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शिक्षा का बीमार खेल

Posted On: 27 Jun, 2012 Others में

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कुछ ही समय पहले मैंनें अपने ब्लाग में यू0पी0 बोर्ड की परीक्षा में दसवीं कक्षा के छात्रों को दिये गये सत्रीय कार्य के अंकों पर प्रश्न उठाया था और बताया था कि किस तरह से रिश्वत लेकर अंक दिये जाते हैं। 26 जून को गोण्डा शहर में श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने मंगलवार को यू0 पी0 बोर्ड (2011-12 की) कक्षा 10 एवं कक्षा 12 की परीक्षा में सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले 10-10 छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में मेधावियों की प्रतिभा का मूल्यांकन कराने के लिए प्रतियोगिता भी कराई गयी। प्रतियोगिता के परिणाम आश्चर्यजनक रहे। जिस छात्र ने बोर्ड परीक्षा में 90 प्रतिशत अंक अर्जित किये हैं वह इस प्रतियोगिता मे मात्र16 प्रतिशत (यानि बोर्ड परीक्षा पास होने के लिए निर्धारित 33 प्रतिशत अंक के आधे से भी कम) अंक ही हासिल कर सका जबकि 88 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वला छात्र सिर्फ 8 प्रतिशत अंको पर ही हिट विकेट हुआ। जैसे-तैसे 17 प्रतिभागी मेधावियों(?) को उपनिदेशक सूचना, रवि कुमार तिवारी, अधिवक्ता के0के0 श्रीवास्तव, श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष के0एन0 वर्मा तथा महामंत्री जानकी शरण द्विवेदी आदि ने सम्मानित किया।
मेधावियों की यह महान उपलब्धि अमर उजाला दैनिक के स्थानीय पृष्ठ पर प्रकाशित हुई और मेधावियों को ससम्मान(?) अपनी तस्वीर अखबार में देखने को मिली।
यदि उपरोक्त घटना की निंदा भी की जाय तो क्या उस क्षति की भरपाई सम्भव है जो उन छात्रों को हुई जो वास्तव में मेधावी हैं और भ्रष्ट तंत्र (शिक्षक, मैनेजर, शिक्षा अधिकारी) के शिकार हैं? माना कि असली मेधा अपनी जगह बना लेती है और उपलब्धियां भी उनके हिस्से में आती हैं लेकिन उन मेधावियों के दर्द का क्या जो उनको सम्मान न मिल पाने की कुंठा से उत्पन्न होता है?

प्रश्न अभी भी वही है क्या शिक्षा और मेधावियों के साथ हो इस मजाक पर शासन और प्रशासन में बैठे एक भी व्यक्ति की नजर नहीं पड़ती? या फिर निष्कर्ष यही है कि ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा लुप्त हो चुकी है…………………….

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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 18, 2012

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी … बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!! शुभकामनायें.

ajaykr के द्वारा
July 13, 2012

परम आदरणीय चातक जी,सादर अभिवादन यू.पी .बोर्ड में नकल किस हद तक बढ़ गया हैं ,इस पर मैंने भी आलेख लिखा हैं …..इस साल की इन्टर परीक्षा में ८९.२ प्रतिशत पाने वाली  एक लड़की ने अपनी परीक्षा तक नही दी थी क्यूंकि वह अपना नाम भी नही लिख पाती थी….ऐसे ही मैंने कई उदाहरण देखे हैं ….नैतिक पतन के ….. पर समाज और सरकार दोनों इस बात को शह दे रहें हैं ..http://avchetnmn.jagranjunction.com/2012/07/13/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%81-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87/

shashibhushan1959 के द्वारा
June 30, 2012

आदरणीय चातक जी, सादर ! आज की शिक्षा के मायने ही परीक्षा में येन-केन-प्रकारेण पास हो जाना है ! व्यावहारिक शिक्षा, वैचारिक शिक्षा , औए वास्तविक बौद्धिक शिक्षा की तो कदर ही नहीं है ! बहुत विचारणीय रचना ! इस पर और गहन मंथन होना चाहिए ! हार्दिक आभार !

    chaatak के द्वारा
    July 1, 2012

    आदरणीय शशिभूषन जी, सादर अभिवादन, शिक्षा के बिगड़ते हालात पर आपकी राय बिलकुल सही और चिंता जायज़ है| मुझे तो लगता है कि शिक्षा में व्याप्त ये जहर ऐसे ही बढ़ता रहा तो हमें विश्वगुरु बनने के स्वप्न को छोड़कर बौद्धिक गुलामी की तैय्यारियाँ कर लेनी चाहिए| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

rekhafbd के द्वारा
June 30, 2012

चातक जी, सार्थक लेख ,आज कल शिक्षा प्रणाली में भी भृष्टाचार घुस चुका है ,जो बहुत ही निंदनीय है ,ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा बेमानी बाते हो चुकी है ,भारत के भविष्य के लिए घातक ,विचारने योग्य लेख

    chaatak के द्वारा
    July 1, 2012

    रेखा जी, सादर अभिवादन, पोस्ट पर आपकी बेबाक राय जानकर आत्मविश्वास में वृद्धि हुई| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

R K KHURANA के द्वारा
June 30, 2012

प्रिय चातक जी, आज हर जगह रिश्वत और सिफारिश का ही बोलबाला है जिस कारन से देश धरातल में जा रहा है ! बहुत सुंदर लेख ! राम कृष्ण खुराना

    chaatak के द्वारा
    July 1, 2012

    आदरणीय खुराना जी, सादर अभिवादन, रिश्वतखोरी की हद हो चुकी है अब तो बच्चो को बलि का बकरा बनाया जा रहा है| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

rajuahuja के द्वारा
June 29, 2012

चातक जी ! आज भ्रस्टाचार का ज़हर फिजां में घुला है ,ऐसे में शिक्षा विभाग कैसे अछूता रह सकता है ?प्रतिस्पर्धा के इस दौर में पहले भ्रस्टाचार फिर आरक्षण और फिर दोगली व्यवस्था,सचमुच अन्याय है यह !

    chaatak के द्वारा
    July 1, 2012

    स्नेही आहूजा जी, सादर अभिवादन, सही कहा आपने कूप में ही यहाँ भांग परी है| इस दोगली व्यवस्था ने सत्यानाश कर रखा है| कुछ ख़ास है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, गो कि रहा है दुश्मन दौरे-जहाँ हमारा|| हार्दिक धन्यवाद!

div81 के द्वारा
June 29, 2012

चातक जी, ये ही हकीकत है आज की| मेरी दीदी एक अध्यापक हैं , और आज की तारीख में दीदी को किसी भी छात्र को फेल नहीं करना है, क्योंकि शिक्षा का अधिकार उनको ऐसा करने से रोकता है| परन्तु इतना तो दीदी को पता है कि किस छात्र को किस श्रेणी में रखना है| वो कौन से अध्यापक हैं जो देश को सर्वनाश की और ले जा रहें हैं , आश्चर्य होता है ये सोचकर, ये बहुत भयावह है|

    chaatak के द्वारा
    July 1, 2012

    दिव्या जी, आज अध्यापकों के सामने ये भी एक बड़ी समस्या है कि उन्हें अध्यापन छोड़कर बाकी सबकुछ करना होता है| जब उन्हें मूल्यांकन करना होता है तो उन्हें मूल्यांकन छोड़कर सिर्फ आदेशों के अनुसार अंक तालिका भरनी होती है इसीलिए शिक्षा का इंस्पेक्टर राज से मुक्त होना आवश्यक है | प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

savi के द्वारा
June 29, 2012

चातक जी, सादर नमस्कार जब दसवी मे थी तो हमारे क्लास मे कुछ नए एडमिशन हुए जिनमे हमारी क्लास टीचर कि बेटी भी थी जो कि दूसरे स्कूल से फेल हो के आई थी | साथ होने से पता भी चल गया कि क्यूँ फेल हुई थी वो मगर जब बोर्ड रिजल्ट आउट हुआ तो हम सब चौंक गए उसने स्कूल टॉप किया था | ऐसे ही लोग आगे जा कर रिश्वत दे कर नौकरी पा लेते है फिर जिस जगह भी हो अपनी बेवकूफी सारे समाज मे देते है | हमारा देश ऐसे ही लोगो के हाथ मे है जिनकी डिग्री पर प्रश्नचिह्न लगे हुए है………………. बेवकूफों की जमात खड़ी कर हो रही है ………………………..

    chaatak के द्वारा
    July 1, 2012

    स्नेही सवी जी, सादर अभिवादन, इसी तरह के ना जाने कितने उदाहरण हम सभी जानते हैं और न जाने कितनी बार इसी तरह की ज्यादतियों के शिकार होते हैं| अब समय आ गया है जब हम अपनी पीड़ा को कहें और जहाँ तक संभव हो विरोध भी दर्ज करें| प्रतिक्रिया द्वारा पोस्ट को समृद्ध करने का हार्दिक धन्यवाद!

Ravinder kumar के द्वारा
June 29, 2012

चातक जी, सादर नमस्कार, विडम्बना यही है दूसरे विभागों की तरह ही भ्रष्टाचार रूपी घुन शिक्षा तंत्र को भी खोखला कर रहा है. जिसका सबसे अधिक नुक्सान निर्धन तबकों पर ही पड़ रहा है. विभाग द्वारा शिक्षा को लेकर नित नए नए प्रयोग किये जा रहे हैं. जिनसे सुधार तो दूर स्थिति बद से बद्तर होती जा रही है. अमीर और गरीब के लिए अलग-अलग स्तर की शिक्षा व्यवस्था देश में चल रही है. जिस कारण आने वाले समय में देश में दो वर्ग होंगें.चातक जी आप ने अपने लेख से बेहद प्रासंगिक मुद्दा उठाया है. आप को बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं. नमस्कार जी .

    chaatak के द्वारा
    July 1, 2012

    स्नेही रविंदर जी, सादर अभिवादन, आपकी टिप्पड़ी से बहुत मनोबल मिला शिक्षा को लेकर आपकी चिंता जानकर बड़ी प्रसन्नता भी हुई| हार्दिक धन्यवाद

akraktale के द्वारा
June 28, 2012

चातक जी नमस्कार, निष्कर्ष की बात ही क्या है यह पूरा हिन्दुस्तान जानता है की हमारे यहाँ शिक्षा और परिक्षा के नाम पर क्या खिलवाड़ रहा है. मगर कोई सुधारने वाला भी तो हो. पहली से आठवीं तक जनरल प्रमोशन फिर नौवीं कक्षा का परिणाम कैसा आयेगा आप खुद ही समझ सकते हैं. परीक्षाओं में परीक्षार्थी की जगह अन्य कोई व्यक्ति परीक्षा दे रहा है तब उन मेघावी छात्रों का क्या होगा? हमें बहुत सख्त जरूरत है ऐसे सख्त व्यक्तियों की जो इस समस्या से लड़ने के लिए आगे आये.

    chaatak के द्वारा
    July 1, 2012

    स्नेही रक्तले जी, सादर अभिवादन, आपके विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ| हमें अपने देश के भविष्य के साथ इस खिलवाड़ को रोकने में हर संभव प्रयास करना चाहिए| सही दिशा देने का हार्दिक धन्यवाद!

alkargupta1 के द्वारा
June 28, 2012

चातक जी , कोई भी क्षेत्र भ्रष्टाचार से छूटा नहीं है काश आपका यह लेख शैक्षणिक क्षेत्र में भ्रष्ट तंत्र के शिकार लोगों के लिए उचित मार्ग प्रदर्शन में सहायक हो व उन्हें अपना कर्तव्य बोध हो और सही रूप में मेधावी प्रतिभाएं अपने उचित सम्मान की अधिकारिणी हों ….विचारणीय आलेख के लिए धन्यवाद

    chaatak के द्वारा
    July 1, 2012

    अलका जी, सादर अभिवादन, लेख पर आपके विचार और वैचारिक सहमति प्राप्त कर हार्दिक प्रसन्नता का अनुभव हुआ| धन्यवाद!

yogi sarswat के द्वारा
June 28, 2012

उत्तर प्रदेश बोर्ड किस तरह से चल रहा है और बोर्ड परीक्षाओं का क्या हाल हुआ पड़ा है , ये कोई छुपी बात नहीं है आदरणीय चातक जी ! सामूहिक नक़ल और कमरे के बाहर ताला ! ये इसी बोर्ड की कहानी है !

    chaatak के द्वारा
    July 1, 2012

    स्नेही योगी जी, सादर अभिवादन, यू०पी० बोर्ड की परीक्षाओं का अब कोई अस्तित्व नहीं रहा नीचे से लेकर ऊपर तक सारे बेईमानो की फौज है मिल बाँट कर विद्यार्थियों का भविष्य खा रहे हैं | प्रतिक्रिया द्वारा प्रोत्साहन का हार्दिक धन्यवाद!

jlsingh के द्वारा
June 28, 2012

चातक जी, नमस्कार! हर जगह घोर अन्धकार दिख रहा है. शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी अनियमितता हमें कहाँ ले जायेगी ????

    chaatak के द्वारा
    June 28, 2012

    आदरणीय जे.एल.सिंह जी, सादर अभिवादन, ये चिंता हम सबकी है और जवाब एक ही है हम गर्त में पहुँच चुके है अब और नीचे क्या है जल्द ही हम ये भी जान जायेंगे| हार्दिक धन्यवाद!

dineshaastik के द्वारा
June 28, 2012

चातक जी नमस्कार, शिक्षा में भ्रष्टाचार अन्य भ्रष्टाचारों से अधिक  खतरनाक  है, इससे प्रतिभावान  छात्रों की प्रतिभा का गलत  रास्ते पर जाने का संभावनी बढ़ जाती है। इस  भ्रष्टाचार का विरोध  आलेख  से नहीं जन  आन्दोलन  से होना चाहिये। आपका आलेख  जन जागृति के लिये सहायक  सिद्ध  होगा।

    chaatak के द्वारा
    June 28, 2012

    स्नेही दिनेश जी, सादर अभिवादन, शिक्षा में भ्रष्टाचार पर आपके विचारों से पूर्ण सहमती है और आन्दोलन के बारे में सोचता हूँ तो लगता है इस देश में आन्दोलनों का भी कोई असर नहीं होता इन काले अंग्रेजों से तो वो गोरे अच्छे थे जो कमसे कम आन्दोलन होने पर विचलित तो होते थे| यदि हर क्षेत्र में आज आन्दोलन की ही जरूरत है तो फिर हमें सरकार चुनने की क्या आवश्यकता है? दलीलें चाहे जितनी दे दूं लेकिन मैं भी जानता हूँ कि बात आपकी ही सही है और इसीलिए मैंने परिवार नियोजन की शपथ तोड़ कर कम से कम आधे दर्जन पुत्र पैदा करने का मन बनाया है उनमे से तीन को परिवार की जिम्मेदारी दूंगा और तीन लगातार विभिन्न मुद्दों पर आन्दोलन करेंगे :) और फिर बुजुर्ग ही सही मैं भी खाली ही रहूँगा और अन्ना की तरह आन्दोलन करता रहूँगा :) यानी अब इस देश को सिर्फ २० वर्ष और इंतजार करना है (तब तक मेरे तीन बच्चे जरूर आन्दोलन करने लायक हो जायेंगे| :) अच्छे सुझाव का हार्दिक धन्यवाद!

yamunapathak के द्वारा
June 27, 2012

चातक जी,आपा यह ब्लॉग शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार को स्पस्तातः दिखा रहा है आप ने लोगों को सजग किया आपका अतिशय धन्यवाद. एक बात मैं पाती हूँ की जब अछे अंकों से सफल हुए ये बच्चे किसी अच्छी कंपनी के interview में जाते हैं aatतो इनकी कलई खुल जाती है जब इनमें से कई व्यवहारिक और सैधांतिक दोनों ही प्रश्नों के ज़वाब में बगले झांकते रहते हैं .अंक किसी भी विद्यार्थी की लम्बी दौड़ में कभी सहायक नहीं बना और अगर उन्हें अंक के बदौलत नौकरी मिल भी गयी तो प्रत्यक दिन स्वयं को साबित करना ज़रूरी है. यह ब्लॉग मुझे बहुत पसंद आया.

    chaatak के द्वारा
    June 28, 2012

    यमुना जी, सादर अभिवादन, आज कोई भी विद्यार्थी और कोई भी अभिभावक इस भ्रष्टाचार से अनजान नहीं फिर भी खेल बदस्तूर जारी है| यू० पी० में तो अब हद हो चुकी है अभी दो दिन पहले यहाँ के सी०एम० की १०० दिन की कापियां उनके पिताजी ने जांच कर उन्हें १०० में से १०० अंक दे दिए और एक ही दिन बाद प्रदेश में गेहूं की खरीद और सुरक्षा के सम्बन्ध में अदालत ने उन्हें १०० में शून्य अंक प्रदान करते हुए फटकार लगाई है| शिक्षा व्यवस्था भी इन्ही अंधों के हाथ में है जो शून्य पाने वाले गधों को १००/१०० प्रदान कर हिन्दुस्तान का सत्यानाश करने पर तुले हैं| प्रतिक्रिया द्वारा राय रखने का हार्दिक धन्यवाद!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 27, 2012

सब कुछ संभव है . मूल्यांकन पर मेरी निष्ठां सन १९७२ से ही हट गयी है.

    chaatak के द्वारा
    June 28, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, सादर अभिवादन, ७२ से लेकर १२ तक ४० वर्ष में निष्ठा सिर्फ घटती गयी है और अब विद्यार्थी न शिक्षक पर विश्वास कर पा रहा है न परीक्षक पर यानी स्थिति बद से बदतर हो चली है|


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