाई जा सकती ? १४. गोधरा के बाद मीडिया में जो हंगामा बरपा, वैसा हंगामा कश्मीर के चार लाख हिन्दुओं की मौत और पलायन पर क्यों नहीं होता ? १५. क्या आप मानते हैं – संस्कृत सांप्रदायिक और उर्दू धर्मनिरपेक्ष, मन्दिर साम्प्रदायिक और मस्जिद धर्मनिरपेक्ष, तोगडिया राष्ट्रविरोधी और ईमाम देशभक्त, भाजपा सांप्रदायिक और मुस्लिम लीग धर्मनिरपेक्ष, हिन्दुस्तान कहना सांप्रदायिकता और इटली कहना धर्मनिरपेक्ष ? १६. अब्दुल रहमान अन्तुले को सिद्धिविनायक मन्दिर का ट्रस्टी बनाया गया था, क्या मुलायम सिंह को हजरत बल दरगाह का ट्रस्टी बनाया जा सकता है ? १७. एक मुस्लिम राष्ट्रपति, एक सिख प्रधानमन्त्री और एक ईसाई रक्षामन्त्री, क्या किसी और देश में यह सम्भव है, यह सिर्फ़ सम्भव है हिन्दुस्तान में क्योंकि हम हिन्दू हैं और हमें इस बात पर गर्व है, दिक्कत सिर्फ़ तभी होती है जब हिन्दू और हिन्दुत्व को साम्प्रदायिक कहा जाता है । स्वामी विवेकानन्द ने कहा था – “हिन्दुत्व कोई धर्म नहीं है, यह एक उत्तम जीवन पद्धति है” । गाँधी के खिलाफ़त आन्दोलन के समर्थन और धारा ३७० पर भी काफ़ी कुछ लिखा जा चुका है और ज्यादा लिखने की जरूरत नहीं है, इसलिये नहीं लिखा, फ़िर भी…..उपरिलिखित विचार किसी राजनैतिक उद्देश्य के लिये नहीं हैं, ये सिर्फ़ ध्यान से चारों तरफ़ देखने पर स्वमेव ही दिमाग में आते हैं और एक सच्चे देशभक्त नागरिक होने के नाते इन पर प्रकाश डालना मेरा कर्तव्य है ।

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    स्नेही भरोदिया जी, सादर अभिवादन, सुरेश चिपलूनकर जी के सवालों का जवाब किसी सेकुलर किसी हिन्दू विरोधी किसी राष्ट्र-विरोधी जीव में नहीं है ये विचार सिर्फ आत्म-मंथन के लिए है और उन्हें जगाने के लिए हैं जिनकी अंतरात्मायें सोयी हैं इसे पढ़कर वे जरूर जागेंगे जिन्हें सेकुलाराई की लोरी गा कर सुला दिया गया है लेकिन जिनकी आत्माएं सेकुलाराई का जहर पीकर कूच कर चुकी हैं वे मुर्दे अब जागने से रहे| प्रतिक्रया के साथ सुरेश जी के ब्लॉग का अंश पोस्ट पर लाने का हार्दिक धन्यवाद!

    yogeshkumar के द्वारा
    July 8, 2012

    महाशय इसमें कुछ बाते जोड़ना भूल गए आप…. क्या किसी मुस्लिम देश में संभव किसी हिन्दू एक्टर का स्टार या सुपर स्टार बनना… मैं समझता हूँ अभिनय एक अलग तरह की विद्या है… जिसमें लोकप्रिय होने के लिए आपको पारंगत होने की जरूरत नहीं होती … अभिनय अन्य विद्याओं से कुछ अलग है… जनता को क्या अच्छा लग जाये कहा नहीं जा सकता …ये मुस्लिम स्टार शाह रुख खान , सलमान खान या आमिर खान इस देश में लोक प्रिय हैं…इसी से पता चलता है इस देश के हिन्दुओं का दिल कितना बड़ा है…. क्या ऐसा पाकिस्तान में संभव है… पकिस्तान बनाने में सहयोग करने वाले और पाकिस्तान चले जाने अल्लामा इक़बाल का देश भक्ति गीत “सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा ….” आज भी उतने प्यार से गाया जाता है… मगर जिन्ना के कहने पर जब मशहूर उर्दू शायर जगन्नाथ आजाद ने पाकिस्तान का कौमी तराना ( National anthem ) लिखा तो १८ महीने बाद उस राष्ट्र गान को केवल इसलिए हटा दिया गया क्योंकि वो किसी हिन्दू ने लिखा है….

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    योगेश जी, आपके प्रश्न का जवाब भी किसी सेकुलर के पास नहीं होगा भरोदिया जी के प्रश्नों में एक और यक्ष प्रश्न जोड़ने पर हार्दिक धन्यवाद!

yogi sarswat के द्वारा
July 3, 2012

तू जब अपनी कौम का ना हुआ, तूने जब अपनी सगी बेटी के सुहाग को उजाड़ने में रहम नहीं किया तो तू मेरा क्या होगा! आदरणीय श्री चातक जी , नमस्कार ! ये पंक्तियाँ सब कुछ कह जाती हैं ! आज तो जयचंद से भी ज्यादा सेकुलर लोग इस देश में हैं जिन्हें ये नहीं मालूम की इस मुल्क को किस दिशा में ले जा रहे हैं ! बेहतरीन पोस्ट !

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    स्नेही योगी जी, सादर अभिवादन, पोस्ट पर आपकी राय जानकर बेहद ख़ुशी हुई| जयचंद की नाजायज़ औलादों ने परिवार नियोजन का कोई विचार अपने जेहन में ही नहीं आने दिया परिणाम स्वरुप सारे कमुनल सरकार और संविधान को सर्वोपरि मानते हुए अपनी संख्या घटाते रहे और सेकुलर ग्रंथों में नियोजन हराम होने के कारण वे लगातार सेकुलर आबादी बढ़ाते रहे| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

Mohinder Kumar के द्वारा
July 3, 2012

चातक जी, “प्यार और जंग में सब जायज है” यह कह कर लोग अब इस बात से अपना पीछा छुडा लेते हैं. सार्थक लेख के लिये बधाई.

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    स्नेही मोहिंदर जी, सादर अभिवादन, एक ही बात में बहुत सी बाते कह डाली आपने ये सेकुलर न प्यार में सच्चे हैं न जंग में और दोनों में मक्कारी को इन्होने जायज ठहराने के लिए एक लाइन का सर्टिफिकेट ले रखा है| हार्दिक धन्यवाद!

rahulpriyadarshi के द्वारा
July 3, 2012

ये सभी जयचंद एक दिन खुद गौरियों के शिकार बनेंगे,लेकिन इन अक्ल के अंधों को इतना भी नजर नहीं आता..इनकी एकतरफा बेहूदगियों से बहुत नुक्सान उठाना पड़ा है,आपने बिलकुल सही उपमा दी है इन अवसरवादी जयचंदों की.

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    स्नेही राहुल जी, सादर अभिवादन, आपकी इस दो टूक बात ने बहुत कुछ बयान कर दिया लेकिन ये सेकुलर भी गाँठ के पूरे पक्के है इन मक्कारों को शर्म तो पीढ़ियों से नहीं आई| प्रतिक्रिया द्वारा राय प्रकट करने का हार्दिक धन्यवाद!

shailesh001 के द्वारा
July 3, 2012

यह जयचंदी चरित्र संविधान बन चुका है और म्लेच्छ नस्लें आज उसपर कायम होकर हमपर राज कर रही हैं . वही भूलें दोहरा दोहरा कर आज हम हम मूढ़ बुद्धि साबित हो चुके हैं  पर हमारा स्वाभिमान अभी तक नहीं जागा.. जय हो..

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    स्नेही शैलेश जी, सादर अभिवादन, सही कहा है आपने हम भूलों को दोहरा कर स्वयं को आज तक मूर्ख और कायर साबित करते रहे हैं काश कि हमारा स्वाभिमान जागे| हार्दिक धन्यवाद !

shashibhushan1959 के द्वारा
July 2, 2012

आदरणीय चातक जी, सादर ! कृतघ्न और अवसरवादी जयचंदों का यही हश्र होता है और इन वर्तमान जयचंदों का भी यही अंजाम होगा ! इन बेईमानों के मुंह पर कालिख पोतने वाली रचना के लिए मेरी हार्दिक बधाई !

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    आदरणीय शशिभूषन जी, सादर अभिवादन, जिस जुबाँ में है जुर्रते-इज़हार नहीं, वो कुछ भी हो मगर साहिबे-किरदार नहीं! आपकी इस प्रतिक्रिया ने बहुत कुछ कह दिया| जयचंद की इन नाजायज़ औलादों को कौम और मुल्क से गद्दारी खून में मिली है उस दुर्गन्ध को हटने में वक्त लगेगा मुझे तो संदेह है कि ये कभी सुधरेंगे भी या नहीं| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

R K KHURANA के द्वारा
July 2, 2012

प्रिय चातक जी, आपने जो उदहारण दिया है बिल्कुल ठीक दिया है ! सच ही है लिभ में मुनुष्य अँधा होकर अपनों के साथ ही धोखा करता है फिर उसे भी धोखा ही मिलता है ! अच्छा लेख ! राम कृष्ण खुराना

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    आदरणीय खुराना जी, सादर अभिवादन, ब्लॉग पर आपके विह्चार जानकर अत्यधिक प्रसन्नता हुई| अपनों को धोखा देने वाले ये सेकुलर अभी ना जाने कितने पृथ्वीराजों की आँखें निकल्वाएंगे और ना जाने कितनी संयोगिताओं का सम्मान ख़त्म करेंगे| पता नहीं किस मिटटी के बने हैं ये जो जिंदा रहने के लिए केंचुओं से भी ज्यादा पिलपिले बनने नहीं लजाते | प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

yamunapathak के द्वारा
July 2, 2012

चातक जी बहुत अच्छी तरह आपने इतिहास के उदहारण के साथ इस सेकुलरिस्म पर विचार व्यक्त किये . घाट-प्रतिघात हर युग में बस सत्ता के लालसा में ही चलता रहा. ब्लॉग के लिए अतिशय शुक्रिया.

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    यमुना जी, सादर अभिवादन, मेरी सिर्फ इतनी दुआ है कि कायर सेकुलरों को ईश्वर आप नारियों जितना साहस दें ताकि इनमे कमसे-कम हकीकत से आँखें मिलाने का तो आत्मविश्वास आ जाए| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

munish के द्वारा
July 2, 2012

आदरणीय चातक जी नमस्कार, आपने सेकुलरिज्म को जयचंद से जोड़कर सही ढंग से परिभाषित कर दिया है अब सेकुलर का अर्थ समझना छोटे बच्चों का भी आसान हो जाएगा

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    स्नेही मुनीश जी, सादर अभिवादन, सेकुलरिज्म का जहर नस्लों में इस कदर उतर चुका है कि जानकर भी लोग अनजान बने बैठे हैं सावन के अन्धो को हरियाली तबतक दिखती है जब तक उन्हें फिर से आँखें न मिलें ठीक उसी तरह इन सेकुलरों की आँखें तब खुलेंगी जिस दिन ये दीमक इनके सारे सब्ज-बाग़ इनकी आँखों से सामने उजाड़ देगा| उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

roshni के द्वारा
July 1, 2012

chaatak ji namskar apne pe sitam gehron pe karam…. shayd यही sawbhav हो गया है aaj की राजनीती का भी .. जैचंद जैसे लोग भरे पड़े है … लगता है past में जो बोया गया था उसी के पेड़ अब बड़े हो गए है और भविष्य के लिए भी यही बीज बो रहे है … सुंदर लेख आभार

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    रौशनी जी, सादर अभिवादन, आपकी राय जानकर बड़ा हर्ष होता है और आश्चर्य होता है कि हमारे देश की नारियों में सत्य को खाने समझने और उसके लिए कुर्बान होने का जज्बा हमेशा कायर पुरुषों से ज्यादा रहा है| काश कि रानीलक्ष्मी बाई के समय मर्दों में साहस होता| काश के जौहर करने वाली हमारी वीरांगनाओं के मन में रही पवित्र धार्मिक भावना हमारे कायर पुरुषों में रही होती ! काश आप जैसा साहस तथाकथित सेकुलर प्रबुद्धजनों में होता! प्रतिक्रिया द्वारा विचार प्रकट करने का हार्दिक धन्यवाद!

DHARAMSINGH के द्वारा
July 1, 2012

 आप ने सही लिखा है ईस का बीज गान्धी ने बोया सैकुलर सविंधान मे नही था इन्दिरा ने 1976 की ईमरजैन्सी मे जोडा ये सारे सैकुलर  गद्दारो का  छदम नाम है लम्बीगुलामी ने हिन्दुओ का जमीर नष्ट कर दिया वे गुलामी मे खुश हैं आज की  90प्रतिशत समस्याये गान्धी, नेहरू ईन्दिरा की देन हैं

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2012

    स्नेही धरम जी, सादर अभिवादन, सेकुलरिज्म का विषवृक्ष बोया किसने अब ये बात मायने नहीं रखती| महत्वपूर्ण ये है कि हम इस जहर के पेड़ को पानी देने वालों को क्यों पोष रहे हैं? समय जबकि हमारे कर्म का मुंह ताक रहा है, क्या हम इस विष-वृक्ष को जड़ से उखाड़ने का साहस करने वाले हैं? सेकुलरिज्म के विरुद्ध आपकी इस निर्भीक आवाज़ को सुनकर हार्दिक प्रसन्नता हुई| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!


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