चातक

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हिन्दुस्तान की विडम्बना

Posted On: 11 Aug, 2011 Others में

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दर्जा पाँच पास महरानी,
राज करै भारत पर आज।
बनते हैं सब गुर बड़ ग्यानी,
आवै नाहीँ हमको लाज,
बैठी दिल्ली हुकुम डोलावै,
महरिन खुद का रानी बतावै,
चातक बोलै, ‘सत्यानाश !’

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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

विवेक के द्वारा
March 5, 2012

चातक बोलै सत्यानाश | अति उत्तम रचना

    chaatak के द्वारा
    March 5, 2012

    स्नेही विवेक जी, सादर अभिवादन, प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

चन्द्रपाल के द्वारा
October 9, 2011

रानी खुद बैठ नहीं पाई सिंहासन पै गुनीजन सब इसे त्याग बतलावै है। प्रणव चिदंबरम सो झोलत चंवर उसे दिग्विजय राजा महारानी बतलावै है। चर्च की ध्वजा हिन्दुस्तान में जो गाड़त हैं। ऐसे पादरिन को ईनाम दिलवावै है। पी.एम. की कुरसी पै खुद जो न बैठ सकी पप्पू को बिठाने की जुगत भिड़ावै है।

    chaatak के द्वारा
    October 10, 2011

    बहुत खूब चंद्रपाल जी, आपने तो पप्पू और मम्मी का पूरा बाजा ही बजा दिया! जय हो!

krishna के द्वारा
September 26, 2011

चाटा लगाया तो सही और आवाज भी नहीं आई पर लगी जरूर पर ये चाटा जिसको लगनी चाहिए थी शायद उनको एहसास भी नहीं हुआ मगर समझदार को ये एहसास जरूर होगा…… जय हिंद जय भारत…

    chaatak के द्वारा
    September 26, 2011

    स्नेही कृष्ण जी, इस छोटी सी अभिव्यक्ति पर आपकी राय पाकर बेहद ख़ुशी हुई, जिनके लिए लिखा है वे जन्मजात लतखोर हैं उनपर चांटों का प्रभाव नहीं पड़ेगा अब तो न्यायलय से ही न्याय मिले तो जानिये जनता का कुछ भला होगा और तिहाड़ का कुछ बुरा क्योंकि ऐसे जघन्य अपराधी तो कसाब और अफजल गुरु भी नहीं हैं| वन्देमातरम!

nishamittal के द्वारा
August 15, 2011

सत्सैय्या का दोहा तो नहीं पर चातक जी की पंक्तियाँ गंभीर घाव कर रही हैं.

    chaatak के द्वारा
    August 15, 2011

    निशा जी, आपकी इस टिप्पड़ी को पढ़कर दिल को काफी तसल्ली मिली, यदि इन गद्दारों के दिलों में शूल बनकर उतर जाता तो सच में कलेजे में ठंडक पड़ जाती| प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद!

abodhbaalak के द्वारा
August 13, 2011

चातक जी मै भी वही कहूँगा जो आदरणीय रीता जी ने कहा है, केवल चाँद शब्दों में बहुत बड़ी बात, आप ही कह सकते हैं, मंच पर बहुत दिन बाद आया हूँ और आप सब का साथ फिर से मिलने से मन थोडा ….

    chaatak के द्वारा
    August 13, 2011

    प्रिय अबोध जी, आपकी राय जानकर बेहद प्रसन्नता हुई साथ ही साथ मंच पर आपकी वापसी बेहद सुखदाई लगी| पतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद!

rita singh 'sarjana' के द्वारा
August 12, 2011

चातक जी , नमस्कार , चंद लाइनों में ही पूरी कहानी बयाँ करती अति सुन्दर पंक्तियाँ …………..बधाई l

    chaatak के द्वारा
    August 13, 2011

    रीता जी, पंक्तियों की सराहना करने और प्रतिक्रिया द्वारा प्रोत्साहन देने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

surendra shukla Bhramar5 के द्वारा
August 12, 2011

चातक बोले सत्यानाश …बहुत सुन्दर देवी की कृपा से आनंद आ गया वहां कहाँ जांच होनी है अभी रामदेव या हजारे की बात हो तो पूरी सेना रिकार्ड खंगालने में जुट जा रही है … भ्रमर ५

    chaatak के द्वारा
    August 13, 2011

    स्नेही भ्रमर जी, जांच करें या आरोप लगाएं सांच को आंच कहाँ! प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

manoranjan thakur के द्वारा
August 12, 2011

सुंदर रचना बधाई

    chaatak के द्वारा
    August 12, 2011

    स्नेही बंधु, प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद!

Santosh Kumar के द्वारा
August 12, 2011

आदरणीय चातक जी, चंद लाइनों में सब कुछ ,..हमको अब लाज बचानी ही होगी ,..अन्यथा ..सत्यानाश ,..सत्यानाश ,..सिर्फ सत्यानाश

    chaatak के द्वारा
    August 12, 2011

    स्नेही संतोष जी, आपने बिलकुल सही कहा अब युवाओं को स्वयं आगे बढ़ना होगा वर्ना ये दर्जा पांच दलाल पूरे देश का सत्यानाश करके ही छोड़ेंगे| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

alkargupta1 के द्वारा
August 12, 2011

चातक जी , बहुत ही सुन्दर शैली व चंद पंक्तियों में सब कुछ बयां कर दिया ! सर्वत्र सत्यानाश ही सत्यानाश !

    chaatak के द्वारा
    August 12, 2011

    आदरणीय अलका जी, पंक्तियों के मर्म को समझने और हिन्दुतान की इस दुर्दशा पर विचार रखने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद!

Ramesh Bajpai के द्वारा
August 12, 2011

प्रिय श्री चातक जी ” अनूठी शैली सार्थक बात , बहुत निराला यह अंदाज

    chaatak के द्वारा
    August 12, 2011

    आदरणीय श्री बाजपेयी जी, सादर अभिवादन! आप वरिष्ठों से मिलने वाला स्नेह ही है जो मनोभाव को शब्दों में व्यक्त करने की तौफीक देता है| हार्दिक धन्यवाद!

vasudev tripathi के द्वारा
August 12, 2011

भ्रष्टो की सरकार में, नहीं जिवन की आश| चोर उचक्के मंत्रीजी, राजा है बदमाश|| सच कहते हो चातक भइया, चहुँ ओर से सत्यानाश……………

    chaatak के द्वारा
    August 12, 2011

    स्नेही वासुदेव जी, आपकी पंक्तियों ने रचना का अर्थ और ज्यादा स्पष्ट कर दिया| त्वरित और निसाने को भेद देने वाली प्रतिक्रिया का शुक्रिया!


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