चातक

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बीप-बीप !

Posted On: 3 Jul, 2011 Others में

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जनता पस्त सोनिया मस्त !


रामदेव पर लाठी भाँजी,

स्विस बैंक गया राहुल गाँधी !


दिग्गी अलापे कुक्कुर तान !


शीला फिर से हुई जवान !


सिब्बल बोले बीप-बीप !


मनमोहन है बिलकुल चुप !


चुप है तो ही अच्छा है।


भैँस पूँछ उठाएगी तो भजन थोड़े गायेगी

वो भी बीप-बीप ही करेगी !

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chaatak के द्वारा
July 10, 2011

रौशनी जी, इस सरकार की तो बीप-बीप होके रहेगी इलेक्शन आने दीजिए जनता बिना बीप-बीप के बोलेगी और इनको माई-बाप सब याद आ जायेंगे| प्रतिक्रिया का धन्यवाद!

roshni के द्वारा
July 8, 2011

चातक जी बहुत खूब क्लास लगई अपने सरकार की… मगर बीप बीप की आवाज के कारन ही जनता की आवाज इन लोगों को सुनाई नहीं देती ………बहुत खूब लिखा बधाई

nikhil के द्वारा
July 4, 2011

चातक जी क्या जबरदस्त कटाक्ष किया है .. इतने कम शब्दों में .

    chaatak के द्वारा
    July 5, 2011

    स्नेही श्री निखिल जी, इस कटाक्ष पर आपकी प्रतिक्रिया पाकर बहुत ख़ुशी हुई| इन दिनों व्यस्तता के कारण ब्लॉग संवाद नहीं हो पाया आशा करता हूँ अब नियमित हो सकूंगा | बहुत बहुत धन्यवाद!

Tamanna के द्वारा
July 4, 2011

यह व्यंग्यात्मक रचना कॉग्रेस विरोधी आपकी विचारधारा को स्पष्ट रूप से प्रमाणित करती है. जिन शब्दों का प्रयोग आपने किया हैं वे निश्चित तौर पर सरकार के प्रति आपकी नाराज़गी व्यक्त करने के साथ-साथ, थोड़े अटपटे भी प्रतीत हो रहें हैं. http://tamanna.jagranjunction.com/author/tamanna/

    chaatak के द्वारा
    July 4, 2011

    तमन्ना जी, कांग्रेस हो या कोई और सियासी दल क्या फर्क पड़ता है, यदि कोई विचारधारा जिसका मैं अपने देश में या दुनिया के किसी भी देश में समर्थन करता हूँ तो वह है राष्ट्रवाद| आपने बिलकुल सही पहचाना शब्द अटपटे ही नहीं तीखे और कडवे भी हैं जो सियासी गुलामी को झेल रहे एक मुल्क के हर आज़ाद इंसान की गुलामी की कडवाहट है| आपने रचना पढ़ी और सटीक प्रतिक्रिया दी, आपका हार्दिक धन्यवाद!

Alka Gupta के द्वारा
July 4, 2011

चातक जी , वर्तमान राजनीति पर बहुत ही ज़ोरदार व्यंग्य किया है पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा !

    chaatak के द्वारा
    July 4, 2011

    स्नेही अलका जी, व्यंग के बारे में आपकी राय जानकर बेहद ख़ुशी हुई| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

nishamittal के द्वारा
July 4, 2011

बहुत कड़ा प्रहार वर्तमान अस्त-व्यस्त राजनैतिक स्थिति पर.

    chaatak के द्वारा
    July 4, 2011

    स्नेही निशा जी, इस राजनैतिक अव्यवस्था को अभिजन वर्ग की अराजकता कहूँगा जहां पूरा देश दो हिस्सों में बाँट दिया गया है एक शासक वर्ग तो दूसरा सिर्फ और सिर्फ शासित| प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद!

Ramesh Bajpai के द्वारा
July 4, 2011

प्रिय श्री चातक जी मन की व्यथा जब सब्र की छलांग कर बही तो बस कमाल हो गया | स्नेह व शुभकामनाओ सहित

    chaatak के द्वारा
    July 4, 2011

    आदरणीय बाजपेयी जी, मन की व्यथा तो अब इस कदर बढ़ चुकी है कि साहित्यिक व्यंग में भी कडवाहट का अहसास करता हूँ जब स्वयं के अन्दर इतनी कडवाहट महसूस करता हूँ तो ये भी ख्याल आता है कि उन भोले-भाले लोगों के दिल में कितनी वेदना होगी जो इसे व्यक्त भी नहीं कर पाते और सिर्फ पिसते जा रहे हैं| आपके स्नेह व् आशीर्वाद का सदा आकांक्षी| चातक !

संदीप कौशिक के द्वारा
July 3, 2011

स्नेही चातक जी, ये मंच बहुत दिनों से आपकी किसी नयी कृति की प्रतिक्षा में था । वर्तमान सरकार की कु-नीतियों पर एक अच्छा व्यंग्य । बधाई आपको !! :)

    chaatak के द्वारा
    July 4, 2011

    प्रिय संदीप जी, मंच से मेरा जुड़ाव मुझे सदैव अपनी और खींचता है परन्तु कुछ दिनों से व्यक्तिगत व्यस्तता और बी.एस.एन.एल. की मेहरबानी ने मुझे लगातार मंच पर आने से रोके रखा खैर अब नेटवर्क की समस्या से निजात मिल गई है और आशा है कि अपने मित्रों के साथ ब्लॉग संवाद एक बार फिर निरंतरता की ओर अग्रसर होगा| इस सरकार के पास कुशासन, कुनीतियों के अलावे दु:शासनों की भी भरमार है, अब तो लगता है, इस तरह की सरकार से अच्छी तो अराजकता की स्थिति होती है| व्यंग पर आपकी प्रतिक्रिया का धन्यवाद !


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